भागलपुर से ललित किशोर मिश्र की रिपोर्ट:
Ganga Waterway Survey: गंगा नदी में मालवाहक और यात्री जहाजों के सुरक्षित परिचालन को सुनिश्चित करने के लिए भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) की टीम ने कहलगांव से मुंगेर के महेंद्रपुर तक गंगा नदी के जलस्तर और गहराई का सर्वे शुरू कर दिया है. सर्वेक्षण के माध्यम से नदी के विभिन्न हिस्सों में उपलब्ध जल की गहराई का आकलन किया जा रहा है, ताकि जहाजों के संचालन में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो.
जलमार्ग की स्थिति का लिया जा रहा जायजा
प्राधिकरण की क्षेत्रीय टीम विशेष उपकरणों की सहायता से गंगा नदी में जल की गहराई माप रही है. सर्वे का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कहलगांव से महेंद्रपुर के बीच किन क्षेत्रों में जहाजों के परिचालन के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध है और किन क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता है.
जहाज परिचालन के लिए तीन मीटर जल जरूरी
जलमार्ग विशेषज्ञों के अनुसार अधिकांश मालवाहक एवं यात्री जहाजों के सुचारु परिचालन के लिए गंगा नदी में कम से कम तीन मीटर जल गहराई होना आवश्यक है. गर्मी के मौसम में नदी का जलस्तर घटने के कारण कई स्थानों पर गहराई कम हो जाती है. इसी कारण प्राधिकरण द्वारा प्रत्येक माह चार बार जलस्तर की निगरानी और सर्वेक्षण किया जा रहा है.
कम गहराई वाले क्षेत्रों में होगी ड्रेजिंग
प्राधिकरण के सूत्रों के अनुसार जिन स्थानों पर जल की गहराई तीन मीटर से कम पाई जाती है, वहां ड्रेजिंग कर नदी तल से गाद निकाली जाती है. इससे जलमार्ग को जहाजों के लिए सुरक्षित और सुगम बनाया जाता है.
राष्ट्रीय जलमार्ग के लिए महत्वपूर्ण है सर्वे
गंगा नदी का यह मार्ग राष्ट्रीय जलमार्ग-1 का हिस्सा है, जहां से मालवाहक जहाजों के साथ-साथ पर्यटन और यात्री जहाजों का भी संचालन होता है. हाल ही में गुवाहाटी, बांग्लादेश और अन्य जलमार्गों से जुड़ी कार्गो सेवाओं का संचालन भी इसी मार्ग से हुआ है. ऐसे में जलस्तर की नियमित निगरानी जल परिवहन व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है.
