नहाय-खाय के साथ रविवार को चैत्र माह में लोक आस्था का महापर्व छठ शुरू हो जायेगा. इसे लेकर शहर के प्रमुख तटों बरारी पुल घाट, सीढ़ी घाट आदि पर जिले के अलावा आसपास जिले के श्रद्धालु अर्घ देंगे. नहाय खाय के दिन रविवार को सभी व्रती कद्दू-भात को सात्विक ढंग से तैयार कर ग्रहण करेंगे. पास-पड़ोस के लोगों को भी प्रसाद के रूप में वितरण करेंगे. खरना पर व्रती रखेगी उपवास सोमवार को सभी व्रती प्रसाद तैयार के लिए गेहूं धोकर धूप में सुखायेगी और उखली में खुद ही कूटेगी और पीसेगी. खरना को लेकर व्रती उपवास रखेंगी और शाम को खीर-पूड़ी व फल का भोग भगवान सूर्य को लगायेंगी. इसके बाद व्रती भोजन ग्रहण करेगी और प्रसाद का वितरण करेगी. मंगलवार को भगवान सूर्य को सायं कालीन अर्घ अर्पित किया जायेगा. इस दिन व्रती दिनभर उपवास रखेगी और शाम को पानी में खड़े होकर अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ देगी. फिर दूसरे दिन बुधवार को उजाला होने से पहले ही व्रती व श्रद्धालु गंगा तट, पोखर-तालाब के पास पहुंच जायेंगे और उदीयमान सूर्य को अर्घ देंगे. इसके बाद छठ पर्व का समापन हो जायेगा.
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नहाय-खाय के साथ रविवार को चैत्र माह में लोक आस्था का महापर्व छठ शुरू हो जायेगा.
