गोपालपुर : गंगा और कोसी के बढ़ते जलस्तर के बीच ब्रह्मोत्तर बांध पर बाढ़ और कटाव का खतरा बढ़ गया है. इसी बीच पूर्व सांसद अनिल कुमार यादव ने ब्रह्मोत्तर बांध का निरीक्षण कर इसकी वर्तमान स्थिति और आसपास के क्षेत्रों में बाढ़ के खतरे का जायजा लिया. उन्होंने कहा कि ब्रह्मोत्तर बांध सिर्फ एक तटबंध नहीं, बल्कि हजारों लोगों की सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक बांध है.
पूर्व सांसद ने कहा कि वर्षों से स्थानीय मुखिया, पंचायत प्रतिनिधि और ग्रामीण अपने स्तर पर बांध के संरक्षण और मजबूती के लिए प्रयास करते रहे हैं. लेकिन बांध की स्थायी मजबूती और दीर्घकालिक सुरक्षा के लिए जिस स्तर पर काम होना चाहिए, वह अब भी जरूरी है.
गंगा-कोसी का जलस्तर बढ़ते ही बढ़ जाता है खतरा
अनिल यादव ने कहा कि जब गंगा और कोसी का जलस्तर बढ़ता है तो ब्रह्मोत्तर बांध पर दबाव बढ़ जाता है. ऐसे में हर साल बाढ़ के बाद प्रशासन के सक्रिय होने और कटाव के बाद मरम्मत शुरू करने की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए उन्होंने स्थायी समाधान की जरूरत बतायी.
उन्होंने कहा कि जब खतरा हर वर्ष सामने आता है तो बांध को खतरे से पहले मजबूत करने की स्थायी व्यवस्था क्यों नहीं की जाती. उनका कहना है कि आपदा आने के बाद राहत और बचाव जरूरी है, लेकिन उससे ज्यादा महत्वपूर्ण आपदा से पहले तैयारी करना है.
तकनीकी सर्वे कर कमजोर हिस्सों को चिह्नित करने की मांग
ब्रह्मोत्तर बांध को लेकर पूर्व सांसद की प्रमुख मांगें
- पूरे बांध का तकनीकी सर्वेक्षण कराया जाए.
- कमजोर हिस्सों को चिह्नित किया जाए.
- वैज्ञानिक तरीके से स्थायी सुदृढ़ीकरण कराया जाए.
- बाढ़ से पहले सुरक्षा कार्य पूरा किया जाए.
- दीर्घकालिक संरक्षण के लिए ठोस कार्ययोजना बने.
- बांध की सुरक्षा को सरकार और संबंधित विभाग प्राथमिकता दें.
पूर्व सांसद ने कहा कि वर्ष 2002 के बाद इस ऐतिहासिक बांध की स्थिति और उसके दीर्घकालिक संरक्षण को लेकर जिस स्तर की गंभीरता और पहल होनी चाहिए थी, वह जमीन पर दिखाई नहीं देती. अब पूरे बांध की तकनीकी स्थिति का आकलन कर कमजोर हिस्सों को मजबूत करने की जरूरत है.
'हर साल खतरे का इंतजार नहीं, स्थायी समाधान चाहिए'
अनिल यादव ने कहा कि ब्रह्मोत्तर बांध की सुरक्षा किसी एक गांव का मामला नहीं है. इससे क्षेत्र के किसानों, ग्रामीणों और हजारों परिवारों की सुरक्षा जुड़ी हुई है.
उन्होंने सरकार और संबंधित विभाग से बांध की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए तत्काल ठोस कार्ययोजना बनाने की मांग की. उनका कहना है कि जनता को हर साल बाढ़ और कटाव के खतरे का इंतजार करने के बजाय स्थायी सुरक्षा और समाधान चाहिए.
