भागलपुर के नारायणपुर में 40 डिग्री तापमान में खाली पैर घर लौटने को मजबूर आंगनबाड़ी के बच्चे
Bhagalpur News : एक तरफ पारा 40 डिग्री के पार पहुंच चुका है, दूसरी ओर तीन से छह वर्ष के मासूम बच्चे चिलचिलाती धूप और तपती सड़कों पर नंगे पैर घर लौटने को मजबूर हैं. नारायणपुर प्रखंड के आंगनबाड़ी केंद्रों से सामने आई यह तस्वीर भीषण गर्मी में बच्चों की सुरक्षा और सुविधा को लेकर कई सवाल खड़े कर रही है.
नारायणपुर, भागलपुर से मधुर मिलन नायक की रिपोर्ट
Bhagalpur News : भागलपुर जिले के नारायणपुर प्रखंड में पड़ रही भीषण गर्मी के बीच आंगनबाड़ी केंद्रों में पढ़ने वाले छोटे बच्चों की परेशानी बढ़ गई है. केंद्रों की छुट्टी ऐसे समय हो रही है जब धूप अपने चरम पर होती है. परिणामस्वरूप कई बच्चे तपती सड़कों पर नंगे पैर चलकर घर जाने को विवश हैं. यह स्थिति अभिभावकों और ग्रामीणों के बीच चिंता का विषय बन गई है.
धूप की तपिश में घर लौटते मासूम
गुरुवार को नगरपारा पूरब पंचायत के भ्रमरपुर दुर्गा मंदिर परिसर में संचालित आंगनबाड़ी केंद्र से छुट्टी के बाद कई बच्चे भीषण गर्मी में घर लौटते दिखाई दिए. कुछ बच्चों को लेने उनके अभिभावक पहुंचे थे, लेकिन अधिकांश बच्चे बिना चप्पल-जूते के ही तपती सड़क पर पैदल घर जाते नजर आए. कड़कती धूप और उमस भरे मौसम में यह सफर उनके लिए किसी चुनौती से कम नहीं था.
छुट्टी का समय बना चिंता का कारण
वर्तमान में ग्रीष्मकालीन सत्र के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन सुबह 7:30 बजे से 11:30 बजे तक किया जा रहा है. हालांकि ग्रामीणों का मानना है कि वर्तमान मौसम को देखते हुए यह समय भी बच्चों के लिए उपयुक्त नहीं है. उनका कहना है कि दोपहर के करीब तापमान तेजी से बढ़ जाता है और छुट्टी के समय बच्चों को सबसे अधिक परेशानी होती है.
ग्रामीणों ने समय में बदलाव की उठाई मांग
स्थानीय लोगों का कहना है कि छोटे बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को देखते हुए आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन की समयावधि में बदलाव किया जाना चाहिए. उनका मानना है कि अत्यधिक गर्मी के दौरान छुट्टी का समय और पहले कर दिया जाए, ताकि बच्चों को तेज धूप में घर न लौटना पड़े.से
विका बोलीं, विभागीय निर्देशों का हो रहा पालन
आंगनबाड़ी केंद्र संख्या-33 की सेविका रंजीता गोस्वामी ने बताया कि केंद्र का संचालन विभाग द्वारा निर्धारित समय के अनुसार किया जाता है. उन्होंने कहा कि छुट्टी के समय अभिभावकों को सूचना दी जाती है. कई बार वह स्वयं और सहायिका बच्चों को उनके घर तक छोड़ने भी जाती हैं ताकि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.
सिर्फ एक केंद्र नहीं, पूरे प्रखंड की तस्वीर
ग्रामीणों के अनुसार यह समस्या किसी एक केंद्र तक सीमित नहीं है. प्रखंड क्षेत्र के अधिकांश आंगनबाड़ी केंद्रों में पढ़ने वाले बच्चों को इसी तरह की परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है. भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप के बीच छोटे-छोटे बच्चे रोजाना नंगे पैर घर लौटने को मजबूर हैं.
मासूमों की सुरक्षा पर उठ रहे सवाल
लगातार बढ़ते तापमान के बीच बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ रही है. अभिभावकों का कहना है कि प्रशासन और संबंधित विभाग को इस दिशा में गंभीरता से विचार करना चाहिए, ताकि भीषण गर्मी के दौरान बच्चों को राहत मिल सके और उनका स्वास्थ्य सुरक्षित रह सके.