जिस बेटे की हत्या का दर्द दो साल से ढो रहे पिता, अब कोर्ट के फैसले के बाद बोले- ‘लड़ाई अभी बाकी है’

दो साल पहले बेटे रौनक की हत्या के बाद से पिता बलराम केडिया की जिंदगी बदल गई है. कोर्ट ने दो दोषियों को उम्रकैद सुनाई है, लेकिन पिता इंसाफ से संतुष्ट नहीं हैं. वे अब भी अपने बेटे के लिए कड़ी सजा की उम्मीद में लड़ाई जारी रखेंगे.

Raunak Kedia Murder Case: भागलपुर. आत्माराम मेडिकल की दुकान पर मंगलवार की शाम रोज की तरह ग्राहकों की भीड़ थी. कोई दवा लेने पहुंचा था तो कोई डॉक्टर की पर्ची लेकर अपनी बारी का इंतजार कर रहा था. दुकान के अंदर एक शख्स चुपचाप ग्राहकों को दवाइयां दे रहा था. चेहरे पर बढ़ी हुई दाढ़ी-मूंछ, सिर पर बेतरतीब लंबे बाल और बढ़े हुए नाखून देखकर पहली नजर में पहचान पाना मुश्किल था कि यह उसी दुकान के संचालक बलराम केडिया हैं.

लेकिन उनके बदले हुए चेहरे के पीछे दो साल पुराना ऐसा दर्द है, जिसने उनकी पूरी जिंदगी बदल दी. 7 अगस्त 2024 की रात गोली मारकर उनके बेटे रौनक केडिया की हत्या कर दी गयी थी. मंगलवार को अदालत ने इस हत्याकांड में दो दोषियों को आजीवन कारावास और एक को सात वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनायी. फैसला आया, लेकिन बेटे को खो चुके पिता के लिए यह न्याय का अंत नहीं है.

बलराम केडिया कहते हैं, ‘हम अदालत के फैसले का सम्मान करते हैं, लेकिन हमें उम्मीद थी कि बेटे के हत्यारों को फांसी की सजा मिलेगी. इस फैसले के खिलाफ वरीय अदालत में जायेंगे.’

बेटे की मौत के बाद बदल गयी पिता की जिंदगी

रौनक की हत्या के बाद बलराम केडिया ने खुद पर ध्यान देना लगभग छोड़ दिया. उनकी जिंदगी दुकान और पूजा-पाठ तक सिमट गयी. बेटे की मौत का सदमा इतना गहरा रहा कि उनके व्यक्तित्व में भी बड़ा बदलाव दिखने लगा.

जिस पिता की जिंदगी परिवार और कारोबार के इर्द-गिर्द घूमती थी, वह अब अपने बेटे की याद और न्याय की उम्मीद के साथ आगे बढ़ रहे हैं. इन दिनों वे गंभीर बीमारी से भी पीड़ित हैं. दुकान पर बातचीत के दौरान रौनक का जिक्र आते ही वे कई बार भावुक हो उठे.

उनके लिए पिछले दो साल कैलेंडर के दो साल नहीं रहे. वे कहते हैं कि रौनक के जाने के बाद बीता हर पल एक साल से भी ज्यादा लंबा लगा.

‘आठ लाख रुपये के लिए नहीं हुई थी मेरे बेटे की हत्या’

रौनक हत्याकांड की जांच के दौरान पैसों के लेन-देन को हत्या की वजह बताया गया था. पुलिस के अनुसार, रौनक के पिता की ओर से आठ लाख रुपये के लेन-देन के बाद विवाद हुआ था और इसी विवाद के चलते हत्या की साजिश रची गयी. हत्या के लिए दो लाख रुपये की सुपारी तय होने की बात भी पुलिस अनुसंधान में सामने आयी थी.

हालांकि बलराम केडिया इस वजह को पूरी तरह खारिज करते हैं. उनका कहना है कि घटना के करीब 10 दिन बाद आठ लाख रुपये के लेन-देन को हत्या की वजह बताया गया, लेकिन उनके अनुसार इसका कोई साक्ष्य नहीं है.

बलराम केडिया के मुताबिक, जिस व्यक्ति पर भरोसा किया, वह उनके साथ भाई की तरह रहा था. इसी भरोसे को उन्होंने सबसे बड़ा विश्वासघात बताया.

