भागलपुर : जेएलएनएमसीएच में कई बहुप्रतीक्षित स्वास्थ्य सेवाएं शुरू होने से पहले ही खटाई में पड़ती नजर आ रही हैं. अस्पताल प्रबंधन कभी नक्शा फेल होने के लिए एजेंसी को जिम्मेदार बता रही, तो कभी संसाधन और स्टाफ की कमी बता अपना पल्ला झाड़ रही है. कुछ ऐसा ही हाल सदर अस्पताल का भी है.
एक साल पहले यहां मदर चाइल्ड विभाग का भवन बनना था. एजेंसी ने मिट्टी जांच करने के लिए इंजीनियर को भेजा. लेकिन अब तक इसकी रिपोर्ट ही नहीं आयी. ऐसे में अब अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही का खामियाजा भागलपुर समेत आसपास के जिले के लोगों को भुगतना पड़ रहा है.
सदर अस्पताल में ब्लड बैंक को नहीं मिल पा रहा है भवन: सदर अस्पताल में ब्लड बैंक का निर्माण होना था. सरकार ने यहां मशीन भेज दिया और भवन को बैंक के लायक बनाने का भार सरकारी निर्माण एजेंसी को सौंपा.
एजेंसी के एक भी अधिकारी और कर्मचारी पांच माह से ज्यादा वक्त होने के बाद भी यहां नहीं पहुंचा. इस वजह से ब्लड बैंक का लाइंसेस भी लेने में ड्रग विभाग को परेशानी हो रही है.
यहीं मदर एंड चाइल्ड वार्ड का निर्माण होना था. एक साल पहले सदर अस्पताल में एजेंसी को मिट्टी जांच के लिए भेजा गया था. उस वक्त कहा गया था निर्माण कार्य दो साल में पूरा कर लिया जायेगा. लेकिन एक साल से ज्यादा वक्त गुजरने के बाद भी अब तक पटना से कोई खबर नहीं आयी.
जेएलएनएमसीएच में दो सुविधाओं पर लगा है ग्रहण : जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज सह अस्पताल में दो सेवा आरंभ होने वाली थी. एक साल के प्रयास पर आई बैंक को लाइसेंस तो मिल गया. इससे पहले इंचार्ज का तबादला हो गया. अब समस्या यह है कि सरकार इस पद पर नियुक्ति करेगी.
लेकिन दो माह गुजर जाने के बाद भी अब तक किसी की नियुक्ति नहीं की गयी. वहीं, कैंसर अस्पताल के नक्शे को भाभा एटमिक रिसर्च सेंटर ने खारिज कर दिया है. अस्पताल प्रबंधन पटना, समेत आसपास इलाके से इस नक्शा को बनाया था. लगातार नक्शा खारिज होने से इस सेवा पर भी सवाल खड़ा हो गया है.
