Bhagalpur News: मेंटेनेंस केस, झूठा फंसाने की साजिश जैसे मामलों मिली कानूनी सलाह
प्रभात खबर लीगल काउंसलिंग में पाठकों को कानूनी सलाह देने के लिए उपस्थित थे वरीय अधिवक्ता जयप्रकाश यादव व्यास
प्रभात खबर लीगल काउंसलिंग में पाठकों को कानूनी सलाह देने के लिए उपस्थित थे वरीय अधिवक्ता जयप्रकाश यादव व्यास
संवाददाता, भागलपुर
प्रभात खबर लीगल काउंसलिंग कार्यक्रम में हमारे पाठक लगातार अतिथि के तौर पर मौजूद होने वाले अधिवक्ताओं से कानूनी सलाह ले रहे हैं और मिलने वाली कानूनी सलाह से संतुष्ट भी हो रहे हैं. इस रविवार को आयोजित कार्यक्रम में पारिवारिक, आपराधिक, सिविल, टाइटिल आदि वादों को लेकर कानूनी सलाह दी गयी. जिसमें पाठकों ने ऐसे मामलों से संबंधित विशेष जानकारियां प्राप्त की. प्रभात खबर कार्यालय में मौजूद वरीय अधिवक्ता जयप्रकाश यादव व्यास ने पाठकों द्वारा पूछे गये कई विषयों पर सवाल का जवाब दिया. जिसमें जमीन संबंधित वाद, पुलिस द्वारा कार्रवाई नहीं किये जाने, झूठे केस में फंसाने, बिजली चोरी के केस में क्या उपाय निकाला जाये, मेंटेनेंस केस आदि पर किस तरह से कानून और अदालत का लाभ लेकर अग्रतर कार्य किया जाये इस पर अपना वक्तव्य रखा. साथ ही उनकी ओर से आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत पर भी विशेष प्रकाश डाला गया.पाठकों द्वारा किये गये सवाल :
मो रेयाज, इमामपुर, रेसालाबाद, हबीबपुर.सवाल :
मां के नाम से जमीन है और उन्होंने 2004 में केवाला से खरीदा था और अंचल से दाखिल खारिज कराया है. हबीबपुर थाना इलाके का एक हिस्ट्री शीटर और उसके परिवार के लोग जमीन घेरने नहीं देते हैं. थाना को आवेदन दिया कोई कार्रवाई नहीं हुई. डीजीपी से लेकर एसएसपी तक को आवेदन दिया, पर आवेदन को कूड़ेदान में डाल दिया जाता है. क्या करें इसके लिए?जवाब : जहां भूमि विवाद शुरू हो जाता है वहां पुलिस की शक्तियां कम हो जाती है. ऐसे में आपको टाइटिल इविक्शन शूट करना चाहिए. ताकि आपको अपनी जमीन पर दखल दिलाया जाये. अगर सारे कागजात दस्तावेज मजबूत हैं तो आपको कोर्ट इस पर निर्णय देगी. अगर कोर्ट दखल के लिए निर्देशित करती है तो सभी पुलिस व प्रशासनिक पदाधिकारी आपको जमीन पर दखल दिलाएंगे.————–
अक्षय आनंद, नारायणपुर, नवगछिया.
सवाल
: 19 अगस्त को कुछ लोगों ने घर पर आकर धमकी दी गयी थी. इस पर हमलोग थाना गये. जहां सभी पर 107 की कार्रवाई कर दी गयी. जबकि पुलिस रिपोर्ट में कार्रवाई सिर्फ द्वितीय पक्ष पर थी. इसके बाद रिविजन के लिए कोर्ट गये. क्या इस पर दंडात्मक कार्रवाई होगी या नहीं?जवाब : पहले एसडीओ के आदेश की प्रतिक्षा करना चाहिए था. इसके बाद ही रिविजन में जाते तो ज्यादा अच्छा होता. दोनों पक्षों को इसलिए बुलाया गया ताकि दोनों की बातों को सुना जा सके. 107 की कार्रवाई इसलिए की गयी ताकि शांति व्यवस्था दोनों पक्षों के बीच बनी रहे. अगर आपको विपक्षियों से डर है तो थाना या कोर्ट में सनहा दर्ज करा सकते हैं. कानूनी कार्रवाई के लिए सीजेएम कोर्ट में नालसी मुकदमा भी अपने अधिवक्ता के माध्यम से दर्ज करा सकते हैं.————-
जूली सिंह, सनोखर, भागलपुर.
सवाल :
तीन साल पूर्व मेरे पति ने तलाक के लिए फैमिली कोर्ट में वाद दायर किया था. जोकि तीन सालों से चल रहा है. पर अब लग रहा है कि दोनों के अधिवक्ता आपस में मिल गये हैं. पति से मुूझे छह साल का बेटा भी है, पर पति द्वारा मुझे न तो घर खर्ची दिया जाता है और न ही उचित मेंटेनेंस दिया जाता है. पति बार-बार दूसरी शादी करने का भय भी देते हैं. मगर मैं तलाक नहीं देना चाहती हूं. ऐसे में क्या करें?जवाब
: अगर आपने मेंटेनेंस के लिए दावा नहीं किया और अंतरिम के लिए आवेदन नहीं दिया है तो पहले यह काम करें. अपने अधिवक्ता के माध्यम से परिवार न्यायालय में ही मेंटेनेंस के लिए अलग से वाद दायर करें. हर हाल में आपको और आपके बच्चे को कोर्ट से न्याय मिलेगा और बेटा अपने पिता के जायदाद में अपना हिस्सा लेने का हकदार है.—————दिनेश कुमार साह, मुंदीचक, भागलपुर.
