दिगंबर जैन सिद्धक्षेत्र में चातुर्मास शुरू, 8 नवंबर तक अभिषेक, धर्मचर्चा व आध्यात्मिक अनुष्ठानों की रहेगी शृंखला

Chaturmas 2026 : भागलपुर के चंपापुर दिगंबर जैन सिद्धक्षेत्र में चातुर्मास का शुभारंभ हुआ. भगवान वासुपूज्य का अभिषेक और विशेष पूजा के साथ कई धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए.

Chaturmas 2026 : नाथनगर स्थित श्री चंपापुर दिगंबर जैन सिद्धक्षेत्र में चातुर्मास के अवसर पर 28 जुलाई से शुरू हुई विशेष धार्मिक पूजा-अर्चना का क्रम 8 नवंबर तक चलेगा. बुधवार को भगवान वासुपूज्य की पद्मासन मुद्रा में विराजमान मूंगा रंग की प्रतिमा का स्वर्ण एवं रजत कलश से भव्य अभिषेक किया गया. श्रद्धालुओं ने पूरे विधि-विधान और श्रद्धा के साथ पूजन कर आध्यात्मिक सुख एवं शांति की कामना की.

श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गईं

चातुर्मास के दौरान सिद्धक्षेत्र में आने वाले श्रद्धालुओं के स्वागत के साथ उनके ठहरने और भोजन की समुचित व्यवस्था की गई है. सिद्धक्षेत्र के मंत्री सुनील जैन ने बताया कि श्रद्धालुओं के लिए उत्तम आवास, भोजनशाला, पूजा सामग्री और अष्टमंगल द्रव्य की पर्याप्त व्यवस्था की गई है, ताकि सभी धार्मिक अनुष्ठान सुचारु रूप से संपन्न हो सकें.

चातुर्मास में होंगे कई प्रमुख धार्मिक आयोजन

चातुर्मास 28 जुलाई से 8 नवंबर 2026 तक चलेगा. इस दौरान 16 सितंबर से दस लक्षण महापर्व मनाया जाएगा, जबकि 25 सितंबर को भगवान वासुपूज्य निर्वाण महोत्सव आयोजित होगा. इन अवसरों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है.

आर्यिका माताओं के सान्निध्य में होगा आध्यात्मिक लाभ

चातुर्मास के दौरान पूज्य आर्यिका पुराणमती माताजी एवं आर्यिका दिव्यमती माताजी का सान्निध्य श्रद्धालुओं को प्राप्त होगा. चार माह तक धर्मचर्चा, भक्ति संध्या, विशेष विधान, सामूहिक आरती, मंत्र आराधना, शांतिधारा और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाएगा. श्रद्धालुओं से परिवार सहित इन आयोजनों में भाग लेने की अपील की गई है.

चातुर्मास आत्मशुद्धि और संयम का पर्व

सिद्धक्षेत्र के मंत्री सुनील जैन ने कहा कि चातुर्मास जीवन परिवर्तन और आत्मशुद्धि की साधना का श्रेष्ठ अवसर है. वहीं महाराष्ट्र के कोल्हापुर से आए पंडित रत्नेश ने अपने प्रवचन में कहा कि समय का सदुपयोग व्यक्ति को श्रेष्ठ बनाता है. उन्होंने सत्य, विनम्रता, अनुशासन और सदाचार को जीवन का आधार बताते हुए कहा कि लोभ और असत्य मनुष्य की विश्वसनीयता को समाप्त कर देते हैं.

आहार-शुद्धि और तप का विशेष महत्व

जैन धर्म में चातुर्मास को संयम, तप, उपवास और सात्विक जीवनशैली का विशेष काल माना जाता है. वर्षा ऋतु में स्वास्थ्य और पाचन क्षमता को ध्यान में रखते हुए शुद्ध भोजन, अल्पाहार और व्रत का विशेष महत्व बताया गया है. धार्मिक मान्यता के अनुसार यह अवधि आध्यात्मिक उन्नति के साथ-साथ शारीरिक और मानसिक शुद्धि का भी श्रेष्ठ समय मानी जाती है.


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लेखक के बारे में

By दीपक कुमार राव

दीपक कुमार राव प्रिंट माध्यम में 18 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 3 वर्षों से एक्टिव हैं. प्रभात खबर के भागलपुर कार्यालय में काम कर रहे हैं. देश और राज्य की राजनीति, कला-संस्कृति व सामाजिक कार्य में रुचि रखते हैं.

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