गोराडीह प्रखंड के उस्तु गांव में आयोजित शिवपुराण कथा सप्ताह के पांचवें दिन पार्वती जन्म का पावन प्रसंग सुनाया गया. कथा व्यास श्री हरि ओम जी महाराज ने भक्तों को वह मार्मिक प्रसंग सुनाया, जब राजा दक्ष द्वारा भगवान शिव के अपमान को सहन न कर पाने के कारण माता सती ने यज्ञ अग्नि में अपने शरीर का त्याग कर दिया था. कथा वाचन के दौरान महाराज जी ने बताया कि अग्नि में भस्म होते समय माता सती ने संकल्प लिया था कि वे अगले जन्म में पार्वती के रूप में जन्म लेकर पुनः भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करेंगी. उसी संकल्प के फलस्वरूप अगले जन्म में हिमाचल के घर पार्वती के रूप में उनका अवतार हुआ. सम्पूर्ण प्रसंग का आकर्षक झांकी मंचन उस्तु गांव की आंचल, शोभा, सुमन, पूजा व रेखा ने किया. भावपूर्ण अभिनय को देखकर कथा पंडाल में उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे और दोनों हाथ उठाकर “ॐ पार्वती पतये नमः, हर-हर महादेव” का जयघोष करने लगे. कथा सुनने के लिए आसपास के गांवों के साथ-साथ दूरदराज से भी श्रद्धालु नियमित रूप से पहुंच रहे हैं. ग्रामीणों ने बताया कि इस आध्यात्मिक आयोजन से गांव में भक्ति और उत्साह का वातावरण बना हुआ है. कार्यक्रम की व्यवस्था में उस्तु गांव की मां शारदा सेवा समिति के सदस्य दयानंद मंडल, अमित मंडल, रामस्वरूप कुमार, प्रिंस कुमार, सन्नी कुमार, आनंद कुमार सहित अन्य ग्रामीण कथा परिसर एवं आसपास की साफ-सफाई और सजावट में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं. कथा स्थल श्री शक्तिनाथ धाम के निर्माता स्वर्गीय जमुना गुप्ता के परिवार के सदस्य भी विभिन्न स्थानों से नियमित रूप से कथा श्रवण के लिए पहुंच रहे हैं.
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