Bhagalpur news गंगा को स्वच्छ व निर्मल बनाने को लेकर सर्वे
सुलतानगंज गंगा की स्वच्छता और अविरलता को लेकर सुलतानगंज में अब प्रयास तेज होते दिख रहे हैं.
सुलतानगंज गंगा की स्वच्छता और अविरलता को लेकर सुलतानगंज में अब प्रयास तेज होते दिख रहे हैं. बिहार राज्य गंगा नदी संरक्षण कार्यक्रम प्रबंधन सोसायटी के तहत चयनित सुलतानगंज में छह से नौ अप्रैल तक चले क्षेत्र भ्रमण व उन्मुखीकरण कार्यक्रम में गंगा को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए जमीन स्तर पर मंथन किया. कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के अधिकारियों और विशेषज्ञों की टीम ने शहर के प्रमुख घाटों, नालों और प्रदूषण संभावित स्थलों का गहन निरीक्षण कर स्थिति का आकलन किया.
प्रदूषण के स्रोतों की पहचान, हॉट स्पॉट पर नजर
टीम ने नमामि गंगे घाट, सीढ़ी घाट, एसटीपी, इंटरमीडिएट पंपिंग स्टेशन, लैंडफिल साइट सहित कई महत्वपूर्ण स्थानों का निरीक्षण किया. इस दौरान देखा गया कि किन-किन जगहों से नालों का पानी सीधे गंगा में गिर रहा है. ऐसे सभी हॉट स्पॉट को चिह्नित कर रिपोर्ट तैयार की जा रही है, ताकि उन पर प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई हो सके.
डॉल्फिन क्षेत्र को लेकर विशेष सतर्कता
निरीक्षण में गंगा के डॉल्फिन क्षेत्र को पूरी तरह प्रदूषण मुक्त रखने पर विशेष जोर दिया गया. श्रावणी मेला और भादो में श्रद्धालुओं की ओर से गंगा में डाले जाने वाले पूजन सामग्री और कचरे को नियंत्रित करने के उपायों पर गंभीरता से चर्चा हुई. कुछ स्थानों पर जगह के अभाव में इंटरमीडिएट पंपिंग स्टेशन नहीं बन पाये हैं, जिससे गंदा पानी सीधे बह रहा है. टीम ने इन समस्याओं को चिह्नित कर समाधान की दिशा में ठोस रणनीति बनाने पर बल दिया है. नप के कार्यपालक पदाधिकारी कृष्ण भूषण कुमार ने बताया कि गंगा में प्रदूषण के विभिन्न स्रोतों की पहचान की गयी और उसके निराकरण की रणनीति बनायी गयी. सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट और लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट को मजबूत करने के लिए विशेष चर्चा की गयी. विशेषज्ञ टीम ने गंगा तट के विभिन्न हिस्सों का निरीक्षण कर यह देखा कि किन-किन स्थानों से प्रदूषण गंगा में पहुंच रहा है. खासकर डॉल्फिन क्षेत्र को पूरी तरह प्रदूषण मुक्त बनाये रखने पर विशेष जोर दिया गया. निरीक्षण में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट (ठोस अपशिष्ट) और लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट (तरल अपशिष्ट) को लेकर विस्तार से समीक्षा की गयी. टीम ने सुनिश्चित करने पर बल दिया कि शहर के नालों का गंदा पानी सीधे गंगा में न गिरे. इसके लिए बनाये गये एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) और इंटरमीडिएट पंपिंग स्टेशन का जायजा लिया गया. कार्यक्रम में चंद्रगुप्त प्रबंधन संस्थान पटना, जीआईजेड के तकनीकी सलाहकारों सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने भाग लेकर जल प्रबंधन, ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन, बाढ़ संभावित क्षेत्र और भूजल संकट जैसे विषयों पर विस्तार से जानकारी ली. अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि गंगा केवल आस्था ही नहीं, बल्कि जीवन रेखा है. इसे स्वच्छ व अविरल बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है.
रिपोर्ट के आधार पर बनेगी ठोस कार्ययोजना
नप स्वच्छता पदाधिकारी अमित कुमार भगत ने बताया कि क्षेत्र भ्रमण के दौरान जुटाये गये तथ्यों के आधार पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर संबंधित विभाग को सौंपी जायेगी. इसी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्ययोजना तैयार कर गंगा को स्वच्छ बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाये जायेंगे. नप का मानना है कि इस पहल का असर आने वाले दिनों में दिखेगा. श्रावणी मेला से पहले गंगा की स्वच्छता और व्यवस्था को बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान दिया जायेगा. टीम में डीआरडीए निदेशक, नोडल पदाधिकारी, जिला गंगा प्लान, जीआईजेड के सलाहकार डॉ अंजना पंत, चंद्र गुप्त प्रबंधन संस्थान,पटना से दो एसोसिएट प्रोफेसर, पीएचईडी के कार्यपालक अभियंता, बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण परिषद के क्षेत्रीय पदाधिकारी, नप के कार्यपालक पदाधिकारी कुष्ण भूषण कुमार, स्वच्छता पदाधिकारी, सहायक अभियंता आदि शामिल थे.