भागलपुर जिले में बाढ़ का पानी उतरने के बाद अब जलजमाव, कीचड़ और गंदगी ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है. कई इलाकों में जमा पानी और आसपास की गंदगी के कारण मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है. ऐसे में लोगों को डेंगू, मलेरिया और अन्य मच्छरजनित बीमारियों का डर सताने लगा है. जिले में पहले से डेंगू के मामले सामने आने के बीच जलजमाव वाले क्षेत्रों में लोगों की चिंता और बढ़ गयी है.
13 प्रखंडों में लाखों लोग जलजमाव से प्रभावित
बाढ़ के कारण जिले के 13 प्रखंडों के सैकड़ों गांव प्रभावित हुए थे. इन इलाकों में पानी उतरने के बाद जगह-जगह कीचड़ और गंदगी जमा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि मच्छरों की संख्या इतनी बढ़ गयी है कि दिन में भी मच्छरदानी या मच्छर भगाने वाली सामग्री का इस्तेमाल करना पड़ रहा है.
बाढ़ और जलजमाव से करीब 9.50 लाख से अधिक आबादी प्रभावित होने की बात कही गयी है. स्थानीय लोगों के अनुसार, कई क्षेत्रों में मच्छरों के साथ वायरल बुखार और एलर्जी जैसी स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां भी सामने आ रही हैं.
शहर से सटे मोहल्लों में भी जलजमाव की परेशानी
शहर से सटे कई गांव और मोहल्लों में जलजमाव की समस्या बनी हुई है. स्थानीय लोगों के अनुसार, इन इलाकों का पानी गंगा में जाता है, लेकिन कई जगह नाले और जलनिकासी के रास्ते संकरे होने के कारण पानी की निकासी प्रभावित है.
साहेबगंज साकम, अलीगंज स्पिनिंग मिल परिसर, महेशपुर, आनंदबाग, मानिक सरकार घाट रोड, आदमपुर बैंक कॉलोनी, सीएमएस स्कूल मैदान, दीपनगर झुग्गी बस्ती, कस्बा गोलाघाट, सखीचंद घाट और मोहनपुर समेत कई इलाकों में जलजमाव की समस्या बतायी गयी है.
वहीं, शंकरपुर दियारा, दारापुर, श्रीरामपुर, दिलदारपुर, चवनिया दियारा, रजंदीपुर, बाबूपुर, घोघा, गोसाईदासपुर और दोगच्छी समेत बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में भी पानी और गंदगी के कारण लोगों की परेशानी बनी हुई है.
लोगों ने बताया, दिन में भी मच्छरों से राहत नहीं
मोहनपुर निवासी मुकेश कुमार ने बताया कि मच्छरों से बचने के लिए लोग भूसा जलाकर धुआं कर रहे हैं. उनका कहना है कि मच्छरों का प्रकोप इतना बढ़ गया है कि काटने वाली जगह पर सूजन हो जा रही है.
भवनाथपुर के मुनचुन मंडल ने बताया कि मच्छर भगाने के लिए गोयठे का धुआं किया जाता है. उन्होंने कहा कि बाढ़ में घर-बार प्रभावित होने के बाद मच्छरों से बचाव के लिए अलग से इंतजाम करना मुश्किल हो रहा है.
आदमपुर घाट निवासी राकेश कुमार सिंह ने बताया कि दिन में भी बड़ी संख्या में मच्छर दिखाई दे रहे हैं. उनका कहना है कि बाढ़ के बाद मच्छरों की संख्या इतनी बढ़ गयी है कि केवल धुआं करने से भी राहत नहीं मिल रही है.
बाढ़ के बाद स्वास्थ्य संबंधी चिंता बढ़ी
स्थानीय लोगों के बीच मच्छरजनित बीमारियों को लेकर चिंता बढ़ गयी है. बाढ़ प्रभावित इलाकों में लंबे समय तक जलजमाव रहने के कारण साफ-सफाई और जलनिकासी की चुनौती भी बनी हुई है. लोगों ने जलजमाव वाले क्षेत्रों में सफाई, जलनिकासी और मच्छर नियंत्रण के प्रभावी उपाय करने की मांग की है.
