भागलपुर से ललित किशोर मिश्र की रिपोर्ट : विक्रमशिला सेतु पर वाहनों के परिचालन को पुनः बहाल करने की दिशा में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है. शुक्रवार को 24 मीटर लंबे तीसरे और अंतिम बेली ब्रिज के गार्डर की लॉन्चिंग सफलतापूर्वक पूरी कर ली गयी है. बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन (BRO) के अधिकारियों के अनुसार, अब ब्रिज के रैंप और अन्य शेष कार्यों को युद्ध स्तर पर पूरा किया जा रहा है. इसका निरीक्षण शुक्रवार को जिलाधिकारी डॉ नवल किशोर चौधरी करेंगे.
5 जून से परिचालन शुरू होने की संभावना
लॉन्चिंग के बाद अब इस ब्रिज पर गाड़ियों का ट्रायल लिया जायेगा. यदि ट्रायल सफल रहता है और सभी तकनीकी मानक पूरे पाये जाते हैं, तो संभावना है कि 5 जून से इस पुल के माध्यम से वाहनों का परिचालन विधिवत शुरू कर दिया जायेगा. इससे आवाजाही की समस्या झेल रहे लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है.विक्रमशिला सेतु : एक नजर में घटनाक्रम
सेतु के स्लैब टूटने के बाद से प्रशासन और बीआरओ की टीम लगातार इसे बहाल करने में जुटी है. ज्ञात हो कि 3 मई की रात विक्रमशिला सेतु के 34 मीटर का स्लैब गंगा में समा गया, जिससे आवाजाही पूरी तरह बाधित हो गयी. 4 मई को बिहार राज्य पुल निर्माण निगम के अध्यक्ष डॉ चंद्रशेखर सिंह ने तीन महीने में काम पूरा करने का लक्ष्य रखा. इसके बाद उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से बात कर सेना (BRO) की तकनीकी मदद मांगी. 5-6 मई को बीआरओ की टीम भागलपुर पहुंची और घटनास्थल का आकलन (असेसमेंट) पूरा किया. विशेषज्ञों ने सेतु पर ”एलिगेटर क्रैकिंग” की पुष्टि की. पथ निर्माण मंत्री कुमार शैलेंद्र ने सेतु का निरीक्षण कर बीआरओ की टीम से बेली ब्रिज की तैयारियों की विस्तृत जानकारी ली. 19 मई को पहले बेली ब्रिज की लॉन्चिंग हुई. 24 मई को दूसरे बेली ब्रिज के गार्डर लॉन्च किये गये. 29 मई को तीसरे और अंतिम 24 मीटर वाले बेली ब्रिज के गार्डर की लॉन्चिंग संपन्न हुई. अब सेतु के पूरी तरह तैयार होने और 5 जून के संभावित परिचालन पर आम जनता और प्रशासनिक अधिकारियों की नजरें टिकी हुई हैं.
