कहलगांव शहर में नगर पंचायत की सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है. शहर में लगातार तीसरे दिन भी कचरे का उठाव नहीं होने के कारण प्रमुख चौक-चौराहों, मुख्य बाजारों और रिहायशी कॉलोनियों में गंदगी का अंबार लग गया है.
सड़कों के किनारे जमा गीला और सूखा कचरा अब सड़ने लगा है, जिससे उठने वाली तेज दुर्गंध ने शहरवासियों, दुकानदारों और राहगीरों का जीना मुहाल कर दिया है.
सड़कों तक फैला कचरा, महामारी का मंडराया खतरा
शहर में नियमित रूप से निकलने वाले दैनिक कचरे का उठाव न होने से स्थिति बदतर हो गई है. कई स्थानों पर कूड़े के ऊंचे ढेर बिखर कर आधी सड़क तक फैल चुके हैं.
दुकानदारों को अपनी दुकानों के ठीक सामने पसरी सड़ांध के बीच व्यापार करना पड़ रहा है, वहीं राहगीरों का नाक पर कपड़ा रखकर गुजरना भी दूभर हो चुका है. सड़ते कचरे के ढेर पर आवारा मवेशियों, मक्खियों और मच्छरों का जमावड़ा लगा हुआ है, जिससे शहर में संक्रामक और वेक्टर जनित बीमारियां फैलने का गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है.
डंपिंग ग्राउंड का विवाद: 3 दिनों से सुस्त पड़ा प्रशासन
इस पूरे गतिरोध की शुरुआत सोमवार को हुई, जब स्थानीय ग्रामीणों ने विरोध जताते हुए नगर पंचायत के नियमित डंपिंग ग्राउंड में कचरा गिराने पर रोक लगा दी.
डंपिंग ग्राउंड बंद होने के बावजूद नगर पंचायत प्रशासन पिछले तीन दिनों में कोई वैकल्पिक व्यवस्था या आपातकालीन उपाय तलाशने में नाकाम रहा है. नतीजा यह हुआ कि पूरे शहर का कचरा उठाव का चक्र ही ठप पड़ गया.
स्थानीय नागरिकों का फूटा गुस्सा
शहरवासियों का कहना है कि साफ-सफाई सुनिश्चित करना नगर पंचायत की सबसे प्राथमिक और अनिवार्य जिम्मेदारी है. यदि मुख्य डंपिंग ग्राउंड पर किसी कारणवश व्यवधान आया भी था, तो प्रशासन को तुरंत बैकअप या अन्य अस्थायी स्थल की व्यवस्था करनी चाहिए थी. नागरिकों का आरोप है कि सफाई टैक्स वसूलने के बावजूद प्रशासनिक सुस्ती के कारण पूरे शहर को कचरा घर बना दिया गया है.
अधिकारी का दावा: जल्द सुलझेगा विवाद
इस संबंध में नगर पंचायत के स्वच्छता पर्यवेक्षक राहुल कुमार ने स्वीकार किया कि डंपिंग से जुड़ी समस्याओं के कारण कूड़ा उठाव का कार्य बाधित हुआ है. उन्होंने कहा कि प्रशासनिक स्तर पर ग्रामीणों से वार्ता कर डंपिंग ग्राउंड के विवाद को सुलझाने का प्रयास किया जा रहा है और बहुत जल्द वैकल्पिक उपाय निकाल कर शहर में सफाई व्यवस्था को बहाल कर दिया जाएगा.
