Bihar: कोर्ट और पुलिस मुख्यालय के नजदीक मिली सैकड़ों शराब की बोतलें, कुछ दूर पर बैठते हैं एसपी, चुप्पी पर उठ रहे सवाल

Bihar: बिहार के भागलपुर में एसपी ऑफिस और कोर्ट परिसर के नजदीक शराब की सैकड़ों बोतल मिली है. जिस राज्य में शराबबंदी कानून लागू हो वहां के पुलिस मुख्यालय के नजदीक अगर शराब की बोतल बरामद होगी तो सवाल उठाना लाजमी है.

Bihar: बिहार में लागू शराबबंदी कानून की सख्ती पर सवाल खड़े करने वाली एक चौंकाने वाली तस्वीर नवगछिया से सामने आई है. यहां न्यायालय और पुलिस प्रशासन के मुख्यालय के समीप सैकड़ों शराब की खाली बोतलें मिली हैं. यह नजारा राज्य सरकार की तथाकथित ‘शराबबंदी’ की सच्चाई को उजागर करने के लिए काफी है. नवगछिया अनुमंडल के कोर्ट परिसर और एसपी, एसडीपीओ कार्यालय, मध्य निषेध सह उत्पाद थाना नवगछिया, लोक शिकायत कार्यालय, भवन निर्माण विभाग, पीएचडी विभाग, बीएमपी कार्यालय के समीप भारी मात्रा में विदेशी और देसी शराब की खाली बोतलें बिखरी मिलीं. यह जगह कोई आम इलाका नहीं बल्कि प्रशासन का अभेद्य किला माना जाता है, जहां जिले के सबसे बड़े अधिकारी बैठते हैं. सवाल यह उठता है कि जब कानून के रखवालों की नाक के नीचे ही शराब पी जा रही हो, तो आम जनता से क्या उम्मीद की जाए?

थाना में खाली बोतल लाया गया पुलिस

कौन कर रहा है शराब की खपत?

अदालत में न्याय की गूंज होनी चाहिए, वहीं शराब की बोतलों की खनक सुनाई दे रही है. जहां कानून को पालन कराने की शपथ लेने वाले अधिकारी बैठते हैं, वहीं शराबखोरी का गोरखधंधा फल-फूल रहा है. इन सैकड़ों बोतलों को देखकर साफ है कि यह कोई इक्का-दुक्का मामला नहीं, बल्कि एक संगठित धंधा है.

उठ रहे ऐसे सवाल

क्या प्रशासनिक अधिकारी ही इस शराब का सेवन कर रहे हैं?
क्या यहां अवैध रूप से शराब लाई जा रही है?
शराबबंदी कानून केवल आम जनता पर लागू है और अधिकारियों के लिए बेमानी?

पुलिस खाली बोतल को चुनते हुए

प्रशासन का मौन, जिम्मेदार कौन?

जब इस मामले पर नवगछिया एसडीपीओ ओम प्रकाश से प्रतिक्रिया मांगी गई, तो उन्होंने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया और सारा दारोमदार एसपी प्रेरणा पर डाल दिया. वहीं, जब एसपी से बात करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने ‘वीडियो कॉन्फ्रेंस’ का बहाना बनाकर संवाद से बचने का प्रयास किया. सवाल यह उठता है कि जब प्रशासन ही इस मामले में चुप्पी साधे बैठा है, तो न्याय की उम्मीद किससे की जाए?

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शराबबंदी कानून पर सवालिया निशान

बिहार सरकार ने शराबबंदी कानून को राज्य में अपराध कम करने और समाज सुधार के उद्देश्य से लागू किया था. लेकिन इस घटना से यह साबित होता है कि यह कानून केवल कागजों तक सीमित रह गया है. प्रशासन और पुलिस विभाग की नाक के नीचे इस तरह की गतिविधियां चल रही हैं, तो पूरे राज्य में क्या हाल होगा, इसकी कल्पना सहज ही की जा सकती है.

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मामले की निष्पक्ष जांच हो

यह प्रकरण सरकार और प्रशासन के लिए गंभीर चिंता का विषय है. नवगछिया प्रशासन को इस मामले की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट करना चाहिए कि इन शराब की बोतलों का सेवन किन लोगों ने किया? क्या इस शराबबंदी कानून की धज्जियां उड़ाने वालों में वे अधिकारी भी शामिल हैं, जो इसे लागू कराने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं?

जनता को जवाब चाहिए, क्योंकि कानून सबके लिए समान होना चाहिए. अगर यह शराबबंदी केवल आम लोगों पर लागू है और अधिकारी खुद कानून तोड़ रहे हैं, तो बिहार में इस कानून का कोई औचित्य नहीं बचता. नवगछिया की यह घटना शराबबंदी की असलियत को सामने लाने के लिए काफी है और सरकार को इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.

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Author: Paritosh Shahi

परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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