भागलपुर : तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (टीएमबीयू) ने राजकीय डिग्री महाविद्यालयों में संविदा पर सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति के बाद विभिन्न संस्थानों में प्रतिनियुक्त शिक्षकों को उनके मूल संस्थान में वापस भेजने का निर्णय लिया है. प्रभारी कुलपति के आदेश पर कुलसचिव प्रो. रामाशीष पूर्व ने इस संबंध में अधिसूचना जारी की है.
अधिसूचना के अनुसार, संबंधित विषय में संविदा सहायक प्राध्यापक के योगदान देकर जिम्मेदारी संभालने की तिथि से उस स्थान पर पहले से प्रतिनियुक्त शिक्षक प्रतिनियुक्ति स्थल से विरमित माने जायेंगे. इसके बाद प्रतिनियुक्त शिक्षकों को अपने मूल संस्थान में योगदान देना होगा.
प्रतिनियुक्त शिक्षकों को मूल संस्थान भेजने का निर्देश
विश्वविद्यालय प्रशासन ने पूर्व में विभिन्न संस्थानों में प्रतिनियुक्त किये गये शिक्षकों को उनके मूल संस्थान में वापस भेजने का निर्देश दिया है. प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि संबंधित विषय के संविदा सहायक प्राध्यापक के योगदान देते ही उस स्थान पर प्रतिनियुक्त शिक्षक की प्रतिनियुक्ति स्वतः समाप्त हो जायेगी.
भागलपुर और बांका के कॉलेजों को भेजी अधिसूचना
विश्वविद्यालय प्रशासन ने अधिसूचना की प्रति भागलपुर और बांका जिले के राजकीय डिग्री महाविद्यालयों के प्राचार्य, पीजी विभागाध्यक्ष, संबंधित महाविद्यालयों के प्राचार्य, दोनों जिलों के जिलाधिकारी तथा विश्वविद्यालय के सभी संबंधित पदाधिकारियों और अधिकारियों को भेजी है. साथ ही यूडीसीए निदेशक को अधिसूचना विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर अपलोड करने का निर्देश दिया गया है.
छह विषयों में 109 संविदा सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति
टीएमबीयू के अंतर्गत राजकीय डिग्री महाविद्यालयों में छह विषयों के कुल 109 संविदा सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति और पदस्थापन किया गया है. बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग की अनुशंसा और महाविद्यालयों के आवंटन के आधार पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति संबंधी अधिसूचना जारी की है.
विषयवार देखें तो अंग्रेजी में 17, हिंदी में 17, समाजशास्त्र में 19, इतिहास में 18, राजनीति विज्ञान में 19 और अर्थशास्त्र में 19 अभ्यर्थियों की नियुक्ति की गयी है. चयनित अभ्यर्थियों को अधिसूचना जारी होने की तिथि से सात दिनों के भीतर संबंधित राजकीय डिग्री महाविद्यालय के प्राचार्य या प्रभारी प्राचार्य के समक्ष योगदान देने का निर्देश दिया गया है.
विश्वविद्यालय प्रशासन ने बताया कि नियुक्तियां सिंडिकेट की स्वीकृति के प्रत्याशा में की गयी हैं. संविदा सहायक प्राध्यापकों के योगदान के बाद संबंधित संस्थानों में शिक्षण व्यवस्था को और व्यवस्थित करने की उम्मीद है.
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