bhagalpur news. आध्यात्मिक शुद्धि व धर्म स्थापना का महीना चैत

वसंत का महीना अपने आप में पूर्ण है, लेकिन वासंतिक नवरात्र इसकी महत्ता को और भी बढ़ा देता है

ऋषि कांत मिश्र, कहलगांव वसंत का महीना अपने आप में पूर्ण है, लेकिन वासंतिक नवरात्र इसकी महत्ता को और भी बढ़ा देता है. वसंत ऋतु प्रकृति के नवीनीकरण और आध्यात्मिक शुद्धि का समय है, जिसमें माता शक्ति की वंदना और अर्चना के साथ-साथ भगवान राम की पूजा की जाती है. वासंतिक नवरात्र का आरंभ त्रेतायुग में भगवान राम द्वारा लंका पर विजय प्राप्त करने और धर्म की स्थापना के उद्देश्य से हुआ था. एलसीटी घाट निवासी साहित्यवाचस्पति आचार्य रामजी मिश्र रंजन के मुताबिक इस नवरात्र का मुख्य उद्देश्य समाज को आध्यात्मिक, मानसिक और शारीरिक रूप से सशक्त करना है, जिससे प्रकृति में नई सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो सके. साथ ही जनमानस का कल्याण हो. वासंतिक छठ में भगवान भास्कर की आराधना की जाती है, जो आत्मशुद्धि और प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाने का महापर्व है. महाभारत काल में पांडवों की दुर्दशा देखकर द्रौपदी ने भगवान भास्कर की उपासना की, जिससे उन्हें शारीरिक आरोग्यता और सुखों की प्राप्ति हुई. वासंतिक नवरात्र और छठ के अवसर पर कई कथाएं प्रचलित हैं. नवरात्र के नवें दिन भगवान राम का प्राकट्य दिवस मनाया जाता है, जिसमें राम की पूजा के साथ हनुमान जी की पूजा भी की जाती है. जिस प्रकार माता महिसुर का बधकर अच्छाई की जीत स्थापित करती है, उसी प्रकार राम ने रावणरुपी अधर्म का नाशकर रामराज्य रुपी धर्म को स्थापित किया. श्रीराम त्याग धर्म और निःस्वार्थ प्रेम के प्रतिक पूजा का मुख्य उद्देश्य ईश्वर के प्रति निष्ठावान हो, भक्ति को सुदृढ करना तथा नैतिक विधि-विधान को बढ़ावा मूल्य देना है. रामलला के प्राकट्य दिवस को भारतीय रामनवमी के रूप में मनाते हैं. जिसमें राम के पूजन के साथ हनुमंत लाल को उनके स्वामी के प्रति अटूट भक्ति और प्रभु का दिया वरदान है. क्योंकि राम ने कहा है कि जो भी मेरी पूजा के साथ हनुमंत लाल की पूजा नहीं करेगा, उसकी पूजा पूर्ण नही होगी. इसलिए राम भक्ति की मर्यादा और अनन्य भक्ति के ही कारण हनुमानी झंडा देकर ध्वजारोहण कर भगवान के लोग कृपा पा सकते हैं. हनुमान जी के पूजन से शक्ति और समर्पण की भावना प्रबल होती है. दूसरे पक्ष की ओर दृष्टिगत होते हैं तो हम पाते हैं की हनुमंत लाल के हृदय में स्वयं सीताराम वास करते हैं. सिर्फ हनुमंत लाल की पूजन मात्र से शक्ति ऊर्जा धर्म तीनों की पूजन हो जाती है. श्रीराम त्याग धर्म और निःस्वार्थ प्रेम के कारण युगों-युगों तक वन्दनीय और अनुकरणीय है. उनका जीवन धैर्य, कर्तव्यपरायणता, त्याग और मर्यादा का सर्वोच्च आदर्श है.

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Author: ATUL KUMAR

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