भागलपुर, गोपालपुर. गंगा के भीषण कटाव से तबाह हो रहे राघोपुर में अब जनप्रतिनिधि भी आंदोलन की राह पर उतर आए हैं. लगातार बढ़ते कटाव और उससे पैदा हुए गंभीर संकट के बीच राघोपुर पंचायत के सरपंच प्रमोद मंडल आमरण अनशन पर बैठ गए हैं. उन्होंने ‘कटाव रोको, गांव बचाओ, जीवन बचाओ’ के नारे के साथ आंदोलन शुरू किया है. सरपंच ने स्पष्ट कहा कि अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा. राघोपुर को कटाव से स्थायी सुरक्षा मिलने तक उनका आमरण अनशन जारी रहेगा.
कटाव निरोधी कार्यों की पूर्ण समीक्षा की मांग
सरपंच प्रमोद मंडल ने अब तक राघोपुर में कराए गए कटाव निरोधी कार्यों की पूर्ण समीक्षा कराने की मांग की है. उनका आरोप है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद पंचायत को कटाव से स्थायी सुरक्षा नहीं मिल सकी है. उन्होंने पूर्व में कराए गए कार्यों की तकनीकी स्तर पर समीक्षा कर यह पता लगाने की मांग की कि कटाव पर प्रभावी नियंत्रण क्यों नहीं हो सका.
24 घंटे सातों दिन बचाव कार्य चलाने की मांग
सरपंच ने कटाव प्रभावित क्षेत्र में 24 घंटे सातों दिन कटाव निरोधी कार्य जारी रखने की मांग की है. उनका कहना है कि गंगा का दबाव लगातार बना हुआ है और ऐसे समय में बचाव कार्य में किसी भी तरह की ढिलाई भारी पड़ सकती है. उन्होंने प्रशासन से संवेदनशील स्थानों पर लगातार निगरानी और बचाव कार्य जारी रखने की मांग की है.
घर-जमीन के बाद रेल लाइन पर भी मंडरा रहा खतरा
राघोपुर में पिछले कई दिनों से गंगा का कटाव बेहद गंभीर बना हुआ है. कटाव की चपेट में आने से तटवर्ती इलाकों में लोगों के घर, जमीन और सार्वजनिक संपत्तियां प्रभावित हो रही हैं. कई परिवार अपने घर खाली कर सुरक्षित स्थानों की ओर जाने को मजबूर हैं.
कटाव का दायरा महत्वपूर्ण रेल लाइन तक पहुंचने से संकट और गंभीर हो गया है. रेल लाइन की सुरक्षा को लेकर स्थानीय लोगों में भी दहशत है. ऐसे में सरपंच के आमरण अनशन से राघोपुर का कटाव मुद्दा प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर और गरमाने की संभावना है.
‘अस्थायी बचाव नहीं, स्थायी सुरक्षा चाहिए’
सरपंच प्रमोद मंडल का कहना है कि कटाव के बीच बालू की बोरियां, जियो बैग और अन्य सामग्री डालकर तत्काल बचाव की कोशिश की जा रही है, लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं है. उनके अनुसार जब तक गंगा की धारा और कटाव की प्रकृति को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक और वैज्ञानिक योजना नहीं बनाई जाएगी, तब तक हर साल राघोपुर के लोगों को इसी संकट से गुजरना पड़ेगा.
उन्होंने कहा कि उनकी प्रमुख मांगों में राघोपुर पंचायत को कटाव से पूर्ण सुरक्षा, पूर्व में कराए गए असफल कटाव निरोधी कार्यों की समीक्षा और 24×7 बचाव कार्य शामिल हैं. मांगें पूरी होने तक आमरण अनशन जारी रखने की घोषणा की गयी है.
ग्रामीणों में भी बढ़ी चिंता
सरपंच के आमरण अनशन पर बैठने के बाद ग्रामीणों की चिंता भी खुलकर सामने आने लगी है. ग्रामीणों का कहना है कि कटाव से केवल जमीन और मकान ही नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत, आजीविका और भविष्य भी खतरे में है. लोगों का कहना है कि हर बार कटाव के समय बचाव कार्य शुरू होता है, लेकिन नदी का पानी कम होने के बाद स्थायी समाधान की दिशा में काम ठंडे बस्ते में चला जाता है.
प्रशासन और सरकार के अगले कदम पर टिकी नजर
राघोपुर में बढ़ते कटाव और सरपंच के आमरण अनशन के बाद अब ग्रामीणों की नजर प्रशासन और सरकार की ओर है. लोगों को उम्मीद है कि कटाव की गंभीरता को देखते हुए तत्काल बचाव कार्य के साथ-साथ स्थायी सुरक्षा की दिशा में भी ठोस पहल होगी. वहीं सरपंच के आंदोलन ने वर्षों पुरानी कटाव की समस्या और पूर्व में हुए कटाव निरोधी कार्यों की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं.
