bhagalpur news. पांच व्याख्याता पीएचडी और सात शिक्षक ट्रिपल आइटी से करेंगे एमटेक, विभाग ने दी एनओसी

सात शिक्षक करेंगे एमटेक.

पॉलिटेक्निक शिक्षकों को उच्च शिक्षा की अनुमति, पर शर्तें रहेंगी लागू

बिहार सरकार के विज्ञान, प्रावैधिकी व तकनीकी शिक्षा विभाग ने राज्य के विभिन्न राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थानों में कार्यरत व्याख्याताओं और विभागाध्यक्षों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने का रास्ता खोल दिया है. विभाग ने राज्य के कुल 30 शिक्षकों को एमटेक और पीएचडी वाले उच्च शिक्षण पाठ्यक्रमों में नामांकन और शोध कार्य जारी रखने के लिए विभागीय अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) जारी किया है. इनमें भागलपुर ट्रिपल आइटी से पांच शिक्षकों को पीएचडी और सात शिक्षकों को एमटेक करने के लिए एनओसी मिला है.

सहरसा के प्रभारी प्राचार्य भी करेंगे पीएचडी

सहरसा राजकीय पॉलिटेक्निक के प्रभारी प्राचार्य मिथुन कुमार (पीएचडी), पटना नवीन राजकीय पॉलिटेक्निक के व्याख्याता प्रत्यय अमृत (एमटेक), भागलपुर राजकीय पॉलिटेक्निक के व्याख्याता अमित कुमार (पीएचडी), राज्य प्रावैधिकी शिक्षा पर्षद के सहायक सचिव सह व्याख्याता सुनील कुमार (एमटेक), बांका राजकीय पॉलिटेक्निक के व्याख्याता रोशन कुमार पांडेय व बीरबल कुमार रजक (पीएचडी), अररिया राजकीय पॉलिटेक्निक के व्याख्याता विवेक ब्रह्मचारी (एमटेक) व अभय कुमार (एमटेक), बाढ़ राजकीय पॉलिटेक्निक के व्याख्याता समीर राज (एमटेक) व व्याख्याता नीरज कुमार (एमटेक), पश्चिम चंपारण राजकीय पॉलिटेक्निक के व्याख्याता सुशील कुमार दास (पीएचडी) और गुलजारबाग राजकीय पॉलिटेक्निक के व्याख्याता अजय कुमार (एमटेक) को शर्तों के साथ अनुमति दी गयी है.

प्रतिष्ठित संस्थानों से करेंगे पढ़ाई

विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार ये शिक्षक देश के प्रतिष्ठित संस्थानों जैसे आईआईटी खड़गपुर, आईआईटी गुवाहाटी, एनआईटी पटना, एनआईटी जमशेदपुर, ट्रिपल आईटी भागलपुर और बीआईटी पटना से अपनी उच्च शिक्षा पूरी करेंगे. इनमें से अधिकांश शिक्षक अंशकालीन (पार्ट टाइम) मोड में अध्ययन करेंगे, ताकि उनके नियमित शिक्षण कार्य पर न्यूनतम प्रभाव पड़े.

जिलों के प्राचार्यों को भेजा गया निर्देश

इस संबंध में भागलपुर, सहरसा, अररिया, बांका और खगड़िया के राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थानों के प्राचार्यों को विभाग द्वारा औपचारिक पत्र भेजा गया है. विभाग ने स्पष्ट किया है कि एमटेक या पीएचडी पूरा करने के बाद संबंधित शिक्षकों को कम से कम पांच वर्षों तक विभाग में अपनी सेवाएं देनी होंगी. यदि कोई शिक्षक इस अवधि से पहले सेवा छोड़ता है, तो उसे 20 लाख रुपये सरकारी कोष में जमा करने होंगे. संयुक्त निदेशक (प्रशासन) मंजीत कुमार द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि नियमों का उल्लंघन करने पर संबंधित प्राचार्य कड़ी अनुशासनिक कार्रवाई की अनुशंसा करेंगे.

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By KALI KINKER MISHRA

KALI KINKER MISHRA is a contributor at Prabhat Khabar.

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