भागलपुर शहर के गंगा तटीय इलाकों में चार दिनों से लगातार गंगा के साथ-साथ बैक मार रहे नालों का गंदा पानी भरने से स्थिति भयावह हो गई है. आदमपुर घाट, बैंक कॉलोनी, मानिक सरकार घाट, गोलाघाट, दीपनगर और किलाघाट जैसे इलाकों में बाढ़ का पानी घुसने से नागरिकों का जीना मुहाल हो गया है. स्थिति इस कदर विकट हो चुकी है कि जहरीले जीव-जंतुओं के आतंक, भीषण बदबू और मच्छरों के प्रकोप के चलते किराएदार मकान खाली कर सुरक्षित ठिकानों की ओर पलायन कर रहे हैं, जबकि मकान मालिक अपने सगे-संबंधियों के यहां शरण लेने को मजबूर हैं.
सांप और बिटगोय का डेरा, बैंक कॉलोनी में सड़कें बनीं दलदल
दीपनगर की झुग्गी बस्ती समेत 200 घरों में बाढ़ का पानी भर गया है, जिसको लेकर डीवाईएफआई नेता मनोज गुप्ता ने प्रशासन से तत्काल राहत की मांग की है. वहीं बैंक कॉलोनी के निवासी सूरज प्रभात दुबे के अनुसार कॉलोनी के लगभग सभी घरों के ग्राउंड फ्लोर में पानी प्रवेश कर चुका है. सड़कों पर घुटने भर पानी और गाद जमने से फिसलन बढ़ गई है, जिससे दोपहिया वाहन चालकों का चलना दूभर हो गया है. पानी के साथ घरों में विषैले सांप और बिटगोय (गोह) घुस रहे हैं, जिससे लोग रतजगा करने को विवश हैं.
अपार्टमेंट्स के बेसमेंट डूबे, लग्जरी गाड़ियां निकालने की मची होड़
मानिक सरकार मोहल्ले के वीआईपी इलाकों और बहुमंजिला अपार्टमेंट्स के बेसमेंट में तेजी से पानी भरने लगा है. अपार्टमेंट्स के भूमिगत पार्किंग में पानी घुसने से लोग अपनी महंगी और लग्जरी गाड़ियों को सुरक्षित ऊंचे स्थानों पर ले जाने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं. सखीचंद घाट निवासी आनंद मिश्रा और दीपनगर घाट के राज कुमार ने बताया कि सड़ांध और गंदे पानी के ठहराव से क्षेत्र में महामारी फैलने की आशंका बढ़ गई है, जिससे लोग घर में कैद रहने को मजबूर हैं.
साहेबगंज इलाके में 500 से अधिक घर डूबे, खाने के पड़े लाले
राजद नेता तिरुपतिनाथ यादव ने बताया कि साहेबगंज क्षेत्र के बिंद टोली, मोहनपुर, साकम, रामतोलपुर, लालूचक, नीलकोठी और आसपास के 500 से ज्यादा घरों में गंगा का पानी समा चुका है. स्थानीय निवासी रमण कुमार के अनुसार घरों के अंदर पानी घुसने से भोजन बनाने का संकट खड़ा हो गया है और मवेशियों के चारे का भारी अभाव हो गया है. नीलकोठी क्षेत्र में संपर्क मार्ग पूरी तरह कट जाने से लोगों का संपर्क शहर से टूट गया है.
बूढ़ानाथ पार्क बना तालाब, मशानी काली परिसर जलमग्न
गंगा के बढ़ते जलस्तर का असर धार्मिक और सार्वजनिक स्थलों पर भी दिखने लगा है. सखीचंद घाट की पुलिया के ऊपर से गंगा की तेज धारा बह रही है. ऐतिहासिक बूढ़ानाथ मंदिर जाने वाले मुख्य मार्ग पर पानी भर गया है, जबकि बूढ़ानाथ मंदिर के ठीक नीचे स्थित मशानी काली परिसर और सार्वजनिक पार्क पूरी तरह डूबकर तालाब में तब्दील हो चुके हैं.
