भागलपुर, नवगछिया. गंगा और कोसी के उफान ने नवगछिया अनुमंडल के गोपालपुर, इस्माईलपुर और रंगरा प्रखंडों के दर्जनों गांवों की जिंदगी को पानी में ठहरा दिया है. हालांकि बाढ़ का पानी अब धीरे-धीरे उतरने लगा है, लेकिन गांवों में अब भी कई जगह पानी जमा है. कहीं घरों के आसपास पानी ठहरा हुआ है तो कहीं सड़क और संपर्क मार्ग डूब जाने से गांवों का मुख्य सड़क से संपर्क बाधित है. जरूरी काम के लिए लोगों को नाव का सहारा लेना पड़ रहा है.
लंबे समय तक पानी जमा रहने से बढ़ी परेशानी
बाढ़ का पानी लंबे समय तक जमा रहने के कारण प्रभावित इलाकों में बीमारी, शुद्ध पेयजल, पशुचारा और रोजमर्रा की जरूरतों का संकट गहराने लगा है. निचले इलाकों में रहने वाले परिवारों को सबसे अधिक परेशानी हो रही है. घरों के चारों ओर पानी जमा रहने के कारण कई परिवार सुरक्षित स्थानों की ओर जाने को मजबूर हैं. कई परिवार राहत शिविरों में पहुंच चुके हैं, जबकि बड़ी संख्या में लोग अभी भी अपने घरों में रहकर पानी कम होने का इंतजार कर रहे हैं.
गोपालपुर में पांच पंचायतों के हजारों परिवार प्रभावित
गोपालपुर प्रखंड में पांच पंचायतों के हजारों परिवार बाढ़ से प्रभावित बताए जा रहे हैं. निचले इलाकों में पानी जमा रहने के कारण लोगों की आवाजाही प्रभावित है. बाढ़ पीड़ितों के लिए सामुदायिक किचन संचालित किए जा रहे हैं, जहां लोगों को भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है.
प्रभावित परिवारों के सामने पानी निकलने तक दैनिक जरूरतों को पूरा करने की चुनौती बनी हुई है. ग्रामीणों को उम्मीद है कि जलस्तर में और कमी आने के बाद जल्द ही आवागमन सामान्य हो सकेगा.
इस्माईलपुर में तटबंध पर पानी का दबाव बढ़ा
इस्माईलपुर में गंगा के बढ़े जलस्तर और तटबंध पर पानी के दबाव ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है. इस्माईलपुर-बिंदटोली क्षेत्र में गंगा का पानी तटबंध के टो तक पहुंच चुका है. ब्रह्मोत्तर बांध के आसपास भी स्थिति संवेदनशील बनी हुई है. ग्रामीण लगातार तटबंध और बांध की स्थिति पर नजर रख रहे हैं. निचले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और राहत सामग्री उपलब्ध कराने की चुनौती भी बनी हुई है.
संवेदनशील स्थलों पर प्रशासन की निगरानी
बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासन और जल संसाधन विभाग की टीमें संवेदनशील स्थलों पर निगरानी कर रही हैं. नावों के माध्यम से लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और प्रभावित परिवारों तक राहत सामग्री पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है.
हालांकि ग्रामीणों के सामने सबसे बड़ा सवाल अब भी यही है कि पानी पूरी तरह कब निकलेगा और वे अपने घरों में सुरक्षित तरीके से कब लौट सकेंगे.
रंगरा में कोसी का दबाव, कटाव का खतरा कायम
रंगरा प्रखंड में कोसी के पानी ने कई गांवों को प्रभावित किया है. सिमरिया और आसपास के क्षेत्रों में पानी के साथ कटाव का दबाव भी ग्रामीणों के लिए चिंता का कारण बना हुआ है. कई जगह पुरानी रेल लाइन और संपर्क मार्ग के आसपास नदी का दबाव बढ़ा है, जिससे ग्रामीणों में भय का माहौल है.कोसी के पानी से खेत जलमग्न हैं. किसानों के सामने फसल बचाने के साथ पशुओं के लिए चारा जुटाने की समस्या भी खड़ी हो गयी है. लंबे समय तक खेतों में पानी जमा रहने से फसलों के खराब होने की आशंका भी बनी हुई है.
राहत शिविरों में भोजन के साथ दवा और पेयजल की मांग
प्रभावित इलाकों में राहत शिविर और सामुदायिक किचन संचालित किए जा रहे हैं. राहत शिविरों में भोजन की व्यवस्था की गयी है और नावों के माध्यम से लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा रहा है.
ग्रामीणों का कहना है कि राहत शिविरों में भोजन के साथ शुद्ध पेयजल, दवा, बच्चों के लिए जरूरी सामान और पशुचारे की पर्याप्त व्यवस्था भी होनी चाहिए. लंबे समय तक पानी जमा रहने से मच्छरों और जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है.
पानी उतरने के बाद भी बनी रहेगी चुनौती
गंगा और कोसी के जलस्तर में कमी आने से प्रभावित लोगों को राहत की उम्मीद जगी है, लेकिन गांवों में जमा पानी पूरी तरह निकलने में समय लग सकता है. संपर्क मार्ग बहाल करने, पेयजल और स्वच्छता की व्यवस्था दुरुस्त करने तथा किसानों और पशुपालकों को हुए नुकसान से निपटने की चुनौती भी सामने रहेगी. ग्रामीणों की मांग है कि पानी पूरी तरह निकलने तक राहत और निगरानी व्यवस्था लगातार जारी रखी जाए, ताकि किसी तरह की बीमारी या दूसरी समस्या गंभीर रूप न ले सके.
