भागलपुर से ब्रजेश की रिपोर्ट : नगर निगम क्षेत्र में प्रशासनिक विकेंद्रीकरण और कार्यप्रणाली में सुधार के लिए प्रस्तावित ”अंचल गठन” की प्रक्रिया फाइलों में सिमट कर रह गयी है. नगर निगम प्रशासन ने औपचारिक तौर पर एक कमेटी का गठन तो कर दिया है, लेकिन पांच महीने बीत जाने के बाद भी इस कमेटी की जिम्मेदारियां और कार्य-दायित्व तय नहीं किये जा सके हैं.
कागजों तक सीमित है कमेटी का काम
नगर निगम ने जनवरी में उपनगर आयुक्त, टाउन प्लानर और अन्य वरीय अधिकारियों को शामिल कर एक कमेटी बनायी थी. इस कमेटी का मुख्य काम अंचल गठन से जुड़े सभी पहलुओं पर विचार कर बोर्ड की बैठक में अपनी अनुशंसा प्रस्तुत करना था. हालांकि, पांच महीने का लंबा समय बीतने के बाद भी यह प्रक्रिया सिर्फ कागजों पर ही चल रही है. इस बीच बोर्ड की बैठक भी संपन्न हो चुकी है, लेकिन अंचल गठन के प्रस्ताव पर कोई ठोस प्रगति नहीं हो सकी है.क्या है पूरी प्रक्रिया?
नगर विकास व आवास विभाग (UDHD) ने पिछले साल अगस्त में ही नगर निकायों में अंचल गठन को लेकर अधिसूचना जारी की थी. विभागीय निर्देश के अनुसार, कमेटी को विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर बोर्ड से स्वीकृति लेनी है, जिसके बाद इसे अंतिम मंजूरी के लिए विभाग को भेजा जायेगा. विभाग से हरी झंडी मिलने के बाद ही अधिसूचना जारी होगी और प्रशासनिक ढांचा लागू किया जा सकेगा.
क्यों जरूरी है अंचल का गठन?
नगर निगम का कार्यक्षेत्र काफी विस्तृत है. वर्तमान में शहर की साफ-सफाई, जल निकासी, जलापूर्ति, कचरा प्रबंधन, स्ट्रीट लाइट और आपदा प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण कार्य नगर आयुक्त के सीधे नियंत्रण में हैं. निगम प्रशासन का मानना है कि कार्यक्षेत्र बड़ा होने के कारण सभी वार्डों की नियमित निगरानी और कार्यों की गुणवत्ता बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो गया है. अंचल गठन होने से प्रशासनिक विकेंद्रीकरण होगा, जिससे निगरानी व्यवस्था मजबूत होगी और नागरिक सुविधाओं में गुणात्मक सुधार आयेगा.किन आधारों पर होगा अंचल का निर्धारण?
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, अंचल का गठन कई मानकों के आधार पर किया जायेगा. इसमें मुख्य रूप से शहर की भौगोलिक स्थिति, आबादी का घनत्व, हाउसहोल्ड (परिवारों) की संख्या, सड़क नेटवर्क, नागरिक सुविधाओं की उपलब्धता के आधार पर गठन होगा.
