Bhagalpur Cyber Crime: भागलपुर में साइबर ठगी के लिए फर्जी सिम का बड़ा नेटवर्क सामने आया है. ग्रामीणों के नाम पर अवैध तरीके से 81 सिम जारी कर उन्हें साइबर ठगों तक पहुंचाया गया. पुलिस जांच में शाहकुंड के जैनपुर निवासी आफताब को इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है. खास बात यह है कि पुलिस कार्रवाई की भनक लगते ही आफताब गांव छोड़कर फरार हो गया. अब साइबर थाना पुलिस उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही है.
मामला सिर्फ 81 फर्जी सिम तक सीमित नहीं है. पुलिस जांच में इन सिम का इस्तेमाल कर झारखंड और बंगाल के साइबर ठगों द्वारा 122 साइबर कांड किए जाने की बात सामने आयी है. यानी भागलपुर में तैयार किया गया सिम का नेटवर्क दूसरे राज्यों में बैठे साइबर अपराधियों के लिए ठगी का जरिया बन रहा था.
ग्रामीणों के नाम पर सिम, इस्तेमाल साइबर ठगों ने किया
पुलिस के अनुसार, आफताब पिछले करीब दो वर्षों से साइबर ठगी करने वाले गिरोह के सदस्यों को सिम उपलब्ध करा रहा था. वह एक साथ बड़ी संख्या में सिम की व्यवस्था करता और फिर उन्हें साइबर ठगों तक पहुंचाता था.
इन सिम का इस्तेमाल लोगों को मैसेज भेजने, तरह-तरह के प्रलोभन देने और उन्हें साइबर ठगी के जाल में फंसाने के लिए किया गया. पुलिस पहले ही इस बात की पुष्टि कर चुकी है कि बरामद और चिन्हित सिम का इस्तेमाल साइबर अपराध में हुआ था.
इस नेटवर्क का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि जिन लोगों के नाम पर सिम जारी हुए, जरूरी नहीं कि उन्हें इस बात की जानकारी रही हो कि उनके नाम से जारी नंबर का इस्तेमाल साइबर अपराध में किया जा रहा है.
अब्दुल मतीन से पूछताछ में खुला आफताब का नाम
इस पूरे मामले में बरहपुरा निवासी अब्दुल मतीन की गिरफ्तारी के बाद पुलिस को अहम सुराग मिला. पूछताछ के दौरान आफताब का नाम सामने आया.
पुलिस के अनुसार, आफताब के कहने पर ही अब्दुल मतीन साइबर ठगी से जुड़े इस धंधे में आया था. इसके बाद पुलिस ने आफताब की भूमिका की जांच शुरू की और उसके संपर्कों तथा नेटवर्क को खंगालना शुरू किया.
जांच आगे बढ़ी तो पुलिस को पता चला कि आफताब लंबे समय से साइबर ठगों को सिम उपलब्ध कराने के काम में सक्रिय था.
पुलिस की भनक लगी तो गांव छोड़कर भागा
आफताब के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई आगे बढ़ने की जानकारी मिलते ही वह अपने गांव से फरार हो गया. अब पुलिस उसके संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही है.
पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि आफताब अकेले ही सिम उपलब्ध कराने का काम करता था या उसके साथ इस नेटवर्क में और लोग भी जुड़े थे. उसके मोबाइल नंबर, संपर्कों और सिम की खरीद-बिक्री से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की जा रही है.
आफताब की गिरफ्तारी इस मामले में इसलिए भी अहम मानी जा रही है, क्योंकि उसके पकड़े जाने के बाद साइबर ठगों तक सिम पहुंचाने की पूरी कड़ी का खुलासा हो सकता है.
सिम कंपनी के कर्मी की भूमिका भी जांच के घेरे में
फर्जी तरीके से इतनी बड़ी संख्या में सिम जारी होने के मामले में संबंधित सिम कंपनी के जिला स्तर के एक कर्मी की भूमिका भी पुलिस के संदेह के घेरे में है.
पुलिस को आशंका है कि सिम जारी करने की प्रक्रिया में कंपनी के स्तर पर मदद या लापरवाही हुई हो सकती है. हालांकि, इस संबंध में जांच अभी जारी है और पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी.
साइबर डीएसपी विनय रंजन ने मंगलवार को बताया था कि वोडाफोन एजेंसी की भूमिका की भी जांच की जा रही है. पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि एजेंसी के स्तर पर सिम जारी करने के दौरान निर्धारित नियमों का पालन हुआ था या नहीं.
आपके नाम पर भी चल रहा हो सकता है अनजान सिम
इस मामले ने आम मोबाइल उपभोक्ताओं के लिए भी एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. क्या आपके नाम और पहचान पर कोई ऐसा मोबाइल नंबर चल रहा है, जिसकी जानकारी आपको नहीं है?
इसे घर बैठे जांचा जा सकता है. इसके लिए संचार साथी पोर्टल पर उपलब्ध TAFCOP सुविधा का इस्तेमाल किया जा सकता है. मोबाइल ब्राउजर में TAFCOP पोर्टल खोलकर अपना मोबाइल नंबर दर्ज करना होगा. इसके बाद ओटीपी के जरिए लॉगिन करने पर आपके नाम पर जारी मोबाइल कनेक्शनों की सूची दिखाई देगी.
अगर सूची में ऐसा नंबर दिखाई देता है जिसे आपने जारी नहीं कराया है, तो उसे नजरअंदाज न करें. उपलब्ध विकल्प के जरिए उस नंबर की रिपोर्ट की जा सकती है. जरूरत पड़ने पर संबंधित साइबर थाना या साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर भी शिकायत की जा सकती है.
फ्री इंटरनेट के लालच में न लें नया सिम
पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि ऐसे मामलों में लोगों को आकर्षक ऑफर का लालच दिया जा सकता है. नंबर पोर्ट कराने या नया सिम लेने के बदले एक से तीन महीने तक मुफ्त बातचीत या फ्री इंटरनेट जैसी सुविधाओं का प्रलोभन दिया जाता है.
ऐसे किसी भी ऑफर के झांसे में आने से बचना जरूरी है. नया सिम हमेशा अधिकृत दुकान या अधिकृत विक्रेता से ही लेना चाहिए. अपने पहचान पत्र का इस्तेमाल कहां और किस उद्देश्य से हो रहा है, इसकी जानकारी भी जरूर रखें.
Bhagalpur Cyber Crime: 122 साइबर कांड के बाद अब आगे क्या?
81 सिम के जरिए 122 साइबर कांड सामने आने के बाद पुलिस की जांच अब सिर्फ गिरफ्तार अब्दुल मतीन तक सीमित नहीं है. आफताब की गिरफ्तारी के बाद इस नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों, साइबर ठगों तक सिम पहुंचाने की व्यवस्था और सिम जारी करने की प्रक्रिया में संभावित गड़बड़ी के बारे में अहम जानकारी मिलने की उम्मीद है.
पुलिस अब फरार आफताब की तलाश के साथ उसके संपर्कों और नेटवर्क को खंगाल रही है. अगर वह गिरफ्तार होता है, तो जांच में यह भी साफ हो सकता है कि भागलपुर से जारी किए गए फर्जी सिम झारखंड और बंगाल के किन साइबर ठगों तक पहुंचे और इस नेटवर्क में कितने लोग सक्रिय थे.
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