bhagalpur news. कृषि अनुसंधान तभी सफल होगा, जब नवाचार किसानों तक पहुंचे

बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर में विश्व बौद्धिक संपदा दिवस पर निदेशालय अनुसंधान में एक व्यापक एवं उच्च स्तरीय विचार विमर्श सत्र का आयोजन निदेशक अनुसंधान डॉ अनिल कुमार सिंह की अध्यक्षता में की गयी

बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर में विश्व बौद्धिक संपदा दिवस पर निदेशालय अनुसंधान में एक व्यापक एवं उच्च स्तरीय विचार विमर्श सत्र का आयोजन निदेशक अनुसंधान डॉ अनिल कुमार सिंह की अध्यक्षता में की गयी. इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न महाविद्यालयों के प्राचार्य, विभाग अध्यक्ष एवं वैज्ञानिकों ने अपनी उपस्थिति दर्ज की. कार्यक्रम की शुरुआत में यह रेखांकित किया गया कि विश्व बौद्धिक संपदा दिवस 2026 केवल एक कानूनी चर्चा का विषय नहीं है, बल्कि यह कृषि नवाचारों को संरक्षित बौद्धिक संपदा में परिवर्तित कर उन्हें स्वामित्व, मूल्य सृजन, प्रतिस्पर्धात्मक एवं सतत आजीविका से जोड़ने की एक रणनीतिक पहल है. इस विचार विमर्श का केंद्र बिंदु कृषि अनुसंधान एवं नवाचार में पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करना विश्व बौद्धिक संपदा संस्थान के द्वारा निर्धारित वैश्विक थीम के संदर्भ में विशेषज्ञों ने खेल और कृषि के बीच एक प्रभावी समन्वय प्रस्तुत की. दोनों ही क्षेत्र की आधारशिला अनुशासन, सटीकता, नवाचार एवं प्रदर्शन पर टिकी है, जहां बौद्धिक संपदा अधिकार, मान्यता, सुरक्षा एवं प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त सुनिश्चित करते है. खेल में नवाचार प्रदर्शन को सीखना है. कृषि में नवाचार उत्पादकता को बढ़ाता है. दोनों में आइपीआर और प्रयासों को सुरक्षा और मूल्य प्रदान करता है. कार्यक्रम के सत्र में बीएयू सबौर की बौद्धिक संपदा उपलब्धियों का विस्तृत अवलोकन प्रस्तुत किया गया. जिसमें पेटेंट, औद्योगिक डिजाइन, कॉपीराइट, डिजिटल सामग्री डेटाबेस एवं प्रकाशन ट्रेडमार्क तथा भौगोलिक संकेतक जीआई आधारित कृषि उत्पाद शामिल है. विशेषज्ञों ने आइपीआर की संपूर्ण प्रक्रिया को मजबूत करने पर बल दिया. अविष्कार, प्रकटीकरण, पूर्व काला विश्लेषण, उच्च गुणवत्ता, दावा लेखन, त्वरित परीक्षण, लाइसेंसिंग, स्टार्टअप, प्रोत्साहन एवं बाजार से जोड़ने तक इत्यादि विषयों पर विशेष विचार विमर्श किया गया. विश्वविद्यालय ने अपनी उपलब्धियों को साझा करते हुए बताया कि अब तक 23 पेटेंट, 24 कॉपीराइट, एक ट्रेडमार्क तथा पांच जीआइ टैग प्राप्त किया जा चुका है, जो कृषि नवाचार में विश्वविद्यालय की बढ़ती क्षमता को दर्शाती है. डॉ अनिल कुमार सिंह ने कहा कि भविष्य का कृषि अनुसंधान आइपीआर आधारित बाजार उन्मुक्त एवं प्रभाव केंद्रित होना चाहिये, ताकि नवाचार केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित न रहकर किसानों के खेतों तक पहुंच सके. इस अवसर पर कुलपति डॉ दुनिया राम सिंह ने कहा कि कृषि अनुसंधान की वास्तविक शक्ति तभी सामने आती है जब नवाचार को स्वामित्व मूल्य और प्रभाव में बदल जाये. एक मजबूत आइपीआर पारिस्थितिकी तंत्र ना केवल नवाचारों की सुरक्षा करेगा बल्कि प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, कृषि उद्यमिता को बढ़ावा देगा और किसानों तक आर्थिक लाभ सुनिश्चित करेगा. संचालन डॉ मुकेश कुमार एवं डॉ चंदा कुशवाहा ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया.

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Published by: Atul kumar

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