-एसएसएआई, आइसा, बहुजन स्टूडेंट यूनियन, छात्र युवा शक्ति तथा एनएसयूआई ने संयुक्त रूप से किया प्रदर्शन
यह भी कहा कि इस मामले में एसएम कॉलेज तथा टीएनबी महाविद्यालय के प्राचार्य समेत टीएमबीयू सिंडिकेट सदस्य डॉ निर्लेश कुमार द्वारा लिखित शिकायत किए जाने के आठ दिन बीत जाने के बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन तथा विश्वविद्यालय थानाध्यक्ष द्वारा किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की गयी. इसे लेकर छात्र-छात्राओं में रोष बढ़ रहा है. यहां तानाशाही रवैया बढ़ती जा रही है. सत्तापोषित मनमानी चल रही है.
मार्च का नेतृत्व संयुक्त रूप से एसएसएआई के विश्वविद्यालय अध्यक्ष लालू यादव, आइसा के राज्य सह सचिव प्रवीण कुशवाहा, छात्र युवा शक्ति के सत्यम वर्मा तथा एनएसयूआई के अमन कुमार ने किया. विरोध प्रदर्शन करते हुए प्रदर्शनकारियों ने कहा कि विद्यार्थी परिषद के नेताओं ने सरकारी संपत्ति को क्षति पहुंचाने के साथ-साथ सरकारी काम में बाधा डाला. शिक्षकों के साथ गाली-गलौज करने एवं उन्हें जान से मारने धमकी दिए जाने के मामले में लिखित शिकायत की गयी. बावजूद इसके उपद्रवियों पर कार्रवाई नहीं किया जाना यह दर्शाता है कि विश्वविद्यालय तथा पुलिस प्रशासन सत्ता के दबाव में उपद्रवियों पर कार्रवाई करने से परहेज कर रही है. इसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जायेगा. अविलंब उपद्रवियों पर कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार नहीं किया गया, तो आगे उग्र आंदोलन किया जायेगा. मार्च के दौरान प्रदर्शनकारी अभाविप की गुंडागर्दी नहीं चलेगी, महाविद्यालयों में उपद्रव करने वाले उपद्रवियों पर कार्रवाई करनी होगी, सत्ता संरक्षित गुंडों होश में आओ, पिछड़ा, दलित तथा अल्पसंख्यक समुदाय के शिक्षकों को अपमानित करना बंद करो आदि नारे लगा रहे थे. विरोध प्रदर्शन में एसएसएआई के पूर्व विश्वविद्यालय प्रवक्ता आशुतोष कुमार, वर्तमान प्रवक्ता प्रभाकर कुमार, प्रियांशु कुमार, सुद्दू खान, रवि पासवान, गोविन्द कुमार, रमन कुमार, महासचिव रवि राज कुमार, राजीव ठाकुर, संजय कुशवाहा, अमित राय, सुमित झा समेत सैकड़ों छात्र शामिल थे.
