bhagalpur news. एमबीए विभाग : बिना टेंडर 30 लाख की पुस्तक खरीदने का आरोप

टीएमबीयू के एमबीए विभाग में करीब 30 लाख रुपये की पुस्तक खरीदने का मामला एक बार फिर से उठने लगा है

टीएमबीयू के एमबीए विभाग में करीब 30 लाख रुपये की पुस्तक खरीदने का मामला एक बार फिर से उठने लगा है. विभाग के ही पूर्व छात्र संतोष कुमार श्रीवास्तव ने आरोप लगाया कि पुस्तक खरीद प्रक्रिया में न तो टेंडर की प्रक्रिया की गयी, और न ही रजिस्ट्रार के हस्ताक्षर लिये गये. आरोप लगाया कि पुस्तक खरीद में वित्तीय नियमों पूरी तरह उल्लंघन किया गया है. पूर्व छात्र ने आरोप लगाया कि पुस्तक खरीद में स्थापित नियमों को दरकिनार कर मनमाने तरीके से खर्च किया गया. इस बाबत विवि प्रशासन ने जांच समिति का गठन किया.

निष्पक्ष जांच व कार्रवाई के नाम पर आवेदन लिया वापस

पूर्व छात्र संतोष कुमार श्रीवास्तव बताया कि जांच समिति लोक शिकायत में दिये गये आवेदन के दबाव में बनायी गयी थी. बताया कि उस समय विवि से आश्वासन दिया गया था कि समिति गठित कर निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई की जायेगी. इसी आश्वासन के आधार पर उन्होंने लोक शिकायत में दिया गया अपना आवेदन वापस ले लिया था.

शिकायतकर्ता को नहीं सौंपी गयी रिपोर्ट

पूर्व छात्र ने बताया कि जांच के बाद स्थिति और अधिक संदिग्ध हो गयी है. आरोप है कि जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट तैयार कर ली, लेकिन न तो उसे शिकायतकर्ता को सौंपा गया और न ही सार्वजनिक किया गया. इससे विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर सवाल उठाया है. शिकायतकर्ता को आश्वासन देकर मामले को शांत करने का प्रयास किया गया.

पुस्तक खरीद की फाइल में टेंडर की प्रक्रिया नहीं

संतोष कुमार श्रीवास्तव बताया कि उनके पास पुस्तक खरीद की पूरी प्रक्रिया से संबंधित फाइल है. उन्होंने आराेप लगाया कि फाइल में कहीं भी टेंडर प्रक्रिया का उल्लेख नहीं है और न ही उसके पालन का कोई प्रमाण है. दावा किया कि प्रारंभ में 279 पुस्तकों की खरीद का ऑर्डर लिया गया था. जबकि वास्तविकता में लगभग 800 के आसपास पुस्तकें खरीदी गयी है. ऐसे में वित्तीय अनियमितता सामने आ रही है. आरोप लगाया कि खरीदी गयी पुस्तक धूलफांक रही है. विद्यार्थियों को पढ़ने तक नहीं दिया जाता है. ज्यादातर पुस्तक सिलेबस से बाहर की है.

10 दिन में रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं होने पर कोर्ट जाने की चेतावनी

पूर्व छात्र संतोष कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि दस दिन में जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गयी, तो कोर्ट में फिर से जाने की चेतावनी विवि प्रशासन को दी है. बताया कि मामले को लेकर कुलाधिपति, रजिस्ट्रार व कुलपति को भी मामले में फिर से लिखित आवेदन किया है.

कमेटी ने मामले में दे चुकी है क्लीन चीट

पुस्तक खरीद मामले में विवि की जांच कमेटी ने पहले ही क्लीन चीट दे चुकी है. कमेटी के सदस्यों का कहना कि पुस्तक खरीद मामले में सारे नियम का पालन किया गया है. पुस्तक की इंट्री भी हो चुकी है. कमेटी का कहना था कि 279 पुस्तकों की खरीद का ऑर्डर विवि से लिया गया है. लिहाजा पुस्तक खरीद में किसी प्रकार की अनियमितता नहीं है.

कोट

विवि कमेटी पूरे मामले की जांच कर चुकी है. ज्यादा जानकारी लेनी है, तो कमेटी से बात करे. पुस्तक खरीद को लेकर लगाये जा रहे आरोप निराधार व गलत है. विवि प्रशासन के ऑडर से ही पुस्तक की खरीद की गयी है.

डॉ निर्मला कुमारी, निदेशक एमबीए विभाग

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Published by: Atul kumar

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