bhagalpur news. मतदाताओं में था उत्साह तो तनाव मुक्त थे सुरक्षाकर्मी

एक समय था, जब चुनाव बिना हिंसा के समाप्त नहीं होता था. चुनावी माहौल प्रारंभ होते ही समाज के मुख्य धारा के लोग डरे सहमे रहते थे,

एक समय था, जब चुनाव बिना हिंसा के समाप्त नहीं होता था. चुनावी माहौल प्रारंभ होते ही समाज के मुख्य धारा के लोग डरे सहमे रहते थे, कुछ भी कहने या बोलने तक से परहेज करते थे. दियारा के दादा वोट बैंक हुआ करते थे. उनके फरमान ही जीत हार तय कर देता था. प्रत्याशी मतदाताओं के बयाज दादाओं की चरण वंदना करना ज्यादा मुफीद समझते थे. हालांकि समय बदल गया अब मतदाताओं की चलती है. कई मायने में संपन्न हुआ 2025 का चुनाव लोकतांत्रिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है. एक तरफ मतदाताओं में भरपूर उत्साह दिखा, तो दूसरी तरफ बूथों पर तैनात सुरक्षाकर्मी भी तनाव मुक्त दिखे. अधिकांश बूथों पर सुरक्षा कर्मियों का व्यवहार शालीन था. दूसरी तरफ बूथों के आस-पास न तो उपद्रव करने वाले दिख रहे थे और न ही बोगस वोट करने दिख रहे थे. खास कर अधिकांश जेनजी वर्ग बोगस वोटिंग क्या होता है, यह जानते भी नहीं हैं.

बिहपुर विधानसभा

खरीक प्रखंड के अठगामा बूथ पर महिला पार्वती देवी वोट देकर घर जा रही थी. उनसे पूछा गया कि आपने क्यों वोट दिया. उन्होंने बताया कि जिस तरह वोट गोपनीय है, उसी तरह मुद्दे भी गोपनीय है. आजकल तो मुद्दे से भी पता चल जाता है कि आपने किसको वोट किया. बताया कि मेरा मुद्दा अलग है, उसे ध्यान में रखते हुए मैंने वोट किया. खैरपुर बबलू मंडल ने कहा कि आज मैंने सारा काम छोड़ कर पहले मतदान किया है. बिहार को बनाने के लिए मतदान करना जरूरी था. लत्तीपुर में प्रकाश कुमार ने कहा कि यह चुनाव बिहार को बेहतर या बदतर बनाने का चुनाव है. उसने बेहतरी के लिए वोट किया है. बिहपुर के झंडापुर में दिव्या कुमारी ने कहा कि वोट देने वक्त उसने बस शिक्षा व व्यवस्था को ध्यान में रख कर वोट किया. नारायणपुर में दिलशाद ने बताया कि अन्य चुनाव के मुकाबले यह चुनाव काफी महत्वपूर्ण है. इस चुनाव में बिहार का भविष्य दाव पर है.

गोपालपुर विधानसभा

नवगछिया बाजार में मतदान कर चाय दुकान पर चाय पी रहे अरविंद कुमार ने बताया कि गोपालपुर विधानसभा का पूरा इलाका आज भी काफी पिछड़ा हुआ है. बाढ़, कटाव जैसी समस्या आजादी के इतने दिनों बाद भी जस की तस है. ऐसे में निर्वाचित होने वाले विधायक से उम्मीद है कि पूरे इलाके को विकास की मुख्य धारा से के साथ जोड़ा जाय. ढोलबज्जा में पंकज कुमार ने बताया कि वे लोग सीमांत क्षेत्र के हैं. ऐसे में उनलोगों की मांग है कि नवगछिया को जिला और ढोजबज्ज को प्रखंड बनाया जाय. चक गरैया गांव की एक महिला ने बताया कि उसके पति उसे किसी दूसरे प्रत्याशी को वोट डालने का दबाव बना रहे थे, लेकिन उसने अपने मन से जो बेहतर लगा है, उसे वोट किया है.

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Author: ATUL KUMAR

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