bhagalpur news. रमजान आत्मा की शुद्धि, इबादत व अल्लाह से करीब होने का महीना : सज्जादानशीन

रमजान पवित्र महिना.

— खानकाह-ए-पीर दमड़िया के सज्जादानशीन ने कहा, माहे रमजान ईमान वालों के लिए खास महीनाखानकाह-ए-पीर दमड़िया के सज्जादानशीन सैयद शाह फखरे आलम हसन ने कहा कि माहे रमजान आत्मा की शुद्धि, इबादत व अल्लाह से करीब होने का महीना है. सिर्फ भूखा-प्यासा रहने का नाम नहीं, बल्कि बुरे कामों से बचकर अच्छे कामों की तरफ बढ़ने का अवसर है.

हर मुसलमान को चाहिए कि इस पवित्र महीने की कद्र करें. ज्यादा से ज्यादा नेक काम करें. माहे रमजान में पवित्र कुरआन नाजिल हुआ. कुरआन की तिलावत का सवाब इस माह में कई गुना बढ़ा दिया जाता है. इस माह में अल्लाह की रहमत बंदों पर खास होती है. मगफिरत व जहन्नुम से निजात का महीना भी है.

शबे-कद्र की बरकत

इस महीने में एक बहुत ही मुबारक रात होती है, जिसे शबे कद्र कहते हैं. हजार महीनों से बेहतर है. इस माह में जन्नत के दरवाजे खुल जाते हैं. हदीस के मुताबिक रमजान में जहन्नुम के दरवाजे बंद कर दिये जाते हैं. सज्जादानशीन ने कहा कि रोजा इस्लाम के पांच अहम स्तंभों में अहम है. हर बालिग (व्यस्क) मुसलमान पर रोजा रखना फर्ज है. रोजा इंसान को सब्र, परहेजगारी और आत्म-संयम सिखाता है. बराबरी और हमदर्दी का एहसास रोजा रखने से अमीर और गरीब के बीच बराबरी का एहसास होता है. गरीबों की भूख का दर्द समझ में आता है.

रमजान के अहकाम

सुबह में सेहरी व मगरिब के अजान के बाद इफ्तारखाना-पीना और बुरे कामों से बचना

रमजान में पांच वक्त की नमाज के साथ तरावीह की नमाज पढ़ना बहुत सवाबइस माह में जकात व सदका देना अफजल

गरीबों की मदद करनाबीमार, मुसाफिर, गर्भवती या बुज़ुर्ग लोगों को रोजे से छूट

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By KALI KINKER MISHRA

KALI KINKER MISHRA is a contributor at Prabhat Khabar.

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