Bhagalpur News. जोर पकड़ रहा मिलावटी खाद्य पदार्थों का काला धंधा, सालाना 100 करोड़ का कारोबार

त्योहारी सीजन में मिलावटी धंधा जोरों पर.

-सरसों तेल में कैमिकल की मिलावट, हल्दी में पीला रंग, मिर्च पाउडर में लाल रंग की हो रही मिलावट-त्योहारी मौसम शुरू होते ही शुरू हो जाता है मिलावटखोरी का धंधा, मिठाई भी मिलावट से अछूती नहीं

दीपक राव, भागलपुरफेस्टिवल सीजन खासकर रमजान, होली व ईद में मिलावटखोरी का काला धंधा शहर में जोर पकड़ लेता है. खाद्यान्न, घी-तेल से लेकर मिठाई तक में मिलावट करके मुनाफा कमाने वाले एक्टिव हो गये हैं. त्योहार आते ही शहर में अस्थायी दुकानदारों की संख्या बढ़ गयी है. खाद्य पदार्थों में किसी न किसी रूप में मिलावट की जा रही है. खाद्यान्न कारोबारियों व बाजार विशेषज्ञों की मानें तो मिलावटी सामान से भागलपुर में अतिरिक्त 100 करोड़ तक का सालाना कारोबार हो रहा है.

ऐसे होता है मिलावट: खोवा में अधिक चीनी, बूंदी लड्डू में मटर का बेसन व पनीर में अरारोट

विश्वस्त मिठाई दुकानदार ने बताया कि बूंदी के लड्डू में चना के बेसन में मैदा, चौरठ, मटर बेसन की मिलावट होती है, जबकि पनीर में आरारोट, पेड़ा बनाने के लिए खोवा में सूज्जी, आरारोट के साथ अधिक चीनी मिलाया जाता है. खाद्यान्न कारोबारी का कहना है कि सरसों तेल में ड्रॉप्सी मिक्स किया जाता है, जिससे तेल में झांस लगता है, जो लोगों की विश्वसनीयता के लिए काफी हो जाती है. लोगों को यह मालूम नहीं कि कैसे प्रयोग हो रहे हैं. यूरिया, पाउडर, उजला खल्ली सहित अन्य कैल्सियम मिला कर दूध को गाढ़ा बना कर बाजारों में बेचा जाता है. अब नकली रिफाइन में तैयार रेडिमेड बुूंदी का अधिकांश जगहों पर धड़ल्ले से प्रयोग हो रहा है. सूखे मेवे से बनी मिठाई में मिलावट बाजार में नकली खोआ के जरिए कई प्रकार की मिठाई बनायी जाती है. मिलावटी खोआ व घी की आपूर्ति कई जगहों से हो रहा है. धनबाद, कानपुर, ग्वालियर आदि स्थानों से मिक्स होकर घी पहुंच रहा है. पटना से नकली खोवा आ रहा है.

चमक वाले खाद्यान्न से रहें सतर्क

मसाला, हल्दी, दलहन, तेलहन, फल, सब्जी या खाद्यान्न ही क्यों नहीं हो सभी में मिलावट की शिकायत आ रही है. खाद्य सामग्रियों में गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए मिलावट की जाये तो कोई आपत्ति नहीं हो, लेकिन ये मिलावट निम्न गुणवत्ता वाली सामग्री या गैर उपयोगी वस्तुओं व कम दाम के हानिकारक वस्तुओं के साथ की जा रही है. किराना दुकानदारों का कहना है कि दाल को सुरक्षित करने के लिए पोलिस की गयी है और चावल में चमक लाने के लिए यूरिया मिलायी जाती है. उनका कहना है ग्राहक भी चमकदार चावल ही पसंद करते हैं. हल्दी में पीला रंग, मिर्च पाउडर में लाल रंग, जीरा में सुआ का बीज मिलाया जा रहा है. कई व्यवसायियों का ऐसा भी मानना है कि स्टोन पाउडर से पोलिस कर वजन बढ़ाया जाता है, इससे पथरी की बीमारी का खतरा रहता है. मिलावटी समान बेचने वाले कुछ दुकानदारों के कारण अन्य व्यवसायियों का भी कारोबार प्रभावित होता है.

मिठाई में मिलावट की करें पहचान

अगर त्योहारों पर आप भी बाजार में मिठाई खरीदने जायें, तो इन तरीकों से पता लगाया जा सकता है. दानेदार मावा में भी मिलावट की शिकायत मिल रही है. शुद्ध मावा हमेशा मुलायम होता है. आप मावे को उंगलियों के बीच मसलें अगर यह दानेदार लगता है, तो मावा मिलावटी है. मिठाई के तेज रंग से भी मिठाई के नकली होने का अंदाजा लगाया जा सकता है.

कहते हैं चिकित्सक

नकली खोआ व पनीर में केमिकल का प्रयोग किया जाता है. इसके सेवन से मानव शरीर के अंदर पाचन तंत्र सबसे ज्यादा प्रभावित होता है, जो बाद में में किडनी व लीवर को नुकसान पहुंचाता है. मिलावटी मसाले कैंसर और हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियां पैदा कर सकते हैं. पर्व-त्योहार पर खाने पीने में संयम व सावधानी बरतने की जरूरत है.

डॉ डीपी सिंह, वरीय चिकित्सक

नाथनगर के कजरैली में पकड़ाया है मिलावटी सरसों तेल

नाथनगर के कजरैली में 5000 लीटर से अधिक मात्रा में मिलावटी सरसों तेल हाल में पकड़ाया है. तेल कारोबारियों की मानें तो अब भी जिले के जगदीशपुर, नाथनगर, शहर के दक्षिणी क्षेत्र में सरसों तेल में भारी मात्रा में मिलावट की गयी जा रही है. मिलावटी सरसों तेल का गोरखधंधा फलफूल रहा है. राइस ब्रान का तेल सरसों तेल के नाम से बेचा जा रहा है. यह सफेद रंग का होता है. इसमें पीला रंग व झांस के लिए कैमिकल मिलाया जा रहा है. 15 साल पहले ड्रॉप्सी तेल भी पकड़ाया था.

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By KALI KINKER MISHRA

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