Bhagalpur News. 15 साल बाद भी नहीं लगा गोपाल सिंह नेपाली पथ का बोर्ड या शिलापट्ट

15 साल बाद गोपाल सिंह नेपाली के नाम का बोर्ड या शिलापट्ट नहीं लगा.

-मशहूर गीतकार गोपाल सिंह नेपाली की पुण्यतिथि आज

मशहूर गीतकार गोपाल सिंह नेपाली का भागलपुर से गहरा जुड़ाव रहा है. ऐसे में भागलपुर नगर निगम की स्टैंडिंग कमेटी- सशक्त स्थाई समिति ने स्थानीय स्टेशन चौक से बड़ी बाटा होते हुए दुग्धेश्वरनाथ (वेरायटी) चौक तक एक बेनाम सड़क का नाम सर्वसम्मति से गोपाल सिंह नेपाली पथ करने का प्रस्ताव पारित किया था. विडंबना है कि 15 साल बीत जाने के बाद भी अब तक आमलोगों की जानकारी के लिए न कोई बोर्ड लगा और न ही कोई शिलापट्ट.लघु कथाकार पारस कुंज ने बताया कि शब्दयात्रा भागलपुर के भगीरथ प्रयास से 28 अप्रैल 2010 को तत्कालीन महापौर डॉ वीणा यादव एवं नगर आयुक्त रामाशीष पासवान के संयुक्त हस्ताक्षर 13 मई 2010 को पत्र निर्गत हुआ. बार-बार पत्राचार करने के बाद भी अब तक सड़क पर इस नाम का बोर्ड नहीं लग सका है. गोपाल सिंह नेपाली आंदोलन के राष्ट्रीय प्रणेता पारस कुंज ने बताया कि 11 अगस्त 2005 को पहला पत्र लिखा था एवं उनके नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल तत्कालीन प्रमंडलायुक्त अजय नायक से मिलकर उक्त ज्ञापन सौंपा था. उन्होंने बताया कि गोपाल सिंह नेपाली वीर रस के क्रांतिकारी कवि थे.

बरारी श्मशान घाट में हुआ था नेपाली का दाह संस्कार

मारवाड़ी पाठशाला मैदान में 60 साल से लगातार होली की पूर्व संध्या पर होने वाली मित्र वसंत गोष्ठी अखिल भारतीय कवि सम्मेलन गोपाल सिंह नेपाली की देन है. भागलपुर से नेपाली की कई यादें जुड़ी हैं.पारस कुंज ने बताया कि 17 अप्रैल 1963 की सुबह, चीनी आक्रमण के खिलाफ अपनी क्रांतिकारी-देशभक्ति कविताओं के माध्यम से समस्त-भारत में घूम-घूमकर सीमा पर लड़ रही हमारी सेना और आमजन को जगाते-जगाते एकचारी से भागलपुर आते समय ट्रेन में गोपाल सिंह नेपाली ने आखिरी सांस ली थी.भागलपुर जंक्शन पर पार्थिव शरीर को उतारा गया और अगले दिन 18 अप्रैल को पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ बरारी श्मशान घाट पर उनकी अंत्येष्टि हुई. उनका जन्म 11 अगस्त 1911 को बेतिया में हुआ था.

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Published by: Kali kinker mishra

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