भागलपुर में गांधी के 100 साल पुराने कदमों की गूंज, चरखा और शांति संदेश के साथ शुरू हुआ राष्ट्रीय समारोह

भागलपुर में महात्मा गांधी के आगमन के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर एक राष्ट्रीय स्तर का तीन दिवसीय समारोह शुरू हुआ है. यह आयोजन केवल गांधी को याद करने तक सीमित नहीं, बल्कि उनके विचारों को वर्तमान समय में समझने और परखने का एक महत्वपूर्ण मंच है.

Bhagalpur News: भागलपुर में शुक्रवार को एक ऐसा आयोजन शुरू हुआ, जिसने शहर को उसके ऐतिहासिक और वैचारिक अतीत से फिर जोड़ दिया. महात्मा गांधी के भागलपुर आगमन के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर गांधी शांति प्रतिष्ठान और स्थानीय नागरिकों की गठित समिति के संयुक्त प्रयास से राष्ट्रीय स्तर का तीन दिवसीय समारोह लालकोठी स्थित श्वेतांबर जैन धर्मशाला परिसर में शुरू हुआ.

इस समारोह की खास बात यह है कि यह केवल गांधी को याद करने का कार्यक्रम नहीं, बल्कि उनके विचारों को वर्तमान समय में समझने और समाज के बदलते ढांचे के संदर्भ में परखने का प्रयास है. आयोजकों के अनुसार भागलपुर में गांधी के चार बार हुए आगमन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और उनकी प्रासंगिकता को केंद्र में रखकर विभिन्न सत्र आयोजित किए जा रहे हैं.

चरखा और दीप जलाकर हुआ समारोह का शुभारंभ

कार्यक्रम का उद्घाटन सांसद अजय मंडल, मेयर डॉ बसुंधरालाल, विख्यात लेखक डॉ पुरुषोत्तम अग्रवाल, पूर्व सांसद सुबोध राय, डॉ सुजाता चौधरी, डॉ राकेश पांडेय, डॉ रतन मंडल और अन्य अतिथियों ने संयुक्त रूप से किया. उद्घाटन सत्र स्वतंत्रता सेनानी दीप नारायण सिंह को समर्पित रहा.

समारोह की शुरुआत चरखा चलाकर और दीप प्रज्वलित कर की गई. इसी दौरान गांधी पर केंद्रित एक विशेष स्मारिका का लोकार्पण भी किया गया, जिसमें देशभर के विद्वानों और शोधार्थियों के शोधपरक लेख संकलित हैं.

पुरुषोत्तम अग्रवाल बोले, मजबूरी नहीं मजबूती का नाम हैं गांधी

उद्घाटन सत्र में विख्यात लेखक डॉ पुरुषोत्तम अग्रवाल ने "मजबूती का नाम महात्मा गांधी" विषय पर स्मारक व्याख्यान दिया. उन्होंने कहा कि गांधी को "मजबूरी का नाम" बताना उनके विचारों के खिलाफ फैलाया गया दुष्प्रचार था.

उनके अनुसार गांधी का जीवन सत्य, साहस, आत्मबल और नैतिक दृढ़ता का उदाहरण है और भारतीय लोकतंत्र की बुनियाद को समझने के लिए गांधी के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में थे.

भागलपुर के लिए क्यों खास है यह आयोजन?

भागलपुर का गांधी से ऐतिहासिक संबंध रहा है. गांधी यहां चार बार आए थे और उनके दौरों ने स्थानीय समाज, शिक्षा, स्वतंत्रता आंदोलन और सामाजिक चेतना पर गहरा प्रभाव छोड़ा था.

आयोजकों का मानना है कि आज जब समाज में संवाद, सद्भाव और सामाजिक विश्वास की चुनौतियां बढ़ रही हैं, तब गांधी के विचारों पर गंभीर विमर्श जरूरी है. यही कारण है कि समारोह को सामाजिक बदलाव और नागरिक भागीदारी से जोड़ा गया है.

लोकगीतों से लेकर महिला शक्ति सम्मेलन तक

पहले दिन की संध्या लोक गायिका चंदन तिवारी के गांधी केंद्रित लोकगीतों के नाम रही. यह सत्र शहीद महेंद्र गोप और सतीश प्रसाद झा को समर्पित किया गया.

समारोह के दौरान राष्ट्रीय महिला शक्ति संकल्प सम्मेलन भी आयोजित होगा, जिसे स्वतंत्रता सेनानी आशा भारती सहाय को समर्पित किया गया है. इसमें देश के विभिन्न राज्यों से आई सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्षाविद और प्रबुद्ध महिलाएं भाग लेंगी. सम्मेलन में कई महिलाओं को "कस्तूरबा गांधी संकल्प सम्मान" से सम्मानित किया जाएगा.

दूसरे दिन कवि सम्मेलन और शांति सद्भावना यात्रा

समारोह के दूसरे दिन राष्ट्रीय कवि सम्मेलन आयोजित होगा, जिसमें गांधी केंद्रित कविताओं का पाठ किया जाएगा. इस सत्र की अध्यक्षता लक्ष्मी शंकर वाजपेई करेंगे और कई चर्चित कवि इसमें भाग लेंगे.

इसी दिन स्वतंत्रता सेनानी शुभकरण चूड़ीवाला की स्मृति में शांति सद्भावना यात्रा निकाली जाएगी. यह यात्रा भागलपुर रेलवे स्टेशन से शुरू होकर खलीफाबाग, कोतवाली और ततारपुर होते हुए श्वेतांबर जैन धर्मशाला पहुंचेगी.

Bhagalpur News: किसानों और युवाओं पर भी होगा विशेष मंथन

आयोजन के दौरान किसान सम्मेलन और युवा सम्मेलन भी प्रस्तावित है. कृषि विशेषज्ञ डॉ राजा राम त्रिपाठी किसानों को संबोधित करेंगे, जबकि युवाओं के लिए अलग सत्र आयोजित होगा जिसमें सामाजिक भागीदारी, नेतृत्व और लोकतांत्रिक मूल्यों पर चर्चा होगी.

आयोजकों का कहना है कि समारोह का उद्देश्य केवल अतीत को याद करना नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के भारत के लिए गांधी के विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है. भागलपुर में शुरू हुआ यह शताब्दी समारोह आने वाले दिनों में सामाजिक न्याय, सद्भाव, महिला सशक्तीकरण और नागरिक जिम्मेदारी जैसे मुद्दों पर व्यापक संवाद का मंच बनने जा रहा है.

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लेखक के बारे में

By दीपक कुमार राव

दीपक कुमार राव प्रिंट माध्यम में 18 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 3 वर्षों से एक्टिव हैं. प्रभात खबर के भागलपुर कार्यालय में काम कर रहे हैं. देश और राज्य की राजनीति, कला-संस्कृति व सामाजिक कार्य में रुचि रखते हैं.

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