सावन के बाद भादो में भी उमड़ी भक्ति: सुलतानगंज से गंगाजल भरकर बाबाधाम रवाना हुए हजारों कांवरिये, अनंत चतुर्दशी पर करेंगे जलाभिषेक

भादो एकादशी पर हजारों कांवरिये सुलतानगंज से गंगाजल लेकर बाबा बैद्यनाथ धाम के लिए रवाना हुए. उत्तरवाहिनी गंगा घाटों पर भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी.

Sultanganj Bhado Ekadashi Kanwar Yatra: सावन की फुहारें भले ही बीत चुकी हों, लेकिन भगवान भोलेनाथ के भक्तों के दिलों में जल रही भक्ति की लौ रत्ती भर भी कम नहीं हुई है. भादो मास की पवित्र एकादशी पर मंगलवार को बिहार के ऐतिहासिक और धार्मिक शहर सुलतानगंज में आस्था और भक्ति का ऐसा समुद्र उमड़ा कि पूरा उत्तरवाहिनी गंगा तट हर-हर महादेव और बोलबम के गगनभेदी जयघोष से सराबोर हो उठा. सावन मेला समाप्त होने के हफ्तों बाद भी उत्तरवाहिनी गंगा के विभिन्न घाटों से लेकर देवघर जाने वाले कांवरिया पथ तक भक्तों का जो उत्साह देखने को मिला, उसने एक बार फिर साबित कर दिया कि बाबा बैद्यनाथ के भक्तों के लिए भक्ति का कोई मौसम नहीं होता.

गंगा स्नान के बाद अजगैवीनाथ में टेका मत्था, कांवर लेकर देवघर रवाना

मंगलवार तड़के से ही सुलतानगंज के प्रमुख गंगा घाटों पर कांवरियों का तांता जुटना शुरू हो गया था. बिहार के कोने-कोने से ही नहीं, बल्कि पड़ोसी राज्यों झारखंड, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश से भी हजारों की संख्या में शिवभक्त पवित्र गंगाजल भरने सुलतानगंज पहुंचे. गंगा स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने विधि-विधान के साथ कांवर में पवित्र जल भरा और ऐतिहासिक बाबा अजगैवीनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना कर अपने गंतव्य की ओर कदम बढ़ा दिए. गेरुआ वस्त्रों में सजे शिवभक्तों के जत्थे जब कांवर उठाकर पैदल और गाड़ियों से देवघर के लिए रवाना हुए, तो ऐसा लगा मानो पूरा सुलतानगंज शहर ही भक्ति के सागर में गोता लगा रहा हो.

प्रदोष और अनंत चतुर्दशी पर करेंगे जलाभिषेक, कांवरिया पथ पर बढ़ा उत्साह

गंगाजल लेकर पैदल यात्रा पर निकले कांवरियों ने बताया कि वे भादो मास के अत्यंत शुभ संयोग में पड़ने वाले प्रदोष व्रत और अनंत चतुर्दशी के पावन अवसर पर बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे. इस धार्मिक मान्यता के कारण ही भादो में कांवर यात्रा का विशेष महत्व माना जाता है. कांवरिया पथ पर हर दो कदम पर उठते 'बोलबम' के जयकारों ने यात्रियों की थकान को मिनटों में गायब कर दिया. कई बुजुर्ग, महिलाएं और छोटे-छोटे बच्चे भी बाबा के दरबार में अपनी हाजिरी लगाने के लिए पूरे उत्साह और भक्ति भाव के साथ आगे बढ़ते नजर आए.

सेवा भाव से सराबोर दिखा रास्ता, स्थानीय लोगों ने संभाली कमान

सुलतानगंज की सड़कों, बाजारों और कांवरिया मार्ग पर हर तरफ बस शिवभक्तों का ही रेला नजर आ रहा था. सरकारी मेले के आधिकारिक समापन के बावजूद स्थानीय ग्रामीणों, समाजसेवियों और दुकानदारों ने मिसाल पेश की. कांवरियों की सेवा के लिए जगह-जगह पानी, शरबत, चाय और स्वास्थ्य सुविधाओं की व्यवस्था स्थानीय लोगों द्वारा खुद आगे बढ़कर की गई. सेवादारों का कहना है कि बाबा के भक्तों की सेवा करना ही सबसे बड़ा पुण्य का काम है. पूरी रात शहर के बाजारों में चहल-पहल बनी रही और दुकानों पर पूजा-सामग्री तथा कांवर खरीदने वालों की भारी भीड़ लगी रही.

Sultanganj Bhado Ekadashi Kanwar Yatra: भादो की भक्ति में डूबा उत्तरवाहिनी तट, आस्था के आगे सब नतमस्तक

आमतौर पर माना जाता है कि सावन बीतते ही कांवर यात्रा थम जाती है, लेकिन सुलतानगंज का यह नजारा कुछ और ही कहानी बयां कर रहा था. भादो की धूप और गर्मी के बावजूद न तो कांवरियों के कदम डगमगाए और न ही उनके चेहरे पर शिकन दिखी. गंगा घाटों से लेकर बाजारों तक फैली यह शिवभक्ति यह दर्शाती है कि आस्था की जड़ें कितनी गहरी हैं. अजगैवीनाथ की नगरी से शुरू हुआ यह भक्ति का सफर अब अनंत चतुर्दशी तक देवघर में बाबा बैद्यनाथ के दरबार तक लगातार जारी रहेगा और पूरा इलाका 'बोलबम' के उद्घोष से गुंजायमान रहेगा.

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By Shubhanka Kumar

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