बुनियादी ढांचा और 30 बेड की क्षमता होने के बावजूद अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों के पद रिक्त होने से गंभीर मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद सीधे भागलपुर के मायागंज (JLNMCH) रेफर करना पड़ता है. विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने के बाद से इस अस्पताल पर निर्भरता और बढ़ गई है. इसे लेकर अब सामाजिक संगठनों, स्थानीय नागरिकों और रोगी कल्याण समिति ने स्वास्थ्य मंत्री से अविलंब ब्लड बैंक की स्थापना और रिक्त पदों को भरने की गुहार लगाई है.
स्वीकृत 16 पदों में से 7 पद रिक्त, इन विभागों में नहीं हैं डॉक्टर
अस्पताल में सामान्य चिकित्सा सेवाएं और प्रसव की सुविधा तो चालू है, लेकिन जटिल और आपातकालीन केस हैंडल करने के लिए मैनपावर की भारी कमी है:
- रिक्तियों का गणित: अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों के कुल 16 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 7 महत्वपूर्ण पद लंबे समय से खाली पड़े हैं.
- प्रभावित विभाग: स्त्री एवं प्रसूति रोग, शिशु रोग, हड्डी रोग (ऑर्थोपेडिक), सर्जरी और एनेस्थीसिया जैसे मुख्य विभागों में विशेषज्ञ डॉक्टरों का पदस्थापन नहीं होने से स्थानीय स्तर पर जटिल ऑपरेशन या इलाज संभव नहीं हो पा रहा है.
ब्लड बैंक न होने से मरीजों की जान पर आफत
सड़क दुर्घटनाओं और प्रसव के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव होने की स्थिति में अस्पताल में खून की उपलब्धता न होना सबसे बड़ी मुसीबत है:
- परिजनों की फजीहत: आपातकालीन स्थिति में ब्लड बैंक की सुविधा न होने से तीमारदारों को खून के इंतजाम के लिए भागलपुर दौड़ना पड़ता है, जिससे कई बार मरीज की जान पर बन आती है.
- कागजी योजनाएं: हालांकि सरकार द्वारा इस अस्पताल को सुपर स्पेशियलिटी और नवजात शिशुओं के विशेष अस्पताल के रूप में विकसित करने का दावा किया जा रहा है, लेकिन धरातल पर मुख्य जरूरतें अब भी अधूरी हैं.
बुनियादी सुविधाएं जल्द होंगी बहाल: सिविल सर्जन
अस्पताल की इस बदहाली को लेकर रोगी कल्याण समिति के सदस्यों ने सरकार को घेरा है, वहीं स्वास्थ्य महकमे ने सकारात्मक आश्वासन दिया है:
"नवगछिया अनुमंडलीय अस्पताल पर गोपालपुर, रंगरा, इस्माईलपुर, खरीक, बिहपुर और नारायणपुर समेत कई प्रखंडों की एक बड़ी आबादी आश्रित है. हमने स्वास्थ्य मंत्री से मिलकर यहां अविलंब ब्लड बैंक शुरू करने और रिक्त 7 विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती की मांग की है ताकि गरीबों को भागलपुर न भागना पड़े." — मुकेश राणा, भाजपा महामंत्री सह सदस्य, रोगी कल्याण समिति
"नवगछिया अनुमंडलीय अस्पताल की समस्याओं और डॉक्टरों की कमी का मामला हमारे संज्ञान में है. मुख्यालय स्तर पर चिकित्सकों की बहाली और पदस्थापन की प्रक्रिया चल रही है. विभाग की प्राथमिकता है कि सुदूर और अनुमंडल स्तर के अस्पतालों को सुदृढ़ किया जाए. जल्द ही यहां ब्लड बैंक की स्थापना और सभी रिक्त पदों पर डॉक्टरों की प्रतिनियुक्ति कर दी जाएगी." — डॉ. अशोक कुमार, सिविल सर्जन, भागलपुर
