भागलपुर से ब्रजेश की रिपोर्ट :
एक तरफ भागलपुर के पावर सब स्टेशनों में ट्रांसफॉर्मर की कमी के कारण बिजली आपूर्ति प्रभावित हो रही है, वहीं दूसरी तरफ लोदीपुर पावर सब स्टेशन की घोर लापरवाही सामने आयी है. यहां 10 एमवीए का एक पावर ट्रांसफॉर्मर पिछले आठ वर्षों से बेकार पड़ा है और अब कबाड़ की स्थिति में पहुंच चुका है. इसकी गारंटी अवधि भी समाप्त हो गयी है, जिससे विभाग को लगभग डेढ़ करोड़ रुपये का भारी नुकसान होना तय माना जा रहा है.8 साल से धूल फांक रहा ट्रांसफॉर्मर
लोदीपुर पावर सब स्टेशन में लगा यह ट्रांसफॉर्मर एजेंसी द्वारा विभाग को हैंडओवर किये जाने के बाद से ही उपयोग में नहीं लाया जा सका है. विभागीय अधिकारियों और इंजीनियरों की अनदेखी के चलते यह उपकरण धीरे-धीरे अनुपयोगी होता जा रहा है. पूर्व और वर्तमान के सुपरिटेंडेंट इंजीनियरों के संज्ञान में मामला होने के बावजूद, केवल आश्वासनों का दौर चला और कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गयी. इस टालमटोल का परिणाम यह हुआ कि सब स्टेशन की क्षमता नहीं बढ़ सकी.लोड शिफ्टिंग न होने से बिजली व्यवस्था चरमरायी
जिस उद्देश्य से यह नया ट्रांसफॉर्मर लगाया गया था, वह विफल रहा. पुराने ट्रांसफॉर्मर पर लोड कम होने के बजाय बढ़ गया है, जिससे बिजली आपूर्ति पर भारी दबाव है. पहले से मौजूद ट्रांसफॉर्मर पर लोदीपुर से लेकर लालूचक तक के इलाकों का लोड है, जिसके कारण उपभोक्ताओं को लगातार बिजली कटौती और लो-वोल्टेज की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है.
गड़बड़ी मिली तो रिप्लेसमेंट संभव नहीं
सबसे चिंताजनक बात यह है कि ट्रांसफॉर्मर की गारंटी अवधि समाप्त हो चुकी है. जानकारों का कहना है कि यदि इसे अब चालू किया जाता है और इसमें कोई तकनीकी खराबी निकलती है, तो रिप्लेसमेंट संभव नहीं होगा. विभागीय लापरवाही के कारण डेढ़ करोड़ रुपये का सरकारी धन बर्बाद होने की कगार पर है.बसंतपुर में बिना स्वीकृति ट्रांसफॉर्मर लगाने की तैयारी
इधर, लोदीपुर फीडर क्षेत्र के बसंतपुर में निजी कार्य के लिए ट्रांसफॉर्मर लगाने की तैयारी चल रही है. नियमों के अनुसार, किसी भी नये ट्रांसफॉर्मर की स्थापना के लिए जूनियर इंजीनियर से लेकर सुपरिटेंडेंट इंजीनियर स्तर तक औपचारिक स्वीकृति अनिवार्य है. आरोप है कि बिना किसी एस्टिमेट और विभागीय स्वीकृति के ही यहां इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है.