सवाल
: चार साल पूर्व मैंने एक जमीन खरीद कर रजिस्ट्री और म्यूटेशन दोनों ही कराया. पर जिसने जमीन बेचा वह जमीन पर पोजिशन देने से इंकार कर दिया. उस जमीन पर बेचने वालों के बीच टाइटिल सूट चल रहा है. क्या करें?जवाब : इस बात को लेकर अपने अधिवक्ता के माध्यम से कोर्ट में जाकर इंटरवेनर बनिये. और कोर्ट से दखल दिलाने की मांग करें. या तो अपने पैसों को वापस लेने के लिए वाद दायर कर सकते हैं.
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संतोष कुमार राय, बंगाली टोला, नाथनगर.
सवाल-1
: कंप्लेन केस के लिए कोई समय सीमा है क्या? 2017 से केस चल रहा है और गवाही भी चल रही है. अब तक कोई हल नहीं निकला है.जवाब : मामला क्रिमिनल केस का है. अपने अधिवक्ता के माध्यम से केस के सारे अभिलेखों को निकालें और अधिवक्ता के माध्यम से कोर्ट से सभी मुदालय को नोटिस भिजवाने का प्रयास करें. कोर्ट खुद ही सभी मुदालय को कोर्ट में उपस्थित होने के लिए नोटिस भेजेगी.
सवाल-2
: कुछ लोग अपने घर पर फर्जी स्टांप और रजिस्ट्री का कागज और केवाला तैयार कर रहा है, तो यह किस कानून के तहत आयेगा?जवाब : मामला धोखाधड़ी संबंधित है. इसको लेकर वरीय पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों को पत्र लिखकर ऐसे व्यक्ति को पकड़ने की मांग कर सकते हैं. मामले को कोर्ट में सिविल सूट के तहत भी कागजात को फर्जी बताते हुए दावा कर सकते हैं.————धीरज कुमार, बूढ़ानाथ, भागलपुर.
सवाल :
एक फाइनेंस कंपनी में पूर्व में ब्रांच मैनेजर के रूप में काम करते थे. उसी कंपनी में काम करने वाले दो कर्मियों ने मेरे भरोसे का फायदा उठाकर आइडी-पासवर्ड का इस्तेमाल कई लोगों को करीब 50-60 लाख रुपये का फर्जी लोन पास करा दिया. इसके बाद कंपनी ने मुझे भी मुदालय बना दिया और मुझे टर्मिनेट भी कर दिया. मामले में कोर्ट में प्रे करने के बाद मेरी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी गयी है. अब क्या करें?जवाब : अगर गिरफ्तारी पर कोर्ट से रोक लगायी गयी हो तो मामले में अपना पक्ष लेकर पुलिस पदाधिकारियों और अधिकारियों से मिलें. जो भी साक्ष्य आपके पास हैं उसे अपने सूपरवाइजिंग पदाधिकारी, सर्किल इंस्पेक्टर या डीएसपी को दें. साथ ही अनुसंधानकर्ता से मिल कर अपने पक्ष को केस डायरी में अंकित करवाएं. अगर पुलिस आपके पक्ष को नहीं सुनती है तो मामले में या तो थाना में या फिर न्यायालय में काउंटर केस कराइये. ताकि आपकी बात सामने आ सके.———-माधव कुमार, सुल्तानगंज.
सवाल :
कोई आदमी अगर झूठा मुकदमे में फंसाने का प्रयास करता है तो उससे बचने के लिए क्या किया जाये?जवाब : मामले में झूठे केस से बचाव के लिए सनहा किया जा सकता है. या तो थाना में करें या फिर कोर्ट में. थाना में किये गये सनहा का महत्व ज्यादा पुलिस कार्रवाई में है. वहीं अगर कोर्ट में सनहा करते हैं और उसकी कॉपी थाना को उपलब्ध करा दी जाये तो दोनों ही जगहों पर आपको इसका लाभ मिलेगा.————–पंकज कुमार, सलेमपुर, कहलगांव.
सवाल :
बिजली चोरी का केस हुआ था, जिसका फाइन जमा करा दिया गया है. इसमें क्या भागलपुर कोर्ट से जमानत लेनी पड़ेगी?जवाब : मामले में बेल लेने की जरूरत नहीं है. आगामी 8 मार्च को भागलपुर कोर्ट में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन होने जा रहा है. अपना बिजली उपभोक्ता नंबर, आधार कार्ड, फाइन जमा करने के कागजात आदि लेकर लोक अदालत में पहुंचे. जहां आपके वाद पर सुनवाई कर केस को खत्म किया जा सकता है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
