Bhagalpur Talent Story : भागलपुर के आदमपुर निवासी सूर्य प्रताप सिंह ने भारत की कठिन परीक्षाओं में शामिल आइआइटी की मास्टर्स डिग्री आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड मशीन लर्निंग में 97.5 प्रतिशत अंक हासिल कर सफलता का नया मुकाम बनाया है. इस उपलब्धि के बाद उनका चयन पुणे में ग्लोबल एआइ विशेषज्ञ के रूप में हुआ है. उनकी सफलता से परिवार, शहर और क्षेत्र में खुशी का माहौल है.
IIT कानपुर से पूरी की AI और मशीन लर्निंग की पढ़ाई
सूर्य प्रताप सिंह ने वर्ष 2024 में टॉप रैंकिंग के साथ सफलता हासिल कर आइआइटी कानपुर में प्रवेश पाया था. उन्होंने यहां से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड मशीन लर्निंग में मास्टर्स डिग्री पूरी की और 97.5 प्रतिशत अंक प्राप्त किए. इसके बाद उन्हें पुणे में ग्लोबल एआइ विशेषज्ञ के तौर पर नई जिम्मेदारी मिली है.
सूर्य प्रताप मूल रूप से सहरसा जिले के पंचगछिया के रहने वाले हैं. वर्तमान में वह भागलपुर के आदमपुर सीसी मुखर्जी लेन निवासी सेवानिवृत्त व्याख्याता डॉ. जीपी सिंह "आनंद" और नीलू सिंह के पुत्र हैं.
पुणे में नौकरी के साथ जारी रखी पढ़ाई
सूर्य प्रताप के पिता डॉ. जीपी सिंह ने बताया कि बेटे ने आत्मनिर्भरता को सफलता का मूल मंत्र बनाया. पुणे में विप्रो कंपनी में प्रोजेक्ट लीड के पद पर कार्य करते हुए उन्होंने आइआइटी मास्टर्स डिग्री की पढ़ाई पूरी की. इस दौरान उनकी पत्नी ई. माधवी सिंह का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा, जो मल्टीनेशनल सॉफ्टवेयर कंपनी एक्सेंचर में टीम लीड के पद पर कार्यरत हैं.
नौवीं कक्षा में बनाई थी डिजिटल वोटिंग मशीन
सूर्य प्रताप की प्रतिभा बचपन से ही अलग रही है. वर्ष 2006 में सेंट एंड्रयूज स्कूल, भागलपुर में नौवीं कक्षा के छात्र रहते हुए उन्होंने डिजिटल वोटिंग मशीन विकसित की थी. मतदान में गड़बड़ी की खबरों से प्रेरित होकर उन्होंने शोध किया और कम लागत वाली डिजिटल वोटिंग मशीन तैयार की.
इस उपलब्धि पर तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने उन्हें शुभकामनाएं भेजी थीं. इसके बाद इस प्रोजेक्ट की जानकारी राष्ट्रीय खोज संस्थान अहमदाबाद और मुख्य निर्वाचन आयुक्त कार्यालय दिल्ली को भी उपलब्ध कराई गई थी. सूर्य प्रताप ने इस मशीन की अनुमानित लागत केवल 6,500 रुपये बताई थी.
NASA प्रतियोगिता में भी हासिल कर चुके हैं विश्व स्तर की सफलता
सूर्य प्रताप ने वर्ष 2009 में नासा अमेरिका की ओर से आयोजित "मार्सक्वेस्ट एक्सप्लोरिंग द रेड प्लेनेट प्रतियोगिता" में विश्व स्तर पर प्रथम स्थान हासिल किया था. उस समय वह कंप्यूटर इंजीनियरिंग के छात्र थे.
इसके अलावा उन्होंने आइआइटी गुवाहाटी की इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग इन रोबोटिक्स एंड एम्बेडेड-सी में ग्रेड ए प्लस हासिल किया था. एसआरएम यूनिवर्सिटी चेन्नई के रोबोटिक्स टेक्नोलॉजी फेस्टिवल में भी उन्होंने तीसरा स्थान प्राप्त किया. वर्ष 2008 में आइआइटी दिल्ली में रिसर्च एसोसिएट के रूप में सुपर कंप्यूटर, एसएलआई डिजाइन और एम्बेडेड सिस्टम के क्षेत्र में भी उपलब्धि हासिल की थी.
