Bhagalpur news सुलतानगंज स्टेशन पर तीसरे फुट ओवरब्रिज का निर्माण शुरू

सुलतानगंज रेलवे स्टेशन पर लंबे इंतजार के बाद तीसरे रेल ऊपरी पैदल पुल (एफओबी) का निर्माण कार्य रफ्तार पकड़ने जा रहा है

सुलतानगंज रेलवे स्टेशन पर लंबे इंतजार के बाद तीसरे रेल ऊपरी पैदल पुल (एफओबी) का निर्माण कार्य रफ्तार पकड़ने जा रहा है. सावन मेंं कार्य रोक दिया गया था, लेकिन गुरुवार को रेल अधिकारियों ने अमृत भारत योजना के तहत काम शुरू करने का निर्देश दिया. नया पुल यात्रियों के लिए सुविधा, सुरक्षा और सुगम आवाजाही तीनों मोर्चों पर बड़ा बदलाव लाने वाला है.

12 करोड़ से चार माह में तैयार होगा नया एफओबी

करीब 12 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह तीसरा एफओबी पुराने दोनों पुलों से कहीं अधिक चौड़ा होगा. निर्माण एजेंसी को चार महीने में पुल तैयार करने का लक्ष्य दिया गया है. पुल निर्माण का कॉलम/स्ट्रक्चर स्टेशन पर आ चुका है और एक सप्ताह में इसे खड़ा करने का निर्देश दिया गया है.

12 मीटर चौड़ा पुल, आधुनिक व उपयोगी

नया फुट ओवरब्रिज 12 मीटर चौड़ा होगा, जबकि पहले के दो एफओबी क्षमता के अनुसार कम चौड़े थे. इससे प्लेटफॉर्म पर भीड़ प्रबंधन में आसानी होगी. पुल का विस्तार प्लेटफॉर्म संख्या एक से पांच तक होगा. यात्रियों को प्लेटफॉर्म बदलने में समय व परेशानी दोनों कम होगी.

स्टेशन पर कुल पांच लिफ्ट की सुविधा

प्लेटफॉर्म एक, दो और चार पर ऊपरी पुल से जुड़ी तीन नयी लिफ्ट लगायी जायेगी. पूर्व से दो लिफ्ट है. स्टेशन पर कुल पांच लिफ्ट यात्रियों को मिलेगी. बुजुर्ग, दिव्यांग और महिलाओं की यात्रा काफी सुगम होगी.

गति शक्ति यूनिट के चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर ने दिया सख्त निर्देश

मालदा से पहुंचे गति शक्ति यूनिट के चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर राजेश रंजन ने गुरुवार को स्टेशन पर निरीक्षण कर एफओबी निर्माण को जल्द शुरू करने का निर्देश दिया. पुल का निर्माण मार्च 2026 तक पूर्ण करने का लक्ष्य है. शुक्रवार को पीसीसीएम भी स्टेशन का निरीक्षण करेंगे, जिसकी तैयारी पूरी कर ली गयी है.

पटरी पार करने की समस्या खत्म, सुरक्षा में बड़ा सुधार

स्टेशन पर यात्रियों को प्लेटफॉर्म दो और चार पर जाने के लिए पुराने एफओबी की दूरी व भीड़ से कई बार पटरी पार करनी पड़ती थी, जो दुर्घटना का कारण बनती थी. नया एफओबी स्टेशन के बीचोंबीच बनाया जा रहा है, जिससे यात्रियों को किसी भी प्लेटफॉर्म पर पहुंचना सरल होगा. पटरी पार करने की बाध्यता समाप्त होगी. दुर्घटनाओं की आशंका खत्म होगी. श्रावणी मेला में कावंरियों का दबाव भी संभाला जा सकेगा.

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Published by: Jitendra tomar

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