सिर्फ हिंदी बोलना नहीं, सही बोलना भी जरूरी; खरीक कॉलेज में भाषा के शुद्ध उच्चारण पर जोर

राजकीय डिग्री कॉलेज खरीक में हिंदी दिवस पर 'राष्ट्रीय एकता की भाषा हिंदी' विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया. प्राध्यापकों ने हिंदी के व्यावहारिक उपयोग और राष्ट्रीय एकता में इसकी भूमिका पर प्रकाश डाला.

नवगछिया (भागलपुर) : राजकीय डिग्री कॉलेज खरीक में हिंदी दिवस के अवसर पर सोमवार को ‘राष्ट्रीय एकता की भाषा हिंदी’ विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गयी. कार्यक्रम में प्राध्यापक वक्ताओं ने हिंदी की व्यावहारिक उपयोगिता और राष्ट्रीय एकता में इसकी भूमिका पर चर्चा की. वक्ताओं ने हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग के साथ-साथ भाषा के शुद्ध उच्चारण और सही प्रयोग पर भी जोर दिया.

पढ़ने-लिखने के साथ शुद्ध बोलने का भी हो अभ्यास

संगोष्ठी का संचालन करते हुए हिंदी के प्राध्यापक डॉ. चैतन्य प्रकाश ने कहा कि पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को हिंदी पढ़ने और लिखने का ज्ञान तो देता है, लेकिन शुद्ध हिंदी बोलने का पर्याप्त अभ्यास नहीं कराया जाता. हिंदी के विकास के लिए भाषा की शुद्धता जरूरी है.

उन्होंने कहा कि आने वाले समय में महाविद्यालय में अध्ययनरत विद्यार्थियों को शुद्ध उच्चारण का नियमित अभ्यास कराया जाएगा, ताकि वे हिंदी का प्रभावी और सही प्रयोग कर सकें.

हिंदी हमारी पहचान और अस्मिता का हिस्सा : प्राचार्य

अध्यक्षीय संबोधन में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. जलेश्वर सिंह ने कहा कि हिंदी दिवस हमारी अस्मिता और पहचान से जुड़ा अवसर है. उन्होंने कहा कि हिंदी भाषी लोग दुनिया के कई हिस्सों में मौजूद हैं और हिंदी वैश्विक स्तर पर भी तेजी से विस्तार कर रही है.

उन्होंने विद्यार्थियों से दैनिक जीवन में हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग का आह्वान किया.

हिंदी के अधिक प्रयोग पर दिया जोर

समाजशास्त्र के प्राध्यापक डॉ. ब्रजेश सिंह ने कहा कि हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा मिलना चाहिए. उन्होंने इसके लिए दैनिक जीवन और व्यावहारिक कार्यों में हिंदी के अधिक से अधिक प्रयोग की जरूरत बतायी.

वहीं अर्थशास्त्र के प्राध्यापक डॉ. प्रिंस ने कहा कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं है, बल्कि समाज और संस्कृति को जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम भी है. उन्होंने विद्यार्थियों को हिंदी के अध्ययन और प्रयोग के लिए प्रेरित किया.

छात्र-छात्राओं ने प्रस्तुत की कविताएं और वक्तव्य

कार्यक्रम के दौरान कई छात्र-छात्राओं ने हिंदी विषयक कविताओं और वक्तव्यों की प्रस्तुति दी. विद्यार्थियों ने हिंदी की उपयोगिता, राष्ट्रीय एकता में इसकी भूमिका तथा भाषा के संरक्षण और विकास से जुड़े विचार साझा किये.

इस अवसर पर प्राचार्य डॉ. जलेश्वर सिंह, डॉ. चैतन्य प्रकाश, डॉ. प्रिंस, डॉ. ब्रजेश सिंह, डॉ. अरुण, डॉ. सैफ, कृष्णा कुमार सहित महाविद्यालय के शिक्षक और छात्र-छात्राएं मौजूद थे. छात्रों में अभिनाश कुमार, बाबू साहब, सूरज कुमार, प्रिंस कुमार और गौरव कुमार आदि उपस्थित रहे.

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By Rashid alam

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