भागलपुर के मौलानाचक स्थित सुप्रसिद्ध सूफी संत हजरत मौलाना शहबाज मोहम्मद (रहमतुल्लाह अलैह) के 399वें उर्स-ए-पाक के दूसरे दिन शनिवार को खानकाह-ए-शहबाजिया में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया. दिन से लेकर देर रात तक दरगाह शरीफ पर जियारत के लिए अकीदतमंदों की भारी भीड़ उमड़ी रही. इस अवसर पर आयोजित जलसे में देश भर से आए उलेमाओं ने हजरत की जीवनी और इंसानियत के पैगाम पर प्रकाश डाला.
बुजुर्गों की दरगाहें शांति और इंसानियत का प्रतीक: मौलाना कमरूउद्दीन सकाफी
खानकाह-ए-शहबाजिया में आयोजित जलसे को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता मौलाना मुफ्ती मोहम्मद कमरूउद्दीन सकाफी ने कहा:
- सफलता का मार्ग: "बुजुर्गों से निस्बत रखने वालों को दीन और दुनिया दोनों में कामयाबी हासिल होती है. औलिया-ए-करम ने अल्लाह के बताए सीधे रास्ते पर चलकर यह मकाम हासिल किया है."
- इंसानियत का पैगाम: उन्होंने कहा कि सूफी-संतों की दरगाहें हमेशा से शांति, इंसानियत और आपसी भाईचारे की प्रतीक रही हैं, जहां अमीर-गरीब का भेद मिट जाता है. उन्होंने लोगों से हजरत के जीवन को अपना प्रेरणा स्रोत बनाने का आह्वान किया.
चादरपोशी और देश में अमन-चैन की दुआ
उर्स के दूसरे दिन शाहजहानी मस्जिद में सुबह 10 से 11 बजे तक कुरानखानी हुई, जिसके बाद रात 10 बजे दरगाह शरीफ पर परंपरा के अनुसार चादरपोशी की गई:
- सज्जादानशीन की दुआ: खानकाह के सज्जादानशीन सैयद शाह इंतेखाब आलम शहबाजी ने देश में शांति, सौहार्द, तरक्की और खुशहाली के लिए विशेष दुआ मांगी.
- उपस्थिति: मौके पर खानकाह परिवार के सदस्यों के साथ मुफ्ती फारूक आलम अशरफी समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे.
नातिया कलाम पर झूमे अकीदतमंद, हाफिज व आलिमों की हुई दस्तारबंदी
जलसे की शुरुआत मदरसा के कारी अबुल कलाम अशरफी की तिलावते-कुरान से हुई. इसके बाद आयोजित नातिया मुशायरे में कलाकारों ने समां बांध दिया:
- नातिया प्रोग्राम: झारखंड के मुबारक हुसैन, कोलकाता के अब्बास रजा नूरी और इश्तियाक रहबर ने एक से बढ़कर एक नातिया कलाम पेश कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया. मंच का सफल संचालन कानपुर के सैयद वारिस चिश्ती ने किया.
- दस्तारबंदी समारोह: जामिया मदरसा शहबाजिया से तालीम पूरी करने वाले विद्यार्थियों की दस्तारबंदी (उपाधि वितरण) की गई:
रविवार को होगा उर्स-ए-पाक का समापन
रविवार को उर्स-ए-पाक का अंतिम दिन है. शाम 6 बजे शाहजहानी मस्जिद में कुरानखानी और दुआ का आयोजन होगा, जबकि रात 9 बजे से सज्जादानशीन की गद्दी पर पारंपरिक 'महफिल-ए-शमा' का आयोजन किया जाएगा.
