बिहार सरकार राज्य के हर प्रखंड तक उच्च शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए नए डिग्री कॉलेजों का जाल बिछा रही है. उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा हाल ही में भागलपुर जिले के गौराडीह प्रखंड में नवस्थापित कॉलेज के उद्घाटन के साथ राज्य के 211 नए डिग्री कॉलेजों में पठन-पाठन का औपचारिक शुभारंभ किया गया. लेकिन इस महत्वाकांक्षी सोच के समानांतर नवगछिया के दो प्रमुख अंगीभूत कॉलेजों—मदन अहिल्या महिला महाविद्यालय और गजाधर भगत महाविद्यालय (जीबी कॉलेज) में बुनियादी संसाधनों और शिक्षकों की गंभीर किल्लत ने उच्च शिक्षा व्यवस्था के दावों की पोल खोलकर रख दी है.
मदन अहिल्या महिला कॉलेज: 3500+ छात्राओं का भविष्य 11 नियमित शिक्षकों के भरोसे
मदन अहिल्या महिला महाविद्यालय में शिक्षकों और कर्मचारियों की कमी विकराल रूप ले चुकी है:
- शिक्षकों के पद रिक्त: कॉलेज में कुल 35 स्वीकृत पद हैं, लेकिन वर्तमान में केवल 11 नियमित शिक्षक और 6 अतिथि शिक्षक ही कार्यरत हैं.
- इन विषयों में एक भी नियमित शिक्षक नहीं: जूलॉजी, भौतिकी (Physics), बॉटनी, संस्कृत, मनोविज्ञान, अर्थशास्त्र और गणित जैसे महत्वपूर्ण विषयों में एक भी नियमित शिक्षक उपलब्ध नहीं है.
- एक साथ चल रहे 4 सेमेस्टर: वर्तमान में स्नातक के 4 अलग-अलग सेमेस्टरों (सत्र 2026-30, 2025-29, 2024-28 और 2023-27) में 3,500 से अधिक छात्राएं नामांकित हैं, लेकिन कक्षाएं संचालित करना कॉलेज प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है.
जीबी कॉलेज में भी हालात चिंताजनक: प्रमुख विभागों में ताला लटकने की नौबत
नवगछिया के सबसे बड़े सरकारी महाविद्यालय गजाधर भगत (जीबी) कॉलेज की स्थिति भी इससे अलग नहीं है:
- 31 में से सिर्फ 10 नियमित शिक्षक: कॉलेज में शिक्षकों के 31 पद स्वीकृत हैं, लेकिन मात्र 10 नियमित और 7 अतिथि शिक्षक पदस्थापित हैं.
- शून्य शिक्षक वाले विभाग: दर्शनशास्त्र (Philosophy), बॉटनी, राजनीति शास्त्र (Political Science) और हिंदी जैसे मुख्य विषयों में एक भी नियमित शिक्षक नहीं है. कई विभागों में केवल एक शिक्षक हैं, जिनके अवकाश पर जाते ही पढ़ाई पूरी तरह ठप हो जाती है.
गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों की भारी कमी से ठप प्रशासनिक कार्य
शिक्षकों के साथ-साथ दोनों महाविद्यालयों में गैर-शैक्षणिक (Non-Teaching) स्टाफ का भी घोर अभाव है:
- महत्वपूर्ण पद खाली: कैशियर, डेटा एंट्री ऑपरेटर, लाइब्रेरियन, लैब इंचार्ज/स्टाफ और नाइट गार्ड के पद वर्षों से खाली पड़े हैं.
- प्रयोगात्मक पढ़ाई और रिजल्ट प्रभावित: लैब स्टाफ के न होने से साइंस के विद्यार्थियों की प्रैक्टिकल कक्षाएं बाधित हो रही हैं, वहीं क्लर्क और अकाउंटेंट की कमी से कार्यालयीन कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं.
"इमारतें नई, पर बुनियाद खोखली"—यूनिवर्सिटी और सरकार से गुहार
दोनों महाविद्यालयों के प्राचार्यों और प्रशासन ने तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (TMBU) एवं बिहार सरकार से अविलंब शिक्षकों और कर्मचारियों की नियुक्ति/प्रतिनियुक्ति की मांग की है.
बड़ा सवाल: जब राज्य सरकार हर ग्रामीण इलाके में नए कॉलेज खोलने का दावा कर रही है, तब पहले से संचालित प्रतिष्ठित कॉलेजों में वर्षों से खाली पड़े पदों को कब भरा जाएगा? बिना शिक्षकों के "गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा" का लक्ष्य केवल कागजों तक ही सीमित रह जाएगा.
