भागलपुर के JLMNCH में सर्वर डाउन होते ही थम गयी ओपीडी की रफ्तार, घंटों लाइन में खड़े रहे मरीज

Bhagalpur News : भागलपुर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में गुरुवार को तकनीकी गड़बड़ी ने मरीजों की मुश्किलें बढ़ा दीं. सर्वर ठप होने के कारण पर्ची कटवाने पहुंचे मरीज घंटों कतार में खड़े रहे. हालात ऐसे बन गए कि अस्पताल प्रशासन को मैन्युअल व्यवस्था का सहारा लेना पड़ा.

भागलपुर से अतुल तिवारी की रिपोर्ट

Bhagalpur News : जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (जेएलएनएमसीएच) में गुरुवार को ओपीडी सेवा तकनीकी समस्या की भेंट चढ़ गई. सुबह से सर्वर डाउन रहने के कारण मरीजों का ऑनलाइन पंजीकरण बाधित हो गया, जिससे इलाज कराने पहुंचे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा. बाद में अस्पताल प्रशासन ने मैन्युअल पर्ची जारी कर व्यवस्था को पटरी पर लाने का प्रयास किया.

सुबह से पर्ची काउंटर पर लगी रही लंबी कतार

ओपीडी खुलते ही बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे थे. लेकिन ऑनलाइन सिस्टम काम नहीं करने के कारण पर्ची कटवाने की प्रक्रिया ठप हो गई. मरीज और उनके परिजन लंबे समय तक काउंटर के बाहर इंतजार करते रहे.

दूर-दराज से आए मरीजों की बढ़ी परेशानी

कई मरीज ऐसे थे जो ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों से इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे थे. सर्वर डाउन होने के कारण उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ा. कुछ मरीजों ने बताया कि सुबह से लाइन में खड़े रहने के बावजूद पंजीकरण नहीं हो पा रहा था, जिससे उनकी परेशानी और बढ़ गई.

तकनीकी गड़बड़ी से प्रभावित हुई स्वास्थ्य सेवा

अस्पताल सूत्रों के अनुसार तकनीकी समस्या के कारण सर्वर ने काम करना बंद कर दिया था. इसका सीधा असर ओपीडी संचालन पर पड़ा. ऑनलाइन पंजीकरण नहीं होने से डॉक्टरों तक मरीजों की पहुंच प्रभावित हुई और अस्पताल की नियमित व्यवस्था कुछ समय के लिए अस्त-व्यस्त हो गई.

11 बजे के बाद शुरू हुई मैन्युअल व्यवस्था

स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अस्पताल प्रशासन ने करीब 11 बजे से मैन्युअल पर्ची काटने की व्यवस्था शुरू की. इसके बाद मरीजों का पंजीकरण कर उन्हें संबंधित विभागों में इलाज के लिए भेजा जाने लगा. इस पहल से धीरे-धीरे व्यवस्था सामान्य होने लगी.

कुछ समय तक बना रहा अफरा-तफरी का माहौल

सर्वर ठप रहने के दौरान ओपीडी परिसर में अफरा-तफरी जैसी स्थिति देखी गई. मरीज लगातार जानकारी लेने के लिए काउंटर पर पहुंच रहे थे, जबकि अस्पताल कर्मी तकनीकी समस्या दूर करने में जुटे हुए थे.

वैकल्पिक व्यवस्था से मिली राहत

अस्पताल प्रशासन ने मरीजों को राहत देने के लिए मैन्युअल पंजीकरण की व्यवस्था लागू की. इसके चलते इलाज की प्रक्रिया दोबारा शुरू हो सकी और मरीजों को आवश्यक चिकित्सा सेवाएं मिलती रहीं.

डिजिटल व्यवस्था पर बढ़ी निर्भरता

इस घटना ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों में डिजिटल सिस्टम पर बढ़ती निर्भरता को उजागर किया है. विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था हमेशा तैयार रहनी चाहिए, ताकि मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े.

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Author: AMIT KUMAR SINH

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