भागलपुर जिले के खरीक प्रखंड स्थित बिहार सरकार के ऊर्जा मंत्री शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल के पैतृक गांव राघोपुर में करोड़ों की लागत से बना तटबंध अचानक ध्वस्त हो गया है. गंगा नदी के उफान से बाढ़ का पानी सीधे रिहायशी इलाकों और खुद ऊर्जा मंत्री के आईबी (Inspection Bungalow) में प्रवेश कर गया है. जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि से जहां एक ओर जाह्नवी चौक-राघोपुर-लत्तीपुर मुख्य सड़क पर बने स्लूईस गेट पर भारी दबाव बन गया है, वहीं इस घटना ने पिछले तीन दशक से बांध मरम्मत के नाम पर खर्च किए गए अरबों रुपयों और जल संसाधन विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
मंत्री की हिदायत बेअसर, 24 घंटे बाद ही दरका तटबंध
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि बीते 22 अगस्त को ही ऊर्जा मंत्री बुलो मंडल ने अपने प्रवास के दौरान राघोपुर तटबंध का सघन निरीक्षण किया था.
- दी थी सख्त चेतावनी: निरीक्षण के दौरान मंत्री ने जल संसाधन विभाग के अधिकारियों और अभियंताओं को हर हाल में तटबंध बचाने की हिदायत देते हुए कहा था कि यदि बांध टूटा, तो जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई होगी.
- चेतावनी के बावजूद तबाही: मंत्री की इस सख्त हिदायत के बावजूद तटबंध ध्वस्त हो गया और विडंबना यह रही कि बाढ़ का पानी सीधे मंत्री के ही आईबी में जा घुसा, जिससे मौके पर अफरातफरी मच गई.
रिहायशी इलाकों में घुसा पानी, परवल की फसलें बर्बाद
तटबंध टूटने से गांव की सड़कों पर आवागमन पूरी तरह से अवरुद्ध हो गया है. गंगा का पानी तेजी से रिहायशी इलाकों की ओर फैल रहा है:
- खेती चौपट: बाढ़ के पानी के कारण राघोपुर और आसपास के क्षेत्रों में सैकड़ों बीघे में लगी परवल की फसल पूरी तरह तबाह हो गई है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है.
- डेढ़ लाख की आबादी पर खतरा: यदि जलस्तर बढ़ने का सिलसिला यूं ही जारी रहा, तो राघोपुर सहित आसपास की करीब डेढ़ लाख की आबादी पूरी तरह जलमग्न हो सकती है.
'घटिया काम की शिकायत की गई थी अनसुनी'
ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों में जल संसाधन विभाग और संवेदकों (ठेकेदारों) के खिलाफ भारी आक्रोश है. प्रबुद्ध समाजसेवियों, पूर्व मुखिया प्रतिनिधि छोटेलाल मंडल, वाल्मीकि मंडल, सरपंच प्रमोद मंडल, जिप सदस्य प्रतिनिधि विजय मंडल और अर्जुन साह ने आरोप लगाया है:
- भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा निर्माण: चालू वित्तीय वर्ष में लाखों की लागत से हुए एंटी-इरोजन (कटाव निरोधी) कार्य में भारी अनियमितता बरती गई.
- पहले ही दी थी चेतावनी: ग्रामीणों ने ठेकेदार की भ्रष्ट कार्यशैली की शिकायत मंत्री और प्रशासन से की थी और उच्च स्तरीय जांच की मांग की थी, लेकिन अभियंताओं और ठेकेदार की मिलीभगत से इसे अनसुना कर दिया गया. ग्रामीणों का कहना है कि उसी बंदरबांट का खामियाजा आज पूरा राघोपुर भुगत रहा है.
अधिकारी कर रहे कैंप, बन रहा रिंग बांध
तटबंध टूटने के बाद स्थानीय प्रशासन और अंचलाधिकारी (CO) प्रवीण कुमार वत्स लगातार मौके पर कैंप कर स्थिति को नियंत्रित करने में जुटे हैं.
वहीं, इस पूरी लापरवाही पर चुप्पी साधे हुए जल संसाधन विभाग की ओर से कार्यपालक अभियंता गौतम कुमार ने सफाई देते हुए कहा, "तटबंध स्थल के पीछे से रिंग बांध बनाने और कटाव रोकने के लिए हम लोग युद्ध स्तर पर बचाव कार्य कर रहे हैं. स्थिति को जल्द से जल्द नियंत्रित करने का प्रयास लगातार जारी है."
