Bhagalpur news गंगा में समाया आदर्श दूसरे दिन भी नहीं मिला

अजगैवीनाथ सीढ़ी घाट पर सोमवार को गंगा स्नान के दौरान डूबे 16 वर्षीय आदर्श शर्मा का मंगलवार को भी कोई पता नहीं चल सका.

अजगैवीनाथ सीढ़ी घाट पर सोमवार को गंगा स्नान के दौरान डूबे 16 वर्षीय आदर्श शर्मा का मंगलवार को भी कोई पता नहीं चल सका. दूसरे दिन एसडीआरएफ और गोताखोरों की तलाश नाकाम रहने से परिजनों की उम्मीदें टूटती नजर आ रही हैं. मोतिहारी (रक्सौल) के टुमरिया मोहल्ला के आदर्श अपने बड़े भाई आर्यन शर्मा और मित्र के साथ गंगाजल लेकर बाबाधाम जाने आया था. बड़े भाई ने बताया कि सोमवार को देर से खोज शुरू होने के बावजूद उम्मीद थी कि मंगलवार को भाई मिल जाएगा, लेकिन दिनभर की मशक्कत के बाद भी एसडीआरएफ खाली हाथ लौटी. सूचना मिलते ही पिता रितेश ठाकुर व परिजन सुलतानगंज पहुंच गये. परिवार के सदस्य पूरी रात होटल में गुजारने के बाद सुबह से गंगा किनारे बैठकर बेटे के मिलने की दुआ कर रहे हैं. बुधवार को भी खोजबीन जारी रहने की बात कही गयी है. आदर्श तीन भाइयों में दूसरे नंबर पर था और इसी वर्ष उसने दसवीं की परीक्षा प्रथम श्रेणी से पास की थी. आस्था के साथ शुरू हुई बाबाधाम यात्रा एक झटके में मातम में बदल गयी.

स्थानीय लोगों के अनुसार जिस स्थान पर हादसा हुआ वहां अस्थायी बैरिकेडिंग क्षतिग्रस्त थी. गहराई का कोई स्पष्ट संकेत नहीं होने से स्नान करने वाले लोग अनजाने में गहरे पानी में चले जाते हैं और यही हादसे की बड़ी वजह बनी. लोगों का कहना है कि भीड़भाड़ वाले इस घाट पर एसडीआरएफ की स्थायी तैनाती नहीं होने से हर साल जोखिम बना रहता है. सुरक्षा नौका, वालंटियर और “गंगा मित्र” जैसी व्यवस्थाओं की कमी पर भी सवाल उठे हैं. आस्था के घाट पर एक और हादसा,अब सवाल सिर्फ एक है, क्या आदर्श की तलाश के साथ सुरक्षा व्यवस्था भी मिलेगी, या अगली घटना का इंतजार रहेगा?

घाट पर ‘सुरक्षा’ नहीं, हादसे ने खोली व्यवस्था की पोल

सुलतानगंज अजगैवीनाथ गंगा घाट पर डूबने की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था की सच्चाई उजागर कर दी है. हर दिन हजारों श्रद्धालु यहां स्नान करने पहुंचते हैं, लेकिन सुरक्षित स्नान के लिए जरूरी इंतजाम आज भी अधूरे हैं. सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इस लापरवाही की जिम्मेदारी कौन लेगा?घाट पर सुरक्षा के लिए बांस की बैरिकेडिंग लगायी गयी थी, लेकिन हादसे वाले स्थान पर क्षतिग्रस्त हो चुकी थी. ऐसे में स्नान करने वाले श्रद्धालु अनजाने में गहरे पानी में चले जाते हैं और हादसे का शिकार हो जाते हैं. डूबे बालक के परिजनों का कहना है कि यदि घाट पर एसडीआरएफ टीम की स्थायी तैनाती होती, तो शायद उनका बेटा आज जिंदा होता. वर्षों से एसडीआरएफ की तैनाती की मांग हो रही है, लेकिन अब तक व्यवस्था कागजों तक ही सीमित है. स्थानीय लोगों के अनुसार, बिहार ही नहीं बल्कि दूसरे राज्यों से भी श्रद्धालु यहां गंगा स्नान के लिए पहुंचते हैं.

नगर परिषद में प्रस्ताव पास, काम जारी

नगर परिषद के मुख्य पार्षद राजकुमार गुड्डू ने बताया कि अक्षय तृतीया तक अस्थायी बांस बैरिकेडिंग लगायी गयी थी, लेकिन हादसे वाले स्थान पर बैरिकेडिंग टूट गयी थी. अब स्थायी फाइबर बैरिकेडिंग का प्रस्ताव की प्रशासनिक स्वीकृति मिल चुकी है और सुरक्षित स्नान को लेकर पहल जारी है. श्रद्धालुओं से अपील की है कि गंगा स्नान के दौरान गहरे पानी में न जाएं और सुरक्षित स्थान पर ही स्नान करें.

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By JITENDRA TOMAR

JITENDRA TOMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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