भागलपुर के ऐतिहासिक महर्षि मेंहीं आश्रम, कुप्पाघाट में अखिल भारतीय संतमत सत्संग महासभा की कार्यकारिणी समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई. इस बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि आश्रम से प्रकाशित होने वाली प्रसिद्ध आध्यात्मिक मासिक पत्रिका 'शांति संदेश' के नए संपादक अब राम कुमार होंगे. इसके साथ ही जगदीशपुर प्रखंड स्थित आश्रम की खाली पड़ी भूमि पर एक आधुनिक शिक्षण संस्थान स्थापित करने का भी फैसला लिया गया.
1950 में शुरू हुई थी 'शांति संदेश', खगड़िया कॉलेज के प्रो. विश्वानंद थे पहले संपादक
संतमत के आध्यात्मिक ज्ञान और वेदों-उपनिषदों के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस महाराज ने वर्ष 1950 में 'शांति-संदेश' पत्रिका का प्रकाशन शुरू कराया था.
- इतिहास और प्रेस की स्थापना: वर्ष 1966 में कुप्पाघाट आश्रम परिसर में ही प्रेस स्थापित कर इसके मुद्रण को नियमित गति दी गई. यह पत्रिका हर महीने की 10 तारीख को प्रकाशित होती है.
- पूर्व संपादक: खगड़िया कॉलेज के उप प्राचार्य प्रो. विश्वानंद इसके पहले संपादक थे. राम कुमार से पूर्व स्वामी डॉ. गुरु प्रसाद बाबा लगातार 12 वर्षों से अधिक समय तक संपादक पद की जिम्मेदारी संभाल रहे थे.
देश भर से जुटे पदाधिकारी, आगामी महाधिवेशन पर हुई चर्चा
महासभा की इस बैठक की अध्यक्षता उपाध्यक्ष कृष्ण कुमार यादव ने की, जबकि संचालन महामंत्री दिव्य प्रकाश द्वारा किया गया. मंत्री राम कुमार ने देश के कोने-कोने से आए अतिथियों व पदाधिकारियों का स्वागत किया.
बैठक में आगामी महाधिवेशन तथा विभिन्न क्षेत्रीय अधिवेशनों की तैयारियों को लेकर विस्तृत रणनीति तैयार की गई. इस दौरान महासभा के संरक्षक कृष्णवल्लभ यादव, उपाध्यक्ष मुकेश जायसवाल, दिल्ली से आए मंत्री राजेन्द्र मेहता, कोषाध्यक्ष ब्रजकिशोर टेकरीवाल और समस्तीपुर के विश्वनाथ सिंह सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे.
बैठक में लिए गए अन्य प्रमुख निर्णय
अखिल भारतीय संतमत सत्संग महासभा की बैठक में आश्रम के विकास और व्यवस्था को लेकर कई अन्य प्रस्ताव पारित किए गए:
- भूमि सुरक्षा व अतिक्रमण: पूज्य गुरुदेव की संपत्ति और आश्रम की जमीनों से अवैध अतिक्रमण हटाने पर विचार-विमर्श.
- अतिथि सदन का लोकार्पण: महर्षि हरिनंदन अतिथि सदन के औपचारिक लोकार्पण की रूपरेखा तैयार की गई.
- गौशाला व स्वास्थ्य: आश्रम की गौशाला के विस्तार और पूज्य आचार्य श्री के स्वास्थ्य एवं रखरखाव पर विशेष चर्चा.
- अन्य महत्वपूर्ण बिंदु: संतमत के नाम पर बन रहे फर्जी ट्रस्टों पर रोक, दीक्षा देने वाले साधुओं की अधिकृत सूची के प्रकाशन तथा कोर्ट में लंबित वादों पर कानूनी रणनीति तय की गई.
