686 दिनों से तपस्या जैसी यात्रा, हाथों के बल बाबाधाम जा रहे पश्चिम बंगाल के राजकुमार महतो, जानिए क्यों कर रहे हैं ऐसा संकल्प

Rajkumar Mahato Babadham Yatra: पश्चिम बंगाल के राजकुमार महतो 686 दिनों से हाथों के बल चलकर बाबा बैद्यनाथ धाम की ओर बढ़ रहे हैं. लाखों श्रद्धालुओं के बीच उनकी अनोखी आध्यात्मिक यात्रा चर्चा का विषय बनी हुई है. यह यात्रा न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि भारतीय संस्कृति के प्रति गहरी निष्ठा भी दर्शाती है.

सुलतानगंज(भागलपुर) से शुभंकर की रिपोर्ट

Rajkumar Mahato Babadham Yatra: श्रावणी मेला 2026 की शुरुआत से पहले सुलतानगंज में लाखों श्रद्धालुओं के बीच एक अनोखा दृश्य लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है. जहां अधिकांश कांवरिये पैदल गंगाजल लेकर बाबा बैद्यनाथ धाम की ओर बढ़ते हैं, वहीं पश्चिम बंगाल के राजकुमार महतो हाथों के बल चलकर अपनी कठिन आध्यात्मिक यात्रा पूरी कर रहे हैं.

उनकी यह तपस्या सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति और भारतीय आध्यात्मिक परंपरा के प्रति समर्पण का संदेश भी मानी जा रही है. सुलतानगंज पहुंचने वाले श्रद्धालु उन्हें देखते ही रुक जाते हैं, उनकी यात्रा के बारे में जानना चाहते हैं और कई लोग उनके साथ तस्वीरें भी खिंचवा रहे हैं.

686 दिनों से लगातार जारी है यह कठिन यात्रा

राजकुमार महतो ने बताया कि उनकी आध्यात्मिक यात्रा के 686 दिन पूरे हो चुके हैं. इस दौरान उन्होंने भारत के 22 राज्यों की यात्रा की है और करीब 36,000 किलोमीटर की दूरी पैदल तथा साइकिल से तय की है.

अब उनकी यह यात्रा श्रावणी मेला के दौरान सुलतानगंज से बाबा बैद्यनाथ धाम की ओर बढ़ रही है, जहां वे 'बिच्छू बम' शैली यानी हाथों के बल चलकर अपनी आस्था का परिचय दे रहे हैं.

उनकी इस कठिन साधना को देखकर श्रद्धालु आश्चर्य भी व्यक्त कर रहे हैं और उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति की सराहना भी कर रहे हैं.

12 ज्योतिर्लिंग से चार धाम तक कर चुके हैं दर्शन

राजकुमार महतो की यात्रा केवल बाबाधाम तक सीमित नहीं है. उन्होंने बताया कि अब तक वे देश के 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन कर चुके हैं.

इसके अलावा चार धाम, प्रमुख शक्तिपीठ, अमरनाथ, मथुरा-वृंदावन, बागेश्वर धाम, मेहंदीपुर बालाजी और चित्रकूट धाम सहित कई प्रमुख धार्मिक स्थलों की यात्रा भी पूरी कर चुके हैं.

उनका कहना है कि हर तीर्थ केवल पूजा का स्थान नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का जीवंत प्रतीक है.

Rajkumar Mahato Babadham Yatra: क्या है इस कठिन यात्रा का उद्देश्य?

राजकुमार महतो का कहना है कि उनकी यात्रा का मकसद केवल तीर्थाटन करना नहीं है.

वे चाहते हैं कि देशभर के लोग भारत की प्राचीन संस्कृति, सनातन परंपरा और आध्यात्मिक विरासत को समझें और उससे जुड़ें. इसी संदेश को लेकर वे लगातार अलग-अलग राज्यों में यात्रा कर रहे हैं.

उनके अनुसार यह यात्रा आत्मअनुशासन, धैर्य और आस्था का भी संदेश देती है.

श्रावणी मेला में बन रहे आकर्षण का केंद्र

विश्वप्रसिद्ध श्रावणी मेला हर साल लाखों श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है. इस बार भी सुलतानगंज में देश के अलग-अलग हिस्सों से कांवरिये पहुंच रहे हैं, लेकिन राजकुमार महतो की अनोखी यात्रा लोगों के बीच विशेष चर्चा का विषय बन गई है.

उनकी कठिन साधना यह भी दिखाती है कि श्रावणी मेला केवल जलाभिषेक की यात्रा नहीं, बल्कि आस्था, संकल्प और व्यक्तिगत विश्वास की अनेक कहानियों का भी संगम है. यही वजह है कि हर साल इस मेले में ऐसे कई श्रद्धालु अपने अनोखे संकल्पों के साथ पहुंचते हैं और दूसरों के लिए प्रेरणा बन जाते हैं.

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लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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