भागलपुर जिले के नवगछिया अनुमंडल अंतर्गत गंगा नदी के बढ़े हुए जलस्तर ने गोपालपुर, इस्माईलपुर और रंगरा प्रखंडों में भीषण तबाही मचा रखी है.
इन तीनों प्रखंडों के निचले इलाकों में पानी तेजी से फैलने के चलते स्थिति गंभीर बनी हुई है. केवल गोपालपुर प्रखंड की ही पांच पंचायतों में करीब 5,000 परिवार बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं, वहीं इस्माईलपुर और रंगरा के दर्जनों गांवों का संपर्क मुख्य मार्गों से कट गया है. लोग ऊंचे स्थानों और तटबंधों पर शरण लेने को मजबूर हैं.
गोपालपुर की 5 पंचायतों में 5,000 परिवार प्रभावित
गोपालपुर के अंचलाधिकारी (सीओ) रौशन कुमार ने बताया कि तिनटंगा करारी, सुकटिया बाजार, गोपालपुर डिमाहा, बाबू टोला कमलाकुंड और डुमरिया चपरघट पंचायतें बाढ़ के पानी से बुरी तरह घिरी हुई हैं.
प्रभावित परिवारों को सुरक्षित निकालने और उन तक राहत सामग्री पहुंचाने के लिए प्रशासन ने 8 बड़ी सरकारी नावों को रेस्क्यू ऑपरेशन में लगाया है.
गोपालपुर में 9 सामुदायिक किचन (कम्युनिटी किचन) शुरू
विस्थापित और जलमग्न घरों में फंसे लोगों को तैयार भोजन मुहैया कराने के लिए प्रशासन ने गोपालपुर में 9 स्थानों पर सामुदायिक किचन सक्रिय कर दिए हैं:
- मध्य विद्यालय आजाद नगर (तिनटंगा करारी)
- सत्संग भवन (तिनटंगा करारी)
- महिपाल बुनियादी विद्यालय (तिनटंगा करारी)
- हवा महल (तिनटंगा करारी)
- डिमाहा के बोचाही स्थित स्पर संख्या तीन
- बाबू टोला कमलाकुंड स्थित पप्पू सिंह का गोदाम
- डुमरिया मध्य विद्यालय
- डुमरिया चौक
- मध्य विद्यालय तिरासी
प्रशासन ने सभी कम्युनिटी किचन के लिए अलग-अलग नोडल प्रभारी नियुक्त किए हैं, ताकि भोजन की गुणवत्ता और वितरण में कोई कोताही न हो.
इस्माईलपुर प्रखंड मुख्यालय में घुसा पानी, नवगछिया शिफ्ट करने की तैयारी
इस्माईलपुर प्रखंड में गंगा का पानी प्रखंड मुख्यालय परिसर तक पहुंच गया है, जिसके चलते प्रशासनिक कार्यों को नवगछिया स्थानांतरित करने की रूपरेखा तैयार कर ली गई है.
प्रखंड की पश्चिमी भिट्ठा और पूर्वी भिट्ठा पंचायतों के कई गांव जलमग्न हैं. यहां भी सामुदायिक किचन के जरिए ग्रामीणों को गर्म भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है.
रंगरा में तटबंधों पर पहरा, मेडिकल टीमें तैनात
रंगरा प्रखंड के निचले इलाकों में बाढ़ का पानी फैलने से कई गांवों में सड़क संपर्क बाधित हो गया है.
जल संसाधन विभाग और स्थानीय प्रशासन की टीमें संवेदनशील तटबंधों और स्परों पर 24 घंटे गश्त कर रही हैं, ताकि कटाव को रोका जा सके. तीनों प्रखंडों में प्रभावित परिवारों की सूची तैयार की जा रही है. राहत केंद्रों और सामुदायिक किचन के पास मेडिकल कैंप लगाकर डायरिया, बुखार और त्वचा संक्रमण से बचाव की जरूरी दवाएं बांटी जा रही हैं.
