Raghopur Ganga Erosion: नवगछिया में कभी गंगा की मुख्य गहरी धारा राघोपुर बांध से करीब 500 मीटर दूर बहती थी. अब नदी की धारा का रुख बदल गया है और 35 से 40 मीटर गहराई वाली मुख्य धारा तटबंध के बेहद करीब पहुंच गयी है. यही बदलाव राघोपुर में कटाव और मार्जिनल बांध पर बढ़ते दबाव की सबसे बड़ी वजह बन गया है. 24 अगस्त को मार्जिनल बांध में ब्रीच के बाद जल संसाधन विभाग ने बचाव कार्य और तेज कर दिया है. अगले एक सप्ताह तक नदी के दबाव और 8 सितंबर तक संभावित बढ़ते जलस्तर को देखते हुए अधिकारियों की निगाह राघोपुर पर टिकी है.
बुधवार सुबह जल संसाधन विभाग के सचिव चंद्रशेखर सिंह, आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव संतोष कुमार, भागलपुर जिलाधिकारी अलंकृता पांडे, नवगछिया एसपी वैभव शर्मा समेत विभाग के वरीय अधिकारी और अभियंता राघोपुर पहुंचे. अधिकारियों ने कटाव प्रभावित इलाकों और चल रहे फ्लड फाइटिंग कार्य का जायजा लिया. मौके पर बचाव कार्य की स्थिति और नदी के बदलते दबाव की जानकारी ली गयी.
27 जुलाई को मिली थी पहली सूचना, एक महीने से जारी है बचाव कार्य
जल संसाधन विभाग के सचिव चंद्रशेखर सिंह ने बताया कि राघोपुर में गंगा के बाएं किनारे स्थित मार्जिनल बांध भागलपुर के विक्रमशिला सेतु के अपस्ट्रीम में है. विभाग को यहां पहली बार 27 जुलाई को कटाव शुरू होने की सूचना मिली थी. इसके बाद कटाव स्थल से करीब 900 मीटर अपस्ट्रीम में फ्लड फाइटिंग का काम शुरू कराया गया.
करीब एक महीने से नदी के बदलते दबाव के बीच अलग-अलग हिस्सों में बांध को बचाने की कोशिश की जा रही है. दो-तीन दिन के अंतराल पर अलग-अलग जगहों पर कटाव का दबाव बनता रहा और विभाग बचाव सामग्री डालकर स्थिति नियंत्रित करने में जुटा रहा.
इसके बाद 24 अगस्त को मार्जिनल बांध में ब्रीच हो गया. ब्रीच के दोनों तरफ से पानी के दबाव को नियंत्रित करने और पानी को आगे बढ़ने से रोकने के लिए लगातार काम किया जा रहा है. फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता यह है कि कटाव और पानी का दबाव रिहायशी इलाके की तरफ आगे न बढ़े.
रेलवे बांध के 30 मीटर हिस्से को बचाने की चुनौती
अधिकारियों के मुताबिक जिस हिस्से का निरीक्षण किया गया, वहां करीब 30 मीटर चौड़े रेलवे बांध को सुरक्षित रखने की चुनौती है. इस इलाके में दो जगह विशेष दबाव बना हुआ है.
पहला संवेदनशील स्थान महादेवपुर गंगा घाट के आसपास है, जो विक्रमशिला सेतु के काफी करीब है. दूसरा क्षेत्र इससे करीब 350-400 मीटर ऊपर दुर्गा मंदिर घाट की तरफ है. यहां पहले मौजूद मंदिर कटाव की चपेट में आकर नदी में समा चुका है. आसपास लगातार कटाव का दबाव बना हुआ है और दोनों स्थानों पर बचाव कार्य जारी है.
बदल गयी गंगा की चाल, अब नीचे से काट रही नदी
राघोपुर में चुनौती सिर्फ कटाव की नहीं, बल्कि नदी की बदलती धारा की भी है. सचिव के अनुसार पहले गंगा की मुख्य गहरी धारा बांध से करीब 500 मीटर दूर थी. बाढ़ के समय पानी फैलकर बांध तक पहुंचता था, लेकिन मुख्य चैनल काफी दूरी पर रहता था.
अब मुख्य धारा धीरे-धीरे तटबंध की तरफ खिसक गयी है. करीब 35 से 40 मीटर गहराई वाली मुख्य धारा अब बांध के बेहद करीब पहुंच गयी है. इसके कारण ऊपर से सुरक्षा सामग्री डालने के बाद भी नीचे से तेज पानी कटिंग कर देता है. कई बार डाली गयी सामग्री दबकर नदी की गहराई में चली जाती है. इसके बाद उसी स्थान पर दोबारा सामग्री डालकर सुरक्षा कवच तैयार करना पड़ रहा है.
यानी नदी के सामने बांध को बचाने की लड़ाई अब केवल ऊपर से सामग्री डालने तक सीमित नहीं है. तेज बहाव के कारण नीचे से हो रही कटिंग विभाग के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गयी है.
सैंड बैग से मेगा जियो बैग तक, कई स्तर पर बचाव
कटाव रोकने के लिए विभाग सैंड बैग, जियो बैग और मेगा जियो बैग के साथ बांस के स्ट्रक्चर और क्रेट में बांधे गये सैंड बैग का इस्तेमाल कर रहा है.
कई सैंड बैग को एक साथ क्रेट में बांधकर नदी में डाला जा रहा है, ताकि तेज प्रवाह में वे अलग-अलग होकर बह न जायें. इसके अलावा बांस से विशेष स्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है, जिसे स्थानीय स्तर पर ‘हाथी पांव’ कहा जाता है. इसमें बोरे भरकर नदी की धारा में डाले जाते हैं. इसका उद्देश्य तेज करंट को तोड़ना और सीधे बांध पर पड़ रहे दबाव को कम करना है.
