Bhagalpur Flood Roads: भागलपुर में बाढ़ का पानी सिर्फ घरों और खेतों तक नहीं पहुंचा है, बल्कि जिले की सड़क व्यवस्था को भी अपनी चपेट में ले चुका है. घोघा से सबौर, शाहकुंड, नाथनगर, पीरपैंती और कहलगांव तक कई प्रमुख सड़कें पानी में डूबी हैं. नवगछिया अनुमंडल में भी बांध टूटने और गंगा के ओवरफ्लो से कई सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं. कहीं सड़क पर पांच से दस फीट तक पानी बह रहा है, तो कहीं पानी उतरने के बाद सड़क की टूटती सतह आने वाली बड़ी चुनौती का संकेत दे रही है.
इसका सीधा असर उन लोगों पर पड़ रहा है, जिनका रोज का जीवन सड़क से जुड़ा है. मजदूरों को काम पर जाने में परेशानी है, किसानों के लिए खेत और बाजार तक पहुंचना मुश्किल हो गया है और सरकारी कर्मचारियों समेत रोजमर्रा के काम से प्रखंड मुख्यालय जाने वाले लोगों का आवागमन प्रभावित है. कई गांवों का सीधा सड़क संपर्क भी टूट गया है.
घोघा में दस फीट तक पानी, कई मुख्य सड़कें डूबीं
घोघा और आसपास के इलाके में बाढ़ ने सड़क संपर्क को बुरी तरह प्रभावित किया है. कोदवार-प्रस्तडीह मुख्य मार्ग पर करीब 10 फीट पानी बह रहा है. साधोपुर-कुशहा मुख्य मार्ग पर करीब पांच फीट और एनएच-80 से गोपालपुर-कोदवार जाने वाली सड़क पर भी करीब पांच फीट पानी है.
जानीडीह से आदर्श नगर होते हुए कोदवार जाने वाली सड़क भी डूबी हुई है. एनएच-80 से पन्नूचक्र, दिलवार और फुलकिया को जोड़ने वाली सड़क पर भी पानी जमा है. इन मार्गों के प्रभावित होने से ग्रामीण इलाकों का सामान्य आवागमन मुश्किल हो गया है.
सबौर में जलमग्न सड़कों से गांवों का संपर्क प्रभावित
सबौर प्रखंड में रेलवे स्टेशन से सबौर महाविद्यालय, शीतला मंदिर, सुल्तानपुर भिट्ठी होते हुए कतरिया नदी पर बने पुल तक जाने वाली सड़क पूरी तरह जलमग्न है. यह मार्ग जमसी-गोराडीह मुख्य सड़क से जुड़ता है.
एनएच-80 से रेलवे स्टेशन सबौर के पूर्वी समपार केबिन, राजपुर होते हुए मुरहन तक जाने वाला मार्ग भी बाढ़ के पानी में डूब गया है. यह सड़क पहले से ही जर्जर स्थिति में है. इससे रोजाना दर्जनों गांवों के मजदूर, किसान और सरकारी कर्मचारी आवागमन करते हैं.
लैलख रेलवे स्टेशन से दक्षिणी क्षेत्र के कई गांवों को जोड़ने वाली सड़क भी पानी में डूब गयी है. इससे इन गांवों का संपर्क प्रभावित हुआ है. पहले से खराब सड़क और ऊपर से बाढ़ के पानी ने ग्रामीणों की मुश्किल और बढ़ा दी है.
शाहकुंड में गांवों तक पहुंचना हुआ मुश्किल
शाहकुंड प्रखंड में भी कई ग्रामीण सड़कें बाढ़ के पानी में डूबी हैं. खुलनी पंचायत के पचरुखी गांव, खुलनी-मुंजत, फतेहपुर-मिल्की, गोडियासी, हरपुर, मकंदपुर चौक-अशरफपुर, दरियापुर-सरौख-चंद्रभानपुर, बेलथू, बेलथू-मंझो और बेलथू-सरहा मार्ग प्रभावित हैं.
शाहकुंड-सुल्तानगंज मुख्य पथ पर भी जलजमाव के कारण आवागमन बंद है. ग्रामीणों के लिए बाजार, अस्पताल और प्रखंड मुख्यालय तक पहुंचना ऐसे हालात में बड़ी चुनौती बन गया है.