उनका कहना है कि आठ लाख रुपये की रकम के लिए उनके बेटे की हत्या नहीं की गयी थी.

दुकान बंद कर घर लौट रहा था रौनक, रास्ते में घात लगाकर हमला

7 अगस्त 2024 की रात करीब 10 बजे रौनक आत्माराम मेडिकल की दुकान बंद कर काजवलीचक स्थित अपने घर लौट रहा था. रास्ते में पहले से घात लगाए अपराधियों ने उसे बेहद करीब से गोली मारी.

रौनक पर छह गोलियां दागे जाने की बात सामने आयी थी. गोली लगने के बाद वह सड़क पर खून से लथपथ गिर पड़ा और मौके पर ही उसकी मौत हो गयी.

इस घटना का सबसे दर्दनाक पहलू यह रहा कि कुछ देर बाद उसी रास्ते से रौनक के पिता बलराम केडिया भी लौट रहे थे. सड़क पर खून से लथपथ पड़े युवक को देखकर वे रुके. उन्हें क्या पता था कि सड़क पर पड़ा वह युवक उनका अपना बेटा रौनक है.

10 दिन बाद पुलिस ने किया था हत्याकांड का खुलासा

हत्या के बाद तातारपुर थाने में अज्ञात अपराधियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गयी थी. घटना के बाद शहर में हत्यारों की गिरफ्तारी की मांग तेज हो गयी थी.

करीब 10 दिन बाद तत्कालीन एसएसपी आनंद कुमार ने हत्याकांड का खुलासा करने का दावा किया था. पुलिस अनुसंधान में अमित कुमार सिंह उर्फ अमित मंडल, आलोक राज उर्फ दिलखुश और अजीत के नाम सामने आये.

पुलिस के अनुसार, पैसों के लेन-देन को लेकर हुए विवाद के बाद रौनक की हत्या की साजिश रची गयी थी. हत्या के लिए दो लाख रुपये की सुपारी तय होने की बात भी पुलिस ने बतायी थी.

कोर्ट ने दो को उम्रकैद, एक को सात साल की सजा दी

मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने अमित कुमार सिंह उर्फ अमित मंडल और आलोक राज उर्फ दिलखुश को हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनायी. वहीं अजीत को सात वर्ष के सश्रम कारावास की सजा दी गयी.

फैसले के बाद कानूनी रूप से मामले में एक महत्वपूर्ण पड़ाव जरूर आया है, लेकिन बलराम केडिया इससे संतुष्ट नहीं हैं. उनका कहना है कि अदालत के फैसले का वे सम्मान करते हैं, लेकिन अपने बेटे के लिए इससे अधिक कड़ी सजा की उम्मीद थी.

Raunak Kedia Murder Case: पिता की लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई

रौनक की हत्या को दो साल से अधिक समय बीत चुका है. इस दौरान परिवार ने जांच, गिरफ्तारी, सुनवाई और अब सजा तक का लंबा सफर तय किया. लेकिन एक पिता के लिए यह सफर बेटे की कमी को पूरा नहीं कर सकता.

बलराम केडिया का कहना है कि वे फैसले के खिलाफ वरीय अदालत का दरवाजा खटखटायेंगे. उनका लक्ष्य अब भी वही है कि बेटे की हत्या करने वालों को फांसी की सजा मिले.

रौनक अब इस दुनिया में नहीं है. आत्माराम मेडिकल की दुकान आज भी चल रही है, ग्राहक रोज आते हैं और दवाइयां बिकती हैं. लेकिन उस दुकान के संचालक पिता के लिए हर दिन बेटे की याद के साथ शुरू होता है. अदालत का फैसला आया है, मगर उनके लिए न्याय की तलाश अभी जारी है.

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लेखक के बारे में

By ऋषव मिश्रा कृष्णा

ऋषव मिश्रा कृष्णा प्रिंट माध्यम में पिछले 22 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत दैनिक जागरण से की. अभी प्रभात खबर के भागलपुर कार्यालय में काम कर रहे हैं. फिल्म, शिक्षा और गीत लेखन में रुचि रखते हैं.

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