बचाव सामग्री सड़क मार्ग से ट्रैक्टरों के जरिए लगातार पहुंचायी जा रही है. इसके साथ ही विभाग ने दो स्टीमर भी किराये पर लिये हैं. इनके जरिए मेगा जियो बैग को कटाव वाले स्थानों तक पहुंचाया जा रहा है. दुर्गा मंदिर घाट के पास रात में कटाव आगे बढ़ने के बाद वहां मेगा जियो बैग डालने का काम तेज किया गया है.
विभाग के अनुसार रात में कटाव करीब 15 मीटर तक आगे शिफ्ट हुआ, जिसके बाद तत्काल सुरक्षा सामग्री डालकर उस हिस्से को बचाने की कोशिश की गयी.
अब नदी की पुरानी धारा खोलने की भी कोशिश
राघोपुर में विभाग तटबंध को बचाने के साथ नदी के प्रवाह को नियंत्रित करने की कोशिश भी कर रहा है. इसके लिए इनलैंड वाटरवेज से समन्वय कर ड्रेजिंग मशीन मंगायी गयी है.
नदी के बीच जमा सिल्ट हटाकर पुरानी चैनल को धीरे-धीरे सक्रिय करने का प्रयास किया जा रहा है. विभाग को उम्मीद है कि पुरानी नदी चैनल की तरफ पानी का प्रवाह बढ़ने पर तटबंध के पास मौजूद मुख्य धारा का दबाव कुछ कम हो सकता है.
इस समय राघोपुर में एक साथ तीन स्तर पर काम चल रहा है. तटबंध को सीधे कटाव से बचाने के लिए सुरक्षा सामग्री डाली जा रही है, तेज धारा का दबाव कम करने के उपाय किये जा रहे हैं और पुरानी नदी चैनल को सक्रिय करने की कोशिश हो रही है.
8 सितंबर तक बढ़ सकता है गंगा का जलस्तर
पिछले तीन दिनों में गंगा के जलस्तर में करीब 40 सेंटीमीटर की कमी आयी थी, लेकिन अब विभाग को फिर जलस्तर बढ़ने की संभावना है. जल संसाधन विभाग के सचिव के अनुसार सोन नदी में करीब 5.5 लाख क्यूसेक पानी आने और अन्य जल स्रोतों से पानी बढ़ने के कारण गंगा के जलस्तर में धीरे-धीरे वृद्धि हो सकती है.
विभाग के आकलन के अनुसार 8 सितंबर तक जलस्तर बढ़ने की संभावना है. हालांकि अधिकारियों को उम्मीद है कि यह वृद्धि पिछले दिनों हुई करीब 40 सेंटीमीटर की कमी के दायरे में रहेगी. इसके बावजूद अगले एक सप्ताह को संवेदनशील मानते हुए विशेष सतर्कता बरती जा रही है.
रिहायशी इलाके को बचाना पहली प्राथमिकता
राघोपुर में बांध के आसपास बने घरों को पहले ही खाली कराया जा चुका है. अधिकारियों के अनुसार प्रभावित क्षेत्र से लोगों और घरों को हटाने में स्थानीय लोगों का भी सहयोग मिल रहा है. बांध के आसपास वाहनों की आवाजाही भी शुरू की गयी है.
जल संसाधन विभाग के सचिव ने कहा कि विभाग का पूरा प्रयास बांध को टूटने और कटने से बचाना है, ताकि नदी का पानी रिहायशी इलाके में प्रवेश न कर सके. उन्होंने बताया कि फिलहाल पर्याप्त मैनपावर और सामग्री उपलब्ध है तथा बचाव कार्य दिन-रात जारी है.
Raghopur Ganga Erosion: मुख्यमंत्री की भी स्थिति पर नजर
राघोपुर की स्थिति पर मुख्यमंत्री की लगातार नजर होने की बात जल संसाधन विभाग के सचिव ने कही. उनके अनुसार जिस दिन मार्जिनल बांध में ब्रीच हुआ था, उसी दिन मुख्यमंत्री ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया था और अधिकारियों के साथ समीक्षा की थी. इसके बाद भी मुख्यमंत्री लगातार स्थिति की जानकारी ले रहे हैं और अधिकारियों से मौके की रिपोर्ट मंगा रहे हैं.
Raghopur Ganga Erosion: मानसून के बाद होगा स्थायी समाधान
फिलहाल विभाग की प्राथमिकता मानसून के दौरान बांध और प्रभावित क्षेत्र को सुरक्षित रखना है. मानसून समाप्त होने के बाद राघोपुर की इस समस्या का स्थायी समाधान करने की योजना है.
जल संसाधन विभाग के सचिव के अनुसार करीब 1.2 से 1.5 किलोमीटर लंबे संवेदनशील क्षेत्र में स्थायी सुरक्षा कार्य कराने की योजना है. इसके तहत शीट पाइलिंग और बोल्डर पिचिंग जैसे काम कराकर पूरे क्षेत्र को सुरक्षित करने का प्रयास किया जायेगा.
सचिव ने बताया कि इससे पहले विक्रमशिला सेतु के नीचे इस्माइलपुर क्षेत्र में बार-बार होने वाले कटाव को रोकने के लिए भी स्थायी सुरक्षा कार्य कराया गया था. वहां शीट पाइलिंग और बोल्डर पिचिंग के बाद इस बार स्थिति अपेक्षाकृत सुरक्षित रही है. राघोपुर में इस वर्ष मुख्य धारा के तटबंध के करीब आने के बाद अब यहां भी इसी तरह के स्थायी सुरक्षा कवच की जरूरत महसूस की जा रही है.
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