bhagalpur news. पुल बनाने के लिए चार माह से प्रतीक्षा में बैठी है एजेंसी, मुख्यालय की ढिलाई से 40 हजार आबादी की राह मुश्किल

सूबे में एक के बाद एक पुल गिरने की घटनाओं के बीच रिवीजन के नाम पर किला घाट में बनने वाले पुल का डिजाइन मुख्यालय ने लंबे समय से अपने पास रोक रखा है, जिसे अब तक वापस नहीं किया गया है

ब्रजेश, भागलपुर

सूबे में एक के बाद एक पुल गिरने की घटनाओं के बीच रिवीजन के नाम पर किला घाट में बनने वाले पुल का डिजाइन मुख्यालय ने लंबे समय से अपने पास रोक रखा है, जिसे अब तक वापस नहीं किया गया है.

डिजाइन नहीं मिलने के कारण टेंडर फाइनल होने के बावजूद पिछले चार माह से निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है और चयनित ठेका एजेंसी खाली बैठी है. एजेंसी ने निर्माण सामग्री साइट पर गिरा दी है और फाउंडेशन का आंशिक काम कर रुक गयी है, जिससे बरसात से पहले कार्य पूरा नहीं होने पर परियोजना अगले साल तक टलने की आशंका है. ग्रामीण कार्य विभाग के रिमाइंडर और फोन कॉल के बावजूद मुख्यालय के अधिकारी टालमटोल कर रहे हैं और लगातार डिजाइन देने की तारीख आगे बढ़ा रहे हैं.

बीते सोमवार को मुख्यालय से बात करने पर एक दिन रुकने को कहा गया, जबकि मंगलवार को फोन करने पर बुधवार तक डिजाइन देने की बात कही गयी है.

विभागीय अधिकारियों का कहना है कि अब बुधवार को फिर संपर्क कर डिजाइन उपलब्ध कराने को कहा जायेगा. पुल का निर्माण करीब 12 करोड़ की राशि से होना निर्धारित है. बिहार की शिवदुर्गा नामक एजेंसी को पुल बनाने का काम मिला है. इस पुल के निर्माण के लिए दो साल का समय निर्धारित है. इसमें से चार माह बीत चुका है. अगर काम में देरी होगी, तो पूरा भी निर्धारित समय में नहीं हो सकेगा. परियोजना तय समय से पीछे चला जायेगा. इससे एजेंसी का टाइम एक्सटेंशन चार्ज भी कट सकता है.

पुल बनने से दो दर्जन से अधिक गांवों को मिलेगी राहत

पुल अगर बन जाता है, तो शंकरपुर और अजमेरीपुर बेरिया पंचायत के दो दर्जन से अधिक गांवों के लोगों को राहत मिलेगी. नाव का सहारा नहीं लेना पड़ेगा और न ही जिला मुख्यालय आने-जाने के लिए जमुनिया नाला पर चचरी पुल बनाने की जरूरत पड़ेगी. पुल बनाने के लिए मिट्टी की जांच ओडिशा के लेबोरेटरी में करायी गयी है. पुल का निर्माण मुख्यमंत्री सेतु निर्माण योजना से होगा और यह स्टेट फंड से बनने जा रहा है.

पुल सहित गांवों में बनेगी सड़क

जमुनिया नाला पर सिर्फ पुल ही नहीं बनेगा, बल्कि ग्रामीण सड़क भी बनायी जायेगी. पुल सहित ग्रामीण सड़कों की लंबाई 96.84 किमी होगी. यानी, शंकरपुर और अजमेरीपुर बेरिया पंचायत के दो दर्जन से अधिक गांवों आपस में जुड़ जायेंगे. शहर के साथ गांवों की कनेक्टिविटी भी बढ़ जायेगी.

40 हजार से अधिक आबादी को होगी आवागमन की सुविधा

जमुनिया नाला पर पुल और सड़क बनने से शंकरपुर, दारापुर, बिंद टोली, सहूनिया, बंडाल, मोहनपुर दियारा, रसीदपुर, अजमेरिपुर सहित दो पंचायत के दो दर्जन गांवों के 40 हजार से अधिक आबादी को आवागमन की सुविधा होगी. वर्तमान में गांव से जिला मुख्यालय आने के लिए ग्रामीण विश्वविद्यालय के रविंद्र भवन के पीछे, गोलाघाट, सकीचन घाट पर आपस में चंदा कर ग्रामीण खुद चचरी पुल बनाते हैं. जान जोखिम में डालकर ग्रामीण इस चचरी पुल से आना-जाना करते हैं. बाढ़ में पुल ध्वस्त होने से आवागमन की गंभीर समस्या खड़ी हो जाती है. लोगों को नाव का सहारा लेना पड़ता है.

पुल गिरने की घटना सूबे में बढ़ने के चलते रिविजन के लिए डिजाइन मंगाया गया, लेकिन अब तक ग्रीन सिग्नल नहीं मिला है. लगातार मुख्यालय के संपर्क में है. इस वजह काम शुरू नहीं हो पा रहा है. चार माह से चयनित एजेंसी भी बैठी है. बरसात से पहले फाउंडेशन का कार्य पूरा कराना बेहद जरूरी है. बुधवार को मुख्यालय से बात की जायेगी.

प्रताप पासवान, कार्यपालक अभियंता

ग्रामीण कार्य विभाग कार्य प्रमंडल, भागलपुर

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Author: ATUL KUMAR

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