नवगछिया में बांध टूटने और ओवरफ्लो से सड़कें क्षतिग्रस्त
नवगछिया अनुमंडल में बाढ़ ने सड़क व्यवस्था को अलग-अलग तरीके से प्रभावित किया है. खरीक के राघोपुर में बांध टूटने से सड़क क्षतिग्रस्त हुई है. गोपालपुर के डुमरिया में गंगा का पानी ओवरफ्लो होने से सड़क टूट गयी.
सुकटिया बाजार में बाढ़ का पानी प्रवेश करने के बाद सड़क प्रभावित हुई है. वहीं रंगरा के सधुआ चापर, मदरौनी और बनिया क्षेत्र में लगातार सड़क पर पानी बहने से कई जगह सड़क की सतह क्षतिग्रस्त हो गयी है. पानी उतरने के बाद इन सड़कों की वास्तविक स्थिति और साफ सामने आने की संभावना है.
कहलगांव में मुख्य मार्ग से रेलवे अंडरपास तक असर
कहलगांव क्षेत्र में भी बाढ़ ने कई महत्वपूर्ण मार्गों को प्रभावित किया है. एनटीपीसी-चांयटोला सड़क, तोफील-बीरबन्ना मार्ग, शिवनारायणपुर-किशनदासपुर सड़क, कहलगांव-ओगरी सड़क और एकचारी-मोहनपुर सड़क पर बाढ़ का असर है.
कहलगांव रेलवे अंडरपास भी प्रभावित है. इन मार्गों से आसपास के गांवों के लोग रोजाना बाजार, काम और जरूरी सेवाओं के लिए आवागमन करते हैं. सड़क संपर्क बाधित होने से उनकी परेशानी बढ़ गयी है.
नाथनगर और पीरपैंती में भी रास्ते पानी में
नाथनगर क्षेत्र में श्रीरामपुर-गोसाईदासपुर, श्रीरामपुर-बैरिया, फोरलेन-भुआलपुर, फोरलेन-भतौड़िया, फोरलेन-कंझिया, श्रीरामपुर-बंगालीटोला और नाथनगर-दोगच्छी मुख्य मार्ग पर पानी बह रहा है. बैरिया रोड समेत कई संपर्क मार्गों पर जलजमाव से लोगों को आवागमन में परेशानी हो रही है.
पीरपैंती को दियारा क्षेत्र से जोड़ने वाली मुख्य सड़क पर सिंघिया नाला के पास बाढ़ का पानी है. पीरपैंती-बाखरपुर-बाबूपुर मुख्य सड़क भी पानी से लबालब है. इससे दियारा क्षेत्र के लोगों का आवागमन प्रभावित हुआ है.
Bhagalpur Flood Roads: पानी उतरने के बाद सामने होगी असली चुनौती
बाढ़ के दौरान सड़क पर पानी होना तत्काल समस्या है, लेकिन पानी उतरने के बाद क्षतिग्रस्त सड़कों को पहले जैसा बनाना प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती होगी. तेज बहाव से कई जगह सड़क की सतह टूट चुकी है. कुछ मार्ग पहले से ही जर्जर थे और बाढ़ ने उनकी स्थिति और खराब कर दी है.
सड़क संपर्क बहाल होना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री पहुंचाने, बीमार लोगों को अस्पताल ले जाने और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए बाजार तक पहुंचने में सड़क की अहम भूमिका है. ऐसे में पानी कम होने के साथ ही क्षतिग्रस्त सड़कों का सर्वे और मरम्मत जरूरी होगी.
ग्रामीणों ने बाढ़ प्रभावित सड़कों का जायजा लेने, पानी उतरने के बाद तत्काल मरम्मत कराने और जहां जरूरी हो वहां वैकल्पिक आवागमन की व्यवस्था करने की मांग की है. अब चुनौती सिर्फ पानी हटने की नहीं, बल्कि बाढ़ से टूटे सड़क संपर्क को फिर से सामान्य करने की भी है.
इनपुट : घोघा से निलेश कुमार, सबौर से बलराम यादव, कहलगांव से असद अशरफी, पीरपैंती से अमरेंद्र तिवारी, नाथनगर से नमन कुमार चौधरी, शाहकुंड से कुंदन प्रवीण, नवगछिया से रसिद आलम
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