Ganga River Erosion: गंगा नदी में उफान आने के साथ ही स्पर संख्या पांच से लेकर पांच-छह (5 to 5 N-2) के बीच स्थिति काफी नाजुक और गंभीर बनी हुई है. पानी की गहराई अत्यधिक होने के कारण नदी की मुख्य धारा सीधे तटबंध से टकरा रही है और लगातार दबाव बना रही है. प्रशासनिक दावों के उलट, कई जगहों पर गंगा और मुख्य बांध के बीच की दूरी महज चंद कदमों की रह गई है, जिससे कटाव की आशंका गहरा गई है.
स्पर 5 से 5 एन-2 तक स्थायी सुरक्षा कार्य न होने से बढ़े ग्रामीण
स्थानीय ग्रामीणों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मानसून के इस शुरुआती दौर में ही नदी का रुख काफी आक्रामक दिख रहा है. सबसे बड़ी चिंता स्पर संख्या 5 से लेकर 5 एन-2 तक के हिस्से को लेकर है, जहाँ अब तक फ्लड फाइटिंग (बाढ़ नियंत्रण) के तहत कोई भी स्थायी प्रोटेक्शन या बोल्डर क्रेटिंग का कार्य नहीं कराया गया है. नदी की तेज धारा का रुख सीधे तटबंध की ओर होने के कारण जलस्तर में मामूली वृद्धि भी भारी तबाही का सबब बन सकती है.
पूर्व मुखिया की चेतावनी: समय रहते कदम न उठाए तो बह जाएंगे दर्जनों गांव
बाढ़ और कटाव की इस विभीषिका को हर साल झेलने वाले स्थानीय ग्रामीण सह पूर्व मुखिया ऊधो राय ने स्थिति की गंभीरता पर प्रकाश डालते हुए कहा:
"हर वर्ष बरसात और बाढ़ के मौसम में इस विशेष हिस्से पर कटाव का सबसे बड़ा खतरा मंडराता है. विडंबना यह है कि विभाग केवल बाढ़ आने पर ही जागता है. यदि जल संसाधन विभाग ने अभी बिना समय गंवाए स्पर संख्या 5 से 5 एन-2 तक अविलंब कटाव निरोधी एवं सुदृढ़ीकरण कार्य शुरू नहीं कराया, तो तटबंध को अपूरणीय क्षति पहुंच सकती है. अगर यह बांध टूटा, तो आसपास के दर्जनों गांवों का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा." — ऊधो राय, पूर्व मुखिया व स्थानीय ग्रामीण
ग्रामीणों ने सुर में सुर मिलाते हुए मांग की है कि बाढ़ के चरम (पीक) दौर के आने से पहले ही युद्धस्तर पर सुरक्षात्मक कार्य पूरे कर लिए जाएं ताकि बाद में किसी विकट स्थिति का सामना न करना पड़े.
प्रशासन का दावा: मुकम्मल हैं इंतजाम, 24 घंटे हो रही पेट्रोलिंग
दूसरी ओर, बाढ़ सुरक्षा को लेकर जल संसाधन विभाग के तकनीकी अधिकारी पूरी तरह मुस्तैद होने की बात कह रहे हैं. ग्रामीणों के भय और स्परों पर बढ़ते दबाव को लेकर पूछे जाने पर कार्यपालक अभियंता (Executive Engineer) ने विभाग की तैयारियों को साझा किया:
"इस्माईलपुर–बिंद टोली तटबंध की सुरक्षा को लेकर विभाग पूरी तरह गंभीर है. किसी भी आपातकालीन परिस्थिति से निपटने के लिए मुकम्मल प्रशासनिक व्यवस्था की गई है. कनीय अभियंताओं की टीम द्वारा तटबंध की 24 घंटे कड़ी निगरानी (पेट्रोलिंग) की जा रही है. स्पर संख्या 5 से 7 सहित सभी अति-संवेदनशील और संवेदनशील स्थलों पर पर्याप्त मात्रा में बालू भरी बोरियों (सैंड बैग्स) और जिओ बैग्स का अग्रिम भंडारण कर लिया गया है. तटबंध पूरी तरह सुरक्षित है और घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है." — ई. गौतम कुमार, कार्यपालक अभियंता
हालांकि अभियंताओं के दावों के बीच, उफनती गंगा की लहरों और तटबंध की कम होती दूरी को देखकर दियारा क्षेत्र के किसानों और निवासियों की रात की नींद उड़ी हुई है. लोग लगातार भगवान से नदी का जलस्तर स्थिर रहने की प्रार्थना कर रहे हैं.
