सिल्क सिटी भागलपुर में अखंड सौभाग्य और सुहाग के महापर्व 'हरतालिका तीज' को लेकर तैयारियां चरम पर पहुंच गई हैं. आगामी 14 सितंबर (सोमवार) को रखे जाने वाले इस कठिन और निर्जला व्रत के लिए सुहागिन महिलाओं के साथ-साथ युवतियों में भी भारी उत्साह देखा जा रहा है.
शहर के मुख्य व्यापारिक केंद्र सुजागंज बाजार से लेकर घंटाघर, खलीफाबाग और विभिन्न चौक-चौराहों के बाजारों में महिलाओं की भारी चहल-पहल है. कपड़े, सुहाग पिटारी, सौंदर्य प्रसाधन और पूजन सामग्री की दुकानों पर सामान्य दिनों के मुकाबले ग्राहकों की तीन गुना भीड़ उमड़ रही है.
उदया तिथि के आधार पर 14 सितंबर को मान्य होगा व्रत
पंचांग गणना की जानकारी देते हुए पंडित समीर मिश्रा ने बताया कि भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि का आरंभ 13 सितंबर को सुबह 7 बजकर 08 मिनट पर होगा, जिसका समापन 14 सितंबर की सुबह 7 बजकर 06 मिनट पर होगा. सनातन धर्म में उदया तिथि की प्रधानता के चलते हरतालिका तीज का व्रत 14 सितंबर, सोमवार को ही श्रद्धापूर्वक रखा जाएगा.
पंडित अंजनी शर्मा के अनुसार, भाद्रपद शुक्ल तृतीया को हस्त नक्षत्र में भगवान शिव, माता पार्वती और प्रथम पूज्य श्री गणेश के विधि-विधान से पूजन का अनंत फल प्राप्त होता है. यह व्रत सुहागिन महिलाएं अखंड सौभाग्य व पति की दीर्घायु के लिए तथा कुंवारी कन्याएं सुयोग्य व मनोवांछित वर की प्राप्ति हेतु पूर्णतः निर्जला और निराहार करती हैं.
बाजार में ब्रासो साड़ी और जयपुरी लहठी का क्रेज
तीज पर्व को लेकर सिल्क सिटी के वस्त्र और आभूषण बाजार पूरी तरह सज चुके हैं.
- साड़ी बाजार: थोक कपड़ा व्यवसायी कृष्णा गोयल ने बताया कि इस बार काले रंग को छोड़कर लाल, पीले, गुलाबी और हरे रंगों की भारी मांग है. विशेष रूप से प्रिंटेड वर्क पट्टी साड़ी, ब्रासो साड़ी और रेडीमेड स्टिच ब्लाउज वाली फ्रेंडी साड़ी महिलाओं को खूब आकर्षित कर रही है, जिनकी कीमत ₹1,000 से ₹2,500 तक है.
- लहठी और चूड़ी: लहठी कारोबारी बुलिया मनिहार के अनुसार, प्लेन चूड़ियों के साथ-साथ ₹300 से ₹600 तक की रेंज वाली डिजाइनर जयपुरी लहठी, जयपुरी बाला, कटिंग और फैंसी चूड़ियों की जमकर खरीदारी हो रही है.
माता पार्वती की तपस्या से जुड़ा है पर्व का महत्व
पंडित सौरभ मिश्रा ने बताया कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए जंगल में कठोर तपस्या कर हस्त नक्षत्र में यह पावन व्रत किया था.
इसके साथ ही तीज के उपरांत चौरचन (चौठ चंद्र) पर्व पर चतुर्थी तिथि में उदित चंद्रमा को दही के छाछ के साथ अर्घ्य देने की परंपरा भी सीमांचल व अंग क्षेत्र में श्रद्धा से निभाई जाती है. व्रत के अगले दिन सुहागिनें ब्राह्मणों को दान-दक्षिणा देकर पारण करेंगी.
