करमा-धरमा पर्व की खुशियां मातम में बदलीं: पूजा के लिए झूर काटने गई 18 वर्षीय छात्रा की गहरे गड्ढे में डूबने से मौत

करमा-धरमा पर्व पर पूजा के लिए झूर काटने गई 18 वर्षीय छात्रा गहरे पानी में डूब गई. एक युवक ने 4 को बचाया, पर छात्रा की जान चली गई. पढ़ें पूरी खबर.

भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास का प्रतीक लोक पर्व 'करमा-धरमा' की खुशियां मंगलवार की अहले सुबह एक परिवार के लिए जिंदगी भर के आंसुओं में तब्दील हो गईं.

प्रखंड क्षेत्र के भ्रमरपुर गांव के समीप कोसी बांध से सटी पीसीसी ग्रामीण सड़क के किनारे पानी भरे गहरे गड्ढे में डूबने से 18 वर्षीय एक होनहार छात्रा की दर्दनाक मौत हो गई. मृतका की पहचान भ्रमरपुर गांव के वार्ड नंबर 4 निवासी अनिल मंडल की बड़ी पुत्री रिमझिम कुमारी (18) के रूप में हुई है. इस हृदयविदारक हादसे की सूचना मिलते ही पूरे इलाके में कोहराम मच गया.

पूजा के लिए झूर काटने गई थीं बच्चियां, नहाने के दौरान हुआ हादसा

नगरपारा पूरब पंचायत के पंचायत समिति सदस्य (पंसस) बमशंकर साह ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि करमा-धरमा व्रत के अनुष्ठान के निमित्त दर्जनों बच्चे और बच्चियां मंगलवार सुबह करीब छह बजे कोसी बांध और भ्रमरपुर गांव के बीच सिंधुआ बहियार स्थित कामा माय स्थान के पास पूजा का झूर (डाली) काटने गए थे.

झूर काटने के बाद रिमझिम अपनी सहेलियों—कुमकुम, वर्षा, अनुराधा और प्रीति के साथ सड़क किनारे पानी भरे गड्ढे में स्नान करने लगी. पानी के अत्यधिक गहरे होने का अंदाजा न होने के कारण पांचों बच्चियां अचानक गहरे पानी में समाने लगीं और डूबने की स्थिति में आ गईं.

साहसी युवक ने 4 बच्चियों को बचाया, रिमझिम की चली गई जान

बच्चियों को डूबता और चीखता देख उसी समूह के साथ मौजूद गांव के प्रेम साह के पुत्र नीतीश कुमार ने गजब का साहस दिखाया. नीतीश ने बिना अपनी जान की परवाह किए पानी में छलांग लगाई और एक-एक कर चार बच्चियों को सुरक्षित बाहर खींच लिया.

हालांकि, जब तक वह रिमझिम को बचाने के लिए दोबारा गहराइयों में उतरता, तब तक वह पूरी तरह डूब चुकी थी. बाद में अन्य ग्रामीणों की मदद से काफी मशक्कत के बाद रिमझिम को बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक उसकी सांसें थम चुकी थीं.

महाराष्ट्र में मजदूरी करते हैं पिता, मां का रो-रोकर बुरा हाल

भाई की दीर्घायु और मंगलकामना के लिए रखे जाने वाले व्रत से ठीक पहले बहन के छिन जाने से परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है. मृतका के पिता अनिल मंडल परिवार के भरण-पोषण के लिए महाराष्ट्र में रहकर मजदूरी करते हैं.

घटना के बाद मां रिंकू देवी और अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है. सूचना मिलते ही भवानीपुर थानाध्यक्ष शुंभ कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और शव को कब्जे में ले लिया. पुलिस ने पंचनामा तैयार कर शव को पोस्टमार्टम के लिए अनुमंडलीय अस्पताल नवगछिया भेज दिया है.

चार बहनों में सबसे बड़ी और पढ़ने में अव्वल थी रिमझिम

ग्रामीण भरत कुमार ने बताया कि रिमझिम चार बहनों और एक इकलौते छोटे भाई में सबसे बड़ी थी. वह बेहद होनहार और कुशाग्र बुद्धि की छात्रा थी.

उसने प्रथम श्रेणी से मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की थी और वर्तमान में ललित नारायण भोकर झा उच्च विद्यालय भ्रमरपुर में कक्षा 11वीं (विज्ञान संकाय) में अध्ययनरत थी. विद्यालय के प्रधानाध्यापक डॉ. कुमार चंदन ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए बताया कि वह चल रही अर्धवार्षिक परीक्षा में सोमवार तक फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ, अंग्रेजी और हिंदी के पेपर दे चुकी थी और बोर्ड परीक्षा के लिए भी पंजीकृत थी.

संवेदक की लापरवाही पर भड़के लोग, मुआवजे की मांग

हादसे के बाद ग्रामीणों में सड़क निर्माण और मिट्टी खनन करने वाले संवेदक के खिलाफ भारी आक्रोश देखा जा रहा है. ग्रामीण गौतम गोविंदा ने आरोप लगाया कि आबादी वाले इलाके में सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर संवेदक द्वारा अवैध रूप से गहरा खनन किया गया, जो जानलेवा साबित हुआ. पूर्व मुखिया अशोक कुमार झा ने इस बाबत पहले भी विभाग में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी.

इधर, शाहपुर निवासी जदयू नेता रंजीत कुमार मंडल ने अंचल प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग से पीड़ित परिवार को तत्काल राहत कोष से उचित आर्थिक मुआवजा देने की पुरजोर मांग की है.

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By Madhur Milan